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'बदलाव की घंटी बज चुकी है...', PM मोदी के 'दिमागी नक्सल' वाले बयान पर CJP का रिएक्शन

Published: Sun, 16 Aug 2026 02:29 PM (IST)

कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने प्रधानमंत्री मोदी के 'दिमागी नक्सल' शब्द के इस्तेमाल पर हमला बोला है। पार्टी प्रवक्ता सौरव ...और पढ़ें

सीजेपी प्रवक्ता सौरव दास और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी।

सीजेपी प्रवक्ता सौरव दास और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी।

HighLights

  1. CJP ने पीएम मोदी के 'दिमागी नक्सल' शब्द के प्रयोग पर हमला बोला।

  2. सौरव दास ने शिक्षित युवाओं को नक्सली कहने को 'अहंकार' बताया।

  3. पीएम मोदी ने लाल किला से 'दिमागी नक्सल' का जिक्र किया था।

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 'दिमागी नक्सल' शब्द का इस्तेमाल करने पर हमला बोला है। सीजेपी के मुख्य प्रवक्ता सौरव दास ने अपने ऑफिशियल एक्स (X) अकाउंट पर पोस्ट डालकर सवाल खड़े किए हैं।

उन्होंने अपनी पोस्ट में पीएम मोदी से सवाल करते हुए लिखा कि आप पढ़े-लिखे नौजवानों को 'नक्सली' वगैरह कैसे कह सकते हैं?

लाल किला से क्या बोले पीएम मोदी?

दरअसल, 80वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर पीएम मोदी ने शनिवार को लाल किला से राष्ट्र को संबोधित करते हुए कि समाज में हिंसा और अराजकता को बढ़ावा देने वाली मानसिकता के खिलाफ सतर्क रहने की जरूरत है। इस दौरान उन्होंने अपने भाषण में 'दिमागी नक्सल' शब्द का इस्तेमाल किया था।

युवाओं को सही मार्ग दिखाने की जरूरत

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि समाज को तोड़ने और गलत रास्ते पर ले जाने वाली मानसिकता के खिलाफ लोगों को सचेत करना आवश्यक है। राष्ट्र की प्रगति के लिए जरूरी है कि युवाओं की ऊर्जा को सही मार्ग मिले और उन्हें विकास प्रक्रिया का हिस्सा बनाया जाए।

पीएम ने मुद्दा उठाया कि लंबे समय तक माओवादी सोच के समर्थक सत्ता के प्रभावशाली पदों पर बने रहे। विभिन्न सरकारी पैनलों में सलाहकार की भूमिका में रहते हुए इस विचारधारा ने देश की राष्ट्रीय नीतियों और निर्णय-प्रक्रिया को भी प्रभावित किया।

यह भी पढ़ें- 'दिमागी नक्सली मौके की तलाश में हैं, इन्हें पहचानकर अलग-थलग करना होगा'; पीएम मोदी ने दी चेतावनी

सौरव दास ने X पर क्या लिखा?

'दिमागी नक्सल' या कुछ भी काम नहीं करेगा, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी। आप पढ़े-लिखे नौजवानों को 'नक्सली' वगैरह कैसे कह सकते हैं? सिर्फ इसलिए कि वे आपकी सरकार पर सवाल उठाते हैं? सरासर घमंड! उनकी समस्याओं को हल करने में सरासर नाकाबिलियत!

सौरव दास ने अपनी पोस्ट में यह भी लिखा कि घंटियां बज रही हैं। जागना आ गया है!