काश! आम दिनों में भी ऐसा रहता कनॉट प्लेस, ब्रिक्स सम्मेलन के बीच छलका व्यापारियों का दर्द; पूछे तीखे सवाल
अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों के दौरान कनॉट प्लेस अतिक्रमण मुक्त और भव्य दिखा, लेकिन आम दिनों में रेहड़ी-पटरी वाले वापस आ जाते हैं।

ब्रिक्स सम्मेलन की तैयारियों के चलते चकाचक हुआ सीपी।
HighLights
BRICS सम्मेलन में कनॉट प्लेस अतिक्रमण मुक्त और भव्य दिखा।
व्यापारी और नागरिक स्थायी अतिक्रमण मुक्ति की मांग कर रहे हैं।
अदालती आदेशों के बावजूद सीपी में अवैध वेंडिंग जारी है।
जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। राजधानी के दिल कहे जाने वाले कनॉट प्लेस (सीपी) का भव्य और हेरिटेज स्वरूप एक बार फिर सोशल मीडिया से लेकर धरातल तक चर्चा के केंद्र में है।
हाल ही में अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों (जैसे ब्रिक्स और इससे पूर्व जी-20 शिखर सम्मेलन) के दौरान जब सुरक्षा और व्यवस्था के कड़े इंतजामों के बीच अवैध रेहड़ी-पटरी वालों को हटाया गया, तो सीपी के बरामदे और गलियारे 1980 के दशक की तरह पूरी तरह साफ-सुथरे और भव्य नजर आए।

वैसे ही साफ-सुथरे गलियारे, बैठने के लिए स्थान, रेडी पटरी वालों का कहीं निशान नहीं। भिखारी और बेघर भी नजर नहीं आ रहे। जैसे दशकों से अतिक्रमण बदहाली में जूझता दिल्ली का दिल खुलकर सांस ले रहा हो।
दिल्ली पुलिस की कार्यशैली पर सोशल मीडिया पर उठे सवाल
इसे लेकर स्थानीय व्यापारियों और दिल्लीवासियों ने सोशल मीडिया पर नई दिल्ली नगरपालिका परिषद (एनडीएमसी) और दिल्ली पुलिस की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठाए हैं।

व्यापारियों और आम नागरिकों का कहना है कि जब विदेशी प्रतिनिधियों और विदेशी मेहमानों के आगमन पर तीन से चार दिनों के लिए पूरा बाजार अवैध अतिक्रमण से मुक्त कराया जा सकता है, तो फिर साल के 365 दिन दिल्ली की आम जनता को यह हक क्यों नहीं मिलता?
दशकों पुराना विवाद और कोर्ट के कड़े आदेश
कनाट प्लेस में अवैध रेहड़ी-पटरी वालों और वेंडरों की समस्या कोई नई नहीं है। न्यू दिल्ली ट्रेडर्स एसोसिएशन (एनडीटीए) वर्षों से इस मुद्दे पर आंदोलन और कानूनी लड़ाई लड़ रहा है।
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दिल्ली उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय ने भी कई बार अपने आदेशों में स्पष्ट किया है कि कनाट प्लेस को नो-हाकिंग" और "नो-वेन्डिंग जोन घोषित किया गया है, ताकि इसके ऐतिहासिक और स्थापत्य महत्व की रक्षा की जा सके। इसके बावजूद, प्रशासनिक ढिलाई के कारण आए दिन बरामदों में अवैध दुकानें सज जाती हैं।

व्यापारियों का दर्द और सुरक्षा पर खतरा
स्थानीय व्यापारियों की अपील है कि अवैध वेंडरों के कारण न केवल नियमित दुकानदारों का व्यापार प्रभावित होता है, बल्कि पैदल चलने वाले खरीदारों को भी भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। कई बार भीड़भाड़ और संकरे रास्तों के कारण सुरक्षात्मक खतरा भी उत्पन्न हो जाता है।
जी-20 और ब्रिक्स जैसे बड़े आयोजनों के दौरान जब दिल्ली पुलिस और एनडीएमसी पूरी तरह मुस्तैद दिखती है, तो सीपी का असली वैभव लौट आता है। खरीदार बिना किसी रुकावट के खुले बरामदों में घूमते नजर आते हैं।

अब दिल्लीवासियों और व्यापारी संगठनों की मांग है कि प्रशासन इस 'अस्थायी सफाई' को 'स्थाई व्यवस्था' में बदले और अदालती आदेशों का सख्ती से पालन कराते हुए कनाट प्लेस को स्थायी रूप से अतिक्रमण मुक्त बनाए।
