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अब CJP ने मांगा ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा, दिया 48 घंटे का अल्टीमेटम; जंतर-मंतर पर धरने की भी चेतावनी

Published: Thu, 24 Sep 2026 07:20 PM (IST)

कोकरोच जनता पार्टी (CJP) ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की है। पार्टी ने विशेष ...और पढ़ें

सीजेपी ने अब मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा मांगा।

सीजेपी ने अब मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा मांगा।

HighLights

  1. CJP ने CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की।

  2. मतदाता सूची से 13 करोड़ नाम हटाने का आरोप लगाया।

  3. 48 घंटे में मांगें न मानने पर देशव्यापी आंदोलन की चेतावनी।

जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। एसआईआर मामले को लेकर दो चुनाव आयुक्तों से मतभेद मुद्दे पर विपक्षी दलों के आक्रामक निशाने पर आए। मुख्य निर्वाचन आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार के विरुद्ध लेकर कोकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) ने मोर्चा खोल दिया है। उसने उनके इस्तीफे की मांग की है।

पार्टी ने विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया में बड़ी धांधली का आरोप लगाते हुए आयोग को 48 घंटे का अल्टीमेटम दिया है। मांग पूरी न होने पर पार्टी ने देशव्यापी आंदोलन और दिल्ली में अनिश्चितकालीन धरने की चेतावनी दी है। पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अभिजीत दिपके, सह-संयोजक सौरव दास और आशुतोष रंका ने गुरुवार को “इलेक्शन कमीशन ठीक करो” अभियान का आगाज किया।

नेताओं का दावा है कि 30 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में एसआईआर के दौरान प्रारूप मतदाता सूची से 13 करोड़ से अधिक (लगभग 13-14 प्रतिशत) मतदाताओं के नाम हटा दिए गए हैं। इनमें अकेले महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश में दो-दो करोड़, कर्नाटक में एक करोड़ और दिल्ली में 47 लाख नाम काटे गए हैं।

दिपके ने कहा कि लोकतंत्र में जनता सरकार चुनती है, लेकिन आयोग यह तय कर रहा है कि कौन वोट देगा और कौन नहीं। उन्होंने आरोप लगाया कि अन्य दो चुनाव आयुक्तों सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने नियमों को दरकिनार कर किए गए फैसलों और डेटा के केंद्रीकरण पर 14 बार औपचारिक आपत्तियां दर्ज कराई थीं।

सीजेपी ने रखी तीन प्रमुख मांगें:

– इस्तीफा व जांच: सीईसी ज्ञानेश कुमार तुरंत इस्तीफा दें और विवादास्पद फैसलों की स्वतंत्र जांच कराई जाए।

– कटौती पर रोक: मतदाता सूची से नाम हटाने की प्रक्रिया तुरंत रोकी जाए और जनवरी 2025 की स्थिति बहाल कर सभी रिकॉर्ड सुप्रीम कोर्ट को सौंपे जाएं।

– नियुक्ति कानून में बदलाव: चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति से जुड़े 2023 के कानून को रद्द कर पारदर्शी व्यवस्था लागू हो।

पार्टी ने स्पष्ट किया कि 48 घंटे में मांगें न मानने पर कार्यकर्ता सड़कों पर उतरेंगे और हक की लड़ाई लड़ेंगे।

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