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जुनून की दिलचस्प कहानी: 41वीं बार मेट्रो के पहले यात्री बने अनिल मारवाह, जापान से क्या है कनेक्शन?

Published: Tue, 10 Mar 2026 06:00 AM (IST)

वसंत कुंज निवासी अनिल मारवाह दिल्ली मेट्रो के प्रति अपने अद्वितीय जुनून के लिए जाने जाते हैं। उन्होंने 8 मार्च ...और पढ़ें

वसंत कुंज निवासी अनिल मारवाह 41 बार बतौर पहले यात्री कर चुके हैं सफर। जागरण

वसंत कुंज निवासी अनिल मारवाह 41 बार बतौर पहले यात्री कर चुके हैं सफर। जागरण

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जागरण संवाददाता, दक्षिणी दिल्ली। दिल्ली मेट्रो लाखों लोगों के लिए रोजाना सहूलियत भरी यात्रा का साधन है, लेकिन दिल्ली के वसंत कुंज निवासी अनिल मारवाह के लिए यह सिर्फ सफर नहीं, बल्कि एक जुनून है।

यही वजह है कि वे हर नए रूट के उद्घाटन पर सबसे पहले मेट्रो में सवार होने की कोशिश करते हैं। इस जुनून के साथ वे आठ मार्च को बतौर पहले राइडर अपनी 41वीं यात्रा पूरी कर चुके हैं।

मारवाह ने दीपाली चौक चौक से मजलिस पार्क तक की यात्रा भी सबसे पहला कार्ड लेकर की। इसके बाद मजलिस पार्क से मौजपुर-बदरपुर रूट पर भी सफर किया।

मारवाह बताते हैं कि 1988-89 में वे जापान में थे, तब वहां लोकल मेट्रो का इस्तेमाल करते थे। उस समय उनके मन में यह ख्याल आता था कि दिल्ली में ऐसी आधुनिक सुविधा कब शुरू होगी। जब 2002 में दिल्ली मेट्रो शुरू हुई तो उन्होंने पहली ही यात्रा करने की ठानी और बेटे को लेकर शाहदरा से तीस हजारी तक का सफर पूरा किया।

दिलचस्प बात यह है कि मेट्रो के प्रति यह लगाव उनके परिवार में भी देखने को मिलता है। उनके बेटे ने भी एक्वा लाइन पर बतौर पहले यात्री सफर किया है। मारवाह एक ट्रैवलिंग कंपनी में बतौर जीएम कार्यरत हैं।

23 साल से ज्यादा समय बीता, जुनून नहीं हुआ कम

अनिल मारवाह बताते हैं कि यह सफर 25 दिसंबर 2002 को शुरू हुआ था, जब दिल्ली में पहली मेट्रो सेवा शुरू हुई थी। उस दिन शाहदरा से तीस हजारी तक पहली मेट्रो में सवार हुए थे। इसके बाद से हर नए रूट के उद्घाटन पर पहले यात्री बनने का सफर जारी है। वे हर पहली राइड का मेट्रो कार्ड संभालकर रखते हैं, जिसे वे अपनी यादों का हिस्सा मानते हैं।

इस अनोखी उपलब्धि के लिए उन्हें लिम्का बुक आफ रिकार्ड्स की ओर से प्रमाण पत्र भी मिल चुका है। वहीं दिल्ली मेट्रो ने भी उन्हें प्रशंसा पत्र देकर सम्मानित किया है। वे रीजनल रैपिड ट्रांजिट सिस्टम (आरआरटीएस) की वर्ष 2023 में शुरू हुई साहिबाबाद–दुहाई कारिडोर की पहली नमो भारत ट्रेन सेवा में भी बतौर पहले यात्री शामिल हुए थे, जिसके लिए एनसीआरटीसी के प्रबंध निदेशक विनय कुमार सिंह ने प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया गया था।

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मारवाह बताते हैं कि आफिस कनाट प्लेस है और वसंत कुंज से रोजाना मेट्रो से ही सफर करते हैं। हालांकि उन्हें इसमें कार के मुकाबले दोगुना समय लगता है लेकिन ये सफर उन्हें बेहद पसंद है और इसे अपनी लाइफलाइन मानते हैं। उनकी पत्नी अनुभा भी इस पहले सफर में कई बार साथ दे चुकी हैं। वहीं बेटे अक्षित और अंकित उन्हें हमेशा प्रेरित करते हैं।