दिल्ली HC से चित्रा रामकृष्ण को बड़ा झटका, NSE को-लोकेशन घोटाले में याचिका खारिज की; दखल देने से इनकार
दिल्ली हाई कोर्ट ने एनएसई को-लोकेशन घोटाले में चित्रा रामकृष्ण की याचिका खारिज कर दी है। अदालत ने कहा कि ...और पढ़ें

एनएसई की पूर्व सीईओ चित्रा रामकृष्ण की याचिका खारिज। फोटो: पीटीआई
HighLights
दिल्ली हाई कोर्ट ने चित्रा रामकृष्ण की याचिका खारिज की
एनएसई सीईओ को लोक सेवक माना जा सकता है
भ्रष्टाचार निवारण कानून के तहत संज्ञान वैध ठहराया
जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। दिल्ली हाई कोर्ट ने नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) की पूर्व प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) चित्रा रामकृष्ण को बड़ा झटका देते हुए को-लोकेशन घोटाला मामले में उनकी याचिका खारिज कर दी। चित्रा रामकृष्ण ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (पीसी एक्ट) के तहत ट्रायल कोर्ट द्वारा संज्ञान लेने के आदेश को चुनौती दी थी।
न्यायमूर्ति नवीन चावला और न्यायमूर्ति रविंद्र डुडेजा की पीठ ने कहा कि एनएसई केवल एक निजी कंपनी नहीं है, बल्कि वह सार्वजनिक हित से जुड़े महत्वपूर्ण आर्थिक कार्य करता है। ऐसे में उसके प्रबंध निदेशक और सीईओ के रूप में चित्रा रामकृष्ण भी सार्वजनिक दायित्व निभाती थीं।
पीसी एक्ट पर उठाया गया था सवाल
अदालत ने एनएसई के निदेशक मंडल की ओर से अभियोजन की मंजूरी को भी वैध ठहराया। साथ ही कहा कि केवल इस आधार पर मंजूरी को रद नहीं किया जा सकता कि पीसी एक्ट लागू होने का प्रश्न उठाया गया है।
चित्रा रामकृष्ण की ओर से दलील दी गई थी कि वह एक निजी कंपनी की कर्मचारी थीं, इसलिए उन्हें भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत लोक सेवक नहीं माना जा सकता है।
लोक सेवक की परिभाषा स्पष्ट
उन्होंने यह भी कहा कि कानून में लोक सेवक की परिभाषा अस्पष्ट है। हालांकि, हाई कोर्ट ने इन दलीलों को खारिज करते हुए कहा कि पीसी एक्ट में लोक सेवक की परिभाषा न तो अस्पष्ट है और न ही असंवैधानिक।
अदालत ने स्पष्ट किया कि एनएसई निवेशकों के हितों की रक्षा सहित सार्वजनिक महत्व के कार्य करता है और इसमें सरकारी कंपनियों की भी बड़ी हिस्सेदारी है। इसलिए प्रथमदृष्टया ट्रायल कोर्ट की कार्यवाही में हस्तक्षेप का कोई आधार नहीं बनता है।
ट्रेडिंग एल्गोरिद्म का दुरुपयोग किया
सीबीआई के अनुसार, वर्ष 2010 से 2014 के बीच कुछ ब्रोकरों ने एनएसई की को-लोकेशन सुविधा और ट्रेडिंग एल्गोरिद्म का दुरुपयोग कर अनुचित लाभ कमाया।
आरोप है कि यह सब कुछ एनएसई के कुछ अधिकारियों की मिलीभगत से हुआ। इसी मामले में सीबीआई ने वर्ष 2018 में मामला दर्ज किया था और मार्च 2022 में चित्रा रामकृष्ण को गिरफ्तार किया था। उन्हें सितंबर 2022 में दिल्ली हाई कोर्ट से जमानत मिल गई थी।
