त्योहारी सीजन में प्रदर्शनों से ठप कारोबार, कनॉट प्लेस के व्यापारियों की मार्मिक पुकार
त्योहारी सीजन में लगातार हो रहे विरोध-प्रदर्शनों से दिल्ली के कनॉट प्लेस के व्यापारी परेशान हैं। वे राजनीतिक दलों और प्रदर्शनकारियों से अपील कर रहे हैं।

त्योहारी सीजन में प्रदर्शनों से ठप कारोबार ( एआई इमेज )
HighLights
एनडीटीए की त्योहारी सीजन में प्रदर्शन रोकने की अपील।
प्रदर्शनों से दिल्ली के बाजारों को करोड़ों का भारी नुकसान।
व्यापारी चाहते हैं प्रदर्शन तय स्थलों पर ही आयोजित हों।
जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। ‘प्रिय, प्रदर्शनकारियों और सभी राजनीतिक दलों, हाथ जोड़कर एनडीटीए (एनडीटीए) का अनुरोध है कि इस त्योहारी सीजन में हमें अपनी आजीविका कमाने दें।
कनॉट प्लेस मार्केट के रेस्त्रां और दुकानों पर 5,000 से अधिक परिवार निर्भर करते हैं। कृपया प्रदर्शन करें, लेकिन सीपी मार्केट में नहीं...’
नई दिल्ली ट्रेडर्स एसोसिएशन (एनडीटीए) की इंटरनेट मीडिया पर यह अपील केवल कुछ शब्द नहीं, बल्कि उस दिल्ली के दिल और प्रमुख लोकप्रिय अंतरराष्ट्रीय कारोबारी हब कनॉट प्लेस की मार्मिक पुकार है, जो लगातार कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी), कांग्रेस पार्टी और वामदलों जैसे राजनीतिक दलों के प्रदर्शनों की भेंट चढ़ रहा है।
त्योहारी सीजन में ठप कारोबार और डर का माहौल
जुलाई से शुरू हुआ विरोध-प्रदर्शनों का सिलसिला दो अक्टूबर से लेकर मध्य अक्टूबर तक और अधिक आक्रामक हो चुका है।
आगामी 16 अक्टूबर को कनॉट प्लेस के सेंट्रल पार्क में 'लहरा दो तिरंगा' अभियान और सीजेपी के विभिन्न आंदोलन आयोजनों को लेकर एक बार फिर कनॉट प्लेस और लुटियंस दिल्ली के कारोबारी, रेस्त्रां संचालक और होटल मालिक गहरी अनिश्चितता और खौफ के साए में जीने को मजबूर हैं।
हालात यह हैं कि बार-बार होने वाले इन प्रदर्शनों, उग्र नारेबाजी, सुरक्षा के मद्देनजर लगाई जाने वाली भारी बैरिकेडिंग, बंद रास्तों तथा रास्तों के डायवर्जन से दिल्ली के प्रमुख बाजारों का व्यापार पटरी से उतर गया है।
इससे न आम जनजीवन अस्त व्यस्त परेशान और मुश्किल में है, बल्कि दिल्ली के व्यावसायिक केंद्रों को हर दिन करोड़ों का चूना लग रहा है।
करोड़ों का नुकसान
एक अनुमान के मुताबिक, सेंट्रल दिल्ली के बाजारों में जहां रोजाना लगभग 250 करोड़ रुपये का कारोबार होता है। वहीं प्रदर्शनों और पाबंदियों के दिनों में यह आंकड़ा सिमटकर आधे से भी कम रह जाता है।
प्रदर्शन और हिंसा से डरे खरीदार, नहीं आते बाजार
बाहरी राज्यों से आने वाले थोक और खुदरा खरीदारों की संख्या में 70 प्रतिशत तक की गिरावट आई है। दो से तीन लाख की जगह बमुश्किल 40-50 हजार लोग ही बाजारों का रुख कर पा रहे हैं।
त्योहारी सीजन पर ग्रहण
अक्टूबर माह में शारदीय नवरात्रि से लेकर दीपावली तक का समय व्यापारियों के लिए साल का सबसे बड़ा सीजन होता है, जिस पर इन राजनीतिक और वैचारिक आंदोलनों ने पानी फेर दिया है। कनॉट प्लेस, जनपथ, पालिका बाजार और खान मार्केट के रेस्त्रां व दुकानें खाली पड़ी हैं।
शीर्ष नेतृत्व और न्यायपालिका से गुहार
इस आर्थिक त्रासदी से आजिज आकर देश भर के प्रमुख व्यापारी संगठनों (जैसे सीटीआइ और एनडीटीए) ने मोर्चा खोल दिया है। कारोबारियों ने देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, भारत के मुख्य न्यायाधीश और विपक्ष के नेता राहुल गांधी को पत्र लिखकर गंभीर हस्तक्षेप की मांग की है।
व्यापारियों की स्पष्ट मांग
विशेष उत्सवों और पर्वों के दौरान लुटियंस दिल्ली, जंतर-मंतर या कनाट प्लेस जैसे संवेदनशील व्यावसायिक इलाकों में बड़े धरने-प्रदर्शन प्रतिबंधित किए जाएं।
तय प्रदर्शन स्थलों पर हो प्रदर्शन
व्यापारी संगठनों का कहना है कि प्रदर्शन संवैधानिक अधिकार है। लेकिन, उनकी आजीविका कुचल कर नहीं। ऐसे में शहर के बीचों-बीच आम जनता और व्यापारियों का दम घुटने के बजाय प्रदर्शनों के लिए रामलीला मैदान समेत प्रदर्शन के लिए तय स्थानों पर प्रदर्शन हो।
व्यापारी संगठनों की मांग
धरना-प्रदर्शनों में भीड़ की सीमा तय हो, ताकि आम नागरिकों की आजीविका और सुरक्षित जीवन का अधिकार सुरक्षित रह सके।
लोकतंत्र में विरोध जताना हर नागरिक और दल का अधिकार है। लेकिन, क्या किसी के अधिकारों की लड़ाई दूसरों के पेट पर लात मारने का लाइसेंस बन सकती है? यह वह सुलगता हुआ सवाल है, जो आज दिल्ली का हर व्यापारी पूछ रहा है।
विरोध-प्रदर्शनों के कारण त्योहारी मौसम में भारी आर्थिक क्षति और आम लोगों को हो रही परेशानियों को लेकर दिल्ली के व्यापारी संगठनों का आक्रोश फूटने लगा है।
विभिन्न व्यापारिक व औद्योगिक संगठनों ने यह मांग तब की है, जब दिल्ली में ही दो अक्टूबर से शुरू विरोध-प्रदर्शनों और हंगामे के कारण करीब सात हजार करोड़ रुपये का कारोबार प्रभावित हो चुका है।
फेडेरेशन आफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री आफ इंडिया (एफटीआइआइ) और भारतीय उद्योग व्यापार मंडल ने राहुल गांधी से सीईसी के खिलाफ चल रहे प्रदर्शन को वापस लेने की अपील की है।
त्योहार व्यापारियों के लिए जीवन रेखा के समान
संगठनों का कहना है कि नवरात्र से छठ पूजा तक का समय देश के करोड़ों व्यापारियों, कर्मचारियों व दैनिक वेतनभोगियों के लिए जीवन रेखा के समान होता है। मुख्य मार्गों व बाजारों की नाकेबंदी से छोटे उद्योग और फुटकर विक्रेता गंभीर आर्थिक संकट में आ रहे हैं।
कनॉट प्लेस के कारोबारी संगठन नई दिल्ली ट्रेडर्स एसोसिएशन ने पीएम मोदी से बाजारों, औद्योगिक क्षेत्रों और परिवहन मार्गों की सुरक्षा के लिए कठोर प्रशासनिक व कानूनी कदम उठाने की मांग की है।
इसी तरह, एफएआइडीए और महिला व्यापार महासंघ ने सीजेआइ को लिखे पत्र में कहा कि जबरन बाजार बंद कराना लोकतांत्रिक अधिकारों का दुरुपयोग है। उनका भी अधिकार आजीविका का भी है।
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