नई दिल्ली, राज्य ब्यूराेे । बदरपुर बिजली सयंत्र से बिजली कम और प्रदूषण ज्यादा निकल रहा है। यह हम नहीं विशेषज्ञ कह रहे हैं। ऐसे में जब दिल्ली को प्रदूषण मुक्त करने के लिए अभियान चलाया जा रहा है विशेषज्ञों की यह राय चौंकाने वाली हो सकती है।

दिल्ली में प्रदूषण की समस्या और इसके निदान को लेकर इन दिनों चर्चा जोरों पर है। इसी चर्चा के बीच अब बदरपुर बिजली सयंत्र निशाने पर आ गया है और इसे बंद करने की मांग ने जोर पकड़ लिया है। अभी तक चिंता इसकी चिमनियों से निकलने वाला धुआं था, लेकिन अब परेशानी 767 एकड़ में फैली वो राख है जो दिल्ली की हवा में जहर की तरह दिन ब दिन घुल रही है।

सेंटर फोर साइंस एंड एन्वॉयरमेंट (सीएसई) की कार्यकारी निदेशक अनुमिता राय चौधरी बताती है कि इस प्लांट की क्षमता करीब 700 से 750 मेगावाट है, लेकिन ये अपनी क्षमता के मुकाबले 30 फीसद ही बिजली पैदा कर पा रहा है। जबकि इससे निकलने वाले राख के चलते दिल्ली में प्रदूषण की समस्या बढ़ रही है।

अनुमिता राय चौधरी बताती है कि आइआइटी, कानपुर की रिपोर्ट में साफ तौर पर इस बात का जिक्र है कि दिल्ली की हवा में फ्लाई एश (राख) की भारी मात्रा देखने को मिल रही है, जोकि ठीक नहीं है।

उन्होंने कहा कि ये फ्लाई एश बदरपुर प्लांट से निकल रही है और खुले मैदान में पड़ी है जोकि धीरे हवा के साथ दिल्ली की वायुमंडल में घुल रही है। इससे होने वाली परेशानी में सबसे ज्यादा फेफड़े प्रभावित होते है और अधिक समय तक ऐसी हवा में रहने पर कैंसर जैसी गंभीर बीमारी भी हो सकती है।

सीएसई की माने तो ये बड़ी समस्या है और यहीं कारण है कि एन्वॉयरमेंट पॉल्यूशन कंट्रोल ऑथारिटी (एपीसीए) इसे प्लांट को बंद करने की मांग सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष रख चुका है। चौधरी का मानना है कि ऐसा कहा जाता है कि इस प्लांट के बंद होने से दक्षिणी दिल्ली में बिजली की समस्या खडी हो सकती है तो इसका समाधान है सब स्टेशन का निर्माण और बवाना में प्राकृतिक गैस आधारित बिजली सयंत्र से बिजली उपलब्ध कराना।

सीएसई की माने तो इस राख के निदान के लिए इसकी ईंट बनाने की योजना है लेकिन इसकी उपलब्धता और इससे ईंट तैयार करने की प्रक्रिया में इतना अंतर है कि अब ये समाधान कारगर नहीं दिखता है और ऐसे में दिल्ली को प्रदूषण मुक्त बनाने के लिए इस सयंत्र के बंद करना ही उचित होगा।

रिपोर्ट के आंकड़े

1. IIT कानपुर की रिपोर्ट के अनुसार फ्लाईएश व वाहनों से पार्टिकुलेट मैटर (पीएम) 2.5 व पीएम 10 का प्रदूषण स्तर

पीएम 10 - फ्लाईएश - 37 फीसद

वाहन -9 फीसद

पीएम 2.5 फ्लाईएश -26 फीसद

वाहन -20 फीसद

गर्मियों में हवा की रफ्तार और वातावरण में शुष्कता के चलते फ्लाईएश हवा में ज्यादा तैरती है और ये प्रदूषण का अहम कारण बनती है।

2. वाहनों के अतिरिक्त गर्मियों में पीएम 10 व पीएम 2.5 विकसित करने वाले माध्यम व उनका प्रतिशत

कोयला और फ्लाई एश - 37- 26 फीसद

मिट्टी व सड़क की धूल - 26 -27 फीसद

अन्य माध्यम - 10 -15 फीसद

पत्तियां आदि जलाने से - 7 -12 फीसद

ठोस कूड़ा जलने से - 8 -7 फीसद

वाहनों से होने वाला प्रदूषण - 6 -9 फीसद

Posted By: Ramesh Mishra

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