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पांडवों की राजधानी इंद्रप्रस्थ की तलाश में फिर जुटा ASI, पुराना किला में होगी नई पुरातात्विक खोदाई

Published: Fri, 25 Sep 2026 10:02 PM (IST)

भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआइ) पांडवों की राजधानी इंद्रप्रस्थ की तलाश में पुराना किला में फिर से खोदाई करेगा। यह खोदाई ...और पढ़ें

एआई जेनेरेटेड इमेज।

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HighLights

  1. पुराना किला में इंद्रप्रस्थ की तलाश में फिर खोदाई होगी।

  2. एएसआइ कुंती मंदिर के पास प्राचीनतम परतों तक पहुंचेगा।

  3. खोदाई के बाद स्थल संग्रहालय विकसित करने की योजना है।

वी के शुक्ला, नई दिल्ली। पांडवों की राजधानी इंद्रप्रस्थ की तलाश में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआइ) पुराना किला में एक बार फिर पुरातात्विक खोदाई कराएगा। इसके लिए संस्थान ने मंजूरी दे दी है।

इस बार कुंती मंदिर के पास बचे हुए हिस्से में खोदाई कर पहले से मिली पुरातात्विक परतों के आगे जाया जाएगा। अभी तक पुराना किला की खोदाई से करीब 2500 वर्षों की लगातार आबादी का क्रम सामने आया है।

खोदाई का काम एएसआइ मुख्यालय और दिल्ली मंडल की टीम मिलकर करेगी। खोदाई पूरी होने के बाद यहां स्थल संग्रहालय विकसित करने की तैयारी है, जिसमें जमीन से मिले महत्वपूर्ण अवशेषों को प्रदर्शित किया जाएगा।

सात दशक से चल रहा है प्रयास

पुराना किला में इंद्रप्रस्थ से जुड़े पुरातात्विक प्रमाण तलाशने का प्रयास करीब सात दशक से चल रहा है। सबसे पहले 1954-55 में तत्कालीन पुरातत्वविद् प्राे बीबी लाल के नेतृत्व में खोदाई हुई थी। इसके बाद 1969 से 1973 के बीच दोबारा खोदाई कराई गई।

इसके बाद 2013-14 और 2017-18 में एएसआइ के अधिकारी डा वसंत कुमार स्वर्णकार के नेतृत्व में खोदाई हुई। वर्ष 2023 में भी खोदाई का तीसरा चरण किया गया, जिसका उद्देश्य पिछली खोदाई की परतों को सुरक्षित करने के साथ प्राचीनतम आबादी के प्रमाणों को और स्पष्ट करना था।

चित्रित धूसर मृदभांड से बढ़ी प्राचीनता की कड़ी

1954-55 से लेकर अब तक यहां की खोदाई में यहां चित्रित धूसर मृदभांड के टुकड़े मिले हैं। इन्हें महाभारत के समय से जोड़ुकर देखा जा रहा है। हालांकि इन प्रमाणों को सीधे महाभारतकालीन इंद्रप्रस्थ का निर्णायक प्रमाण नहीं माना गया है।

अब तक की खोदाई में यहां नौ सांस्कृतिक कालखंडों की लगातार आबादी के प्रमाण मिले हैं। इनमें मौर्य-पूर्व, मौर्य, शुंग, कुषाण, गुप्त, गुप्तोत्तर, राजपूत, सल्तनत और मुगल काल शामिल हैं। इस क्रम से पता चलता है कि इस स्थान पर अलग-अलग समय में लगातार मानव आबादी रही।

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