जागरण संवाददाता, पश्चिमी दिल्ली : कोरोना संकट की वजह से लॉकडाउन के दौरान फैक्ट्रियां बंद हो गईं। सड़कें सुनसान हो गईं। लोग घरों में कैद हो गए। काफी दिनों तक यह सिलसिला चला, जिससे कामगारों को सबसे ज्यादा परेशानी हुई। उनके सामने एक-एक दिन गुजारना भारी होने लगा। इन लोगों की मदद के लिए भी कई लोग सामने आए और अपनी क्षमता के मुताबिक मदद भी की। इन्हीं में एक हैं रंजना देब। रंजना ने लॉकडाउन के दौरान कामगारों के बीच खाद्य सामग्रियों का वितरण किया। उनके हर सुख- दुख में साथ रहीं। अब जब धीरे-धीरे हालत संभल रहा है तो रंजना लोगों को नौकरी दिलाने में मदद कर रही हैं।

शक्ति फाउंडेशन की अध्यक्ष रंजना ने बताया कि वह लोगों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में करीब सात वर्षों से काम कर रही हैं। वे कोरोना संकट से पहले बेरोजगारों को टू डी व थ्री डी एनीमेशन का प्रशिक्षण देती थीं और उनका भविष्य बेहतर बनाने में मदद करती थीं। इसमें कई बच्चों ने प्रशिक्षण प्राप्त किया। कोरोना संकट के बाद उसे बंद करना पड़ा और अब फिर से ऑनलाइन कक्षा शुरू की जाएगी। उन्होंने कहा कि कामगारों को नौकरी दिलाने के लिए एक श्रम एप संस्था की ओर से बनाया गया है। इसमें हमारे संस्था के साथी कामगारों के पास जाते हैं और उनको रजिस्टर्ड करते हैं। अभी तक एक हजार लोगों का रजिस्ट्रेशन किया गया है। इस एप में ऐसे लोगों को भी जोड़ा जा रहा जिनको कामगारों की तलाश है। ऐसे में माध्यम बनकर एक दूसरे की मदद करने का प्रयास कर रहे हैं। यह एप दो अक्टूबर को लांच किया गया है। आशा है कि आगे इससे काफी संख्या में लोग जुड़ेंगे और एक-दूसरे की मदद के लिए आगे आएंगे। उन्होंने कहा कि हमारी संस्था महिलाओं को आत्मसुरक्षा का प्रशिक्षण भी देती है, जिससे कि विपरीत परिस्थितियों में महिलाएं खुद अपनी रक्षा कर सकें। इसके तहत कई शिविर का आयोजन किया गया। इसके अलावा पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी शक्ति फाउंडेशन कार्य करता है। इसके तहत राजधानी के विभिन्न इलाकों में पौधे लगाए जाते हैं।

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