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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jan 26, 2018 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

मां भारती के दीवानों का यहां लगता है मेला

By JagranEdited By:
Published: Fri, 26 Jan 2018 03:00 AM (IST)

स्वदेश कुमार, पूर्वी दिल्ली भगवान के मंदिर तो आपको हर जगह मिल जाएंगे, लेकिन एक मंदिर देश

मां भारती के दीवानों का यहां लगता है मेला
मां भारती के दीवानों का यहां लगता है मेला

स्वदेश कुमार, पूर्वी दिल्ली

भगवान के मंदिर तो आपको हर जगह मिल जाएंगे, लेकिन एक मंदिर देश के दीवानों के लिए भी है। दिलशाद गार्डन की एलआइसी कॉलोनी के पास भारत माता मंदिर है, जहां मां भारती के वीर सपूतों का मेला लगता है। भगवान के मंदिरों में वैदिक मंत्र, धूप-अगरबत्ती व दीये से पूजा होती है, जबकि मां भारती के मंदिर में प्रतिदिन मंत्र की जगह राष्ट्रगान गूंजते हैं और दीये की जगह तिरंगा लहराता है।

इस मंदिर के संस्थापक और पुजारी हैं डॉ. अर¨वद कुमार गुप्त, जो राष्ट्रकवि मैथिली शरण गुप्त के परिवार से ताल्लुक रखते हैं। बताते हैं कि इस मंदिर का शुभारंभ 15 अगस्त 2009 को चंद तस्वीरों के साथ हुई थी, लेकिन आज देश की 315 महान विभूतियों की तस्वीरें भी जुड़ी हैं। इस मंदिर में प्रवेश के साथ ही दिखती हैं भारत माता की अष्टभुजा वाली तस्वीर। ये भुजाएं देश के संचालन का तरीका बताती हैं। सात भुजाओं में हसिया-कृषि, किताब-शिक्षा, शंख-संचार, ब्रह्मांड-विज्ञान व तकनीक, तलवार-रक्षा, सोने के सिक्के-वित्त और आशीर्वाद-संस्कृति को दर्शाते हैं।

डॉ. अर¨वद कहते हैं कि आठवीं भुजा में तिरंगा है, जिसका मतलब है कि एक देश प्रेम प्रसार मंत्रालय होना चाहिए। इस मंदिर में तस्वीरों की शुरुआत वर्ष 1600 में अंग्रेजों के भारत आगमन से होती है। तस्वीरों के माध्यम से ही पता चलता है कि किस तरह अंग्रेजों ने यहां कारोबार शुरू किया और फिर देश को गुलाम बना दिया। इसके बाद पलासी का युद्ध और वेल्लूर के युद्ध से अंग्रेजों के खिलाफ आवाज उठी।

फिर 1857 प्रथम स्वतंत्रता संग्राम से जुड़ी तस्वीरें शुरू हो जाती है। शहीद मंगल पांडेय, झांसी की रानी के बाद दांडी मार्च, सविनय अवज्ञा आंदोलन, भारत छोड़ो, काकोरी कांड, चौरी-चौरा कांड, जालियांवाला बाग, आजाद ¨हद फौज के गठन आदि की तस्वीरें आपको स्वतंत्रता संग्राम से जोड़ देगा। इसके बाद भी देश में घटीं बड़ी घटनाएं यहां तस्वीरों में कैद हैं। इस मंदिर में स्वतंत्रता सेनानी, परमवीर चक्र विजेता, प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति, वैज्ञानिक के साथ 13 नोबेल पुरस्कार विजेता भी तस्वीरों में नजर आते हैं, जिनकी जन्मभूमि या कर्मभूमि भारत में है।

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अमिताभ और शाहरुख के पिता की भी जुड़ी हैं यादें

इस मंदिर में अभिनेता अमिताभ बच्चन और शाहरुख खान के पिता की यादें भी संजोयी गई हैं। महात्मा गांधी के साथ दांडी मार्च में शाहरुख खान के पिता तेज मोहम्मद खान की भी तस्वीर है। इसके साथ ही अमिताभ के पिता हरिवंश राय बच्चन भी मौजूद हैं।

आप भी जानिए, कैसे हुई थी मंदिर की शुरुआत

डॉ. अर¨वद मूल रूप से चीरगांव, झांसी, उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। राष्ट्रकवि मैथिली शरण गुप्त के परिवार से जुड़े होने के कारण उनके घर का माहौल राष्ट्रभक्ति वाला रहा है। उनके कमरों में स्वतंत्रता सेनानियों की तस्वीरें होती थीं। बचपन में इन्हें देखने के कारण डॉ. अर¨वद को इन तस्वीरों को संजोने की प्रेरणा मिली। पिता सुन्नू लाल बिश्वारी स्वतंत्रता सेनानी थे, लेकिन आपातकाल के दौरान उनकी मौत हो गई थी। इसके बाद डॉ. अर¨वद दिल्ली आ गए। यहां उन्होंने दवा का काम शुरू किया। 10 अगस्त 2009 को उनकी माता सोमती देवी का निधन हो गया और उनकी याद में ही उन्होंने पांच दिन बाद इस मंदिर की आधारशिला रखी।

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