जागरण संवाददाता, बाहरी दिल्ली

खुद को क्राइम ब्रांच का पुलिसकर्मी बताकर कारोबारी के गोदाम पर छापेमारी कर लूटपाट के मामले में आरोपित छह लोगों को रोहिणी कोर्ट ने बरी कर दिया।

रोहिणी नार्थ से जुड़ी इस घटना में क्राइम ब्रांच की टीम ने ही आरोपितों को गिरफ्तार किया था और उनसे लूटे गए रुपये बरामद करने का दावा भी किया था।

सुनवाई के दौरान क्राइम ब्रांच की कहानी में झोल नजर आने पर संदेह का लाभ देते हुए अदालत ने यह फैसला सुनाया। रोहिणी कोर्ट के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश एमआर सेठी ने कहा कि शिकायतकर्ता ने कोर्ट में मौजूद आरोपितों को नहीं पहचाना,

अभियोजन पक्ष की ओर से पेश गवाहों के बयानों में भी विरोधाभास है। गवाही के दौरान रेड में शामिल एक पुलिसकर्मी ने बताया कि मुखबिर ने सौ मीटर दूर से आरोपितों की शिनाख्त कराई जबकि दूसरे पुलिस कर्मी इस दूरी को दो सौ मीटर बताया। पुलिसकर्मी किस कार से रेड करने गए थे, यह भी स्पष्ट नहीं है। क्राइम ब्रांच की पुलिस जब आरोपितों को गिरफ्तार करने के लिए रेड करने गई थी, तब स्थानीय पुलिस को भी सूचना नहीं दी थी। ऐसे में यह लग रहा है कि कोर्ट के समक्ष कुछ तथ्यों के छिपाया जा रहा है। जिसके कारण अभियोजन पक्ष की कहानी में संदेह पैदा हो रहा है।

सुनवाई के बचाव पक्ष के वकील ऋषिपाल ¨सह ने दलीलें दी कि शिकायतकर्ता ने कहा कि आरोपितों ने उन्हें दो बैंक खाता नंबर देकर उनमें दो लाख रुपये जमा कराने का कहा था। लेकिन पुलिस ने जांच में इन खातों की जांच नहीं की और आरोपितों के मोबाइल नंबरों के बारे में कोई जांच नहीं की। इससे साफ है कि पुलिस ने निर्दोष लोगों को गिरफ्तार किया।

पेश मामले में पीड़ित कारोबारी ने नॉर्थ रोहिणी थाने में मामला दर्ज कराया था कि 2 सितंबर 2015 को नाहरपुर स्थित उनके गोदाम पर पांच छह लोग आए और खुद को क्राइम ब्रांच का पुलिसकर्मी बताया और बिल व टैक्स आदि के रसीद की मांग की। इनमें दो लोग पिस्टल लिए हुए थे। उन्होंने उन्हें धमकी देकर पांच लाख रुपये ले लिए थे और दो लाख और देने का दबाव बना रहे थे। जांच के क्रम में क्राइम ब्रांच ने प्रियवर्त राठी, संदीप ,सुनील, विपिन, महेश व कुलदीप को गिरफ्तार किया था।

Posted By: Jagran

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