सरकार की लिखित गारंटी के इंतजार में CJP, बोली- किसी भी आदेश या फैसले को नहीं करेंगे स्वीकार
सुप्रीम कोर्ट के आदेश से उत्पन्न स्थिति पर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) बेचैन है, जहां सरकार आपराधिक पृष्ठभूमि वाले प्रदर्शनकारियों ...और पढ़ें
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सुप्रीम कोर्ट के आदेश से फंसे पेंच से सीजेपी की बेचैनी बढ़ती जा रही है। सौरव दास को सरकार की लिखित गारंटी का इंतजार है। एएनआई (फाइल फोटो)
HighLights
CJP सुप्रीम कोर्ट के आदेश से बढ़ी बेचैनी।
आपराधिक पृष्ठभूमि वाले प्रदर्शनकारियों पर कार्रवाई संभव।
लिखित गारंटी न मिलने पर देशव्यापी आंदोलन की चेतावनी।
जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट के आदेश से फंसे पेंच से काॅकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) की बेचैनी बढ़ती जा रही है। बुधवार को केंद्र सरकार के प्रतिनिधियों ने भी सीजेपी पदाधिकारियों को सुप्रीम कोर्ट के हवाले से स्पष्ट किया कि राज्य सरकारें आपराधिक पृष्ठभूमि वाले प्रदर्शनकारियों के मामले में आगे बढ़ सकती हैं। यह मामला अब न्यायालय के अधीन हो गया है।
देशभर में नया आंदोलन शुरू करेगी
ऐसे में सीजेपी को लगने लगा है कि इस मामले में आगे की राह उसकी काफी कठिन है। इसलिए फिर आंदोलन कार्ड चलते हुए चेताया है कि प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज एफआइआर को रद करने को लेकर उसे तुरंत लिखित आश्वासन नहीं मिलता तो वह देशभर में नया आंदोलन शुरू करेगी।
सीजेपी लिखित में गारंटी का कर रही इंतजार
सीजेपी के प्रवक्ता सौरभ दास ने बताया कि बुधवार शाम सरकारी प्रतिनिधियों के निमंत्रण पर वह उनसे मिलने गए थे। तो उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का आदेश दिखाया। खास तौर पर, निर्देश संख्या चार में कहा गया है कि मौजूदा एफआइआर की जांच आगे बढ़ सकती है।
प्रतिनिधियों ने उन्हें बताया कि चूंकि यह सुप्रीम कोर्ट का लिखित आदेश है, इसलिए मामला न्यायाधीन हो गया है। सीजेपी प्रवक्ता ने बताया कि उन्होंने प्रतिनिधियों से सीधे पूछा भी कि क्या उनकी मांगों पर लिखित में गारंटी देंगे या नहीं, लेकिन उनकी ओर से अभी तक कोई जवाब नहीं मिला है।
सौरभ दास ने दावा किया कि सरकार ने शनिवार को यह गारंटी दी थी कि मंगलवार तक सभी एफआइआर वापस ले ली जाएगी। न केवल दिल्ली बल्कि भाजपा व एनडीए शासित सभी राज्यों में, हालांकि अब तक इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं की गई है।
आदेश को स्वीकार न करने की चुनौती
सीजेपी प्रवक्ता ने सरकार से किए गए वादे का सम्मान करने का आग्रह करते हुए आराेप लगाया कि वह देश के युवाओं के साथ बड़ा धोखा करने जा रहे हैं। हमने भी स्पष्ट कर दिया है कि हम सरकार की गारंटी का उल्लंघन करने वाले किसी भी आदेश या फैसले को स्वीकार नहीं करेंगे।
एक दिन पहले मंगलवार को ही सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्यों को निर्देश दिया कि वे नीट-यूजी 2026 पेपर लीक को लेकर हुए देशव्यापी विरोध प्रदर्शनों के दौरान गिरफ्तार या हिरासत में लिए गए 18 साल से कम उम्र के छात्रों को रिहा करें, बशर्ते उनका कोई आपराधिक रिकाॅर्ड न हो। कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि फिलहाल छात्रों के खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई न की जाए।
