'राम मंदिर भारत के वैश्विक गौरव और सांस्कृतिक जड़ों की वापसी का मार्ग', अशोक सिंहल की जन्मशताब्दी पर बोले अमित शाह
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि राम मंदिर का निर्माण भारत को सांस्कृतिक जड़ों की ओर लौटाकर विश्व ...और पढ़ें

स्व. अशोक सिंहल के जन्मशताब्दी समारोह के शुभारंभ अवसर पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह।
HighLights
अमित शाह ने राम मंदिर को भारत के वैश्विक गौरव का मार्ग बताया।
अशोक सिंहल की जन्मशताब्दी पर उनके विचारों को किया गया याद।
हिंदुत्व का विचार 'वसुधैव कुटुंबकम' पर आधारित है: गृह मंत्री।
नेमिष हेमंत, नई दिल्ली। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा है कि भारत का विश्व में गौरवमयी स्थान तभी सुनिश्चित हो सकता है, जब गुलामी के कलंक को मिटाकर देश अपनी सांस्कृतिक जड़ों की ओर लौटे। श्रीराम जन्मभूमि पर भव्य मंदिर का निर्माण केवल एक ढांचे का पुनर्निर्माण नहीं, बल्कि विश्व पटल पर भारत के विचार, संस्कृति और धर्म की श्रेष्ठता को पुनर्स्थापित करने का ऐतिहासिक मार्ग है।
वह विहिप के पूर्व अध्यक्ष स्व. अशोक सिंहल के जन्मशताब्दी समारोह के शुभारंभ अवसर को संबोधित कर रहे थे। अशोक सिंहल फाउंडेशन तथा विहिप द्वारा पूरे वर्ष अशोक सिंहल को समर्पित विभिन्न आयोजन आयोजित किए जाएंगे।
अमित शाह ने अशोक सिंहल के संकल्पों को रेखांकित करते हुए कहा कि उनका स्पष्ट मानना था कि राम मंदिर निर्माण के बाद ही भारत की वैश्विक प्रगति का मार्ग सुगम होगा। वर्ष 2014 के बाद देश में आए वैचारिक परिवर्तन और तत्पश्चात भव्य राम मंदिर के निर्माण से आज पूरे विश्व में भारतीय संस्कृति की अच्छाइयां और शांति का संदेश पहुंच रहा है। राम जन्मभूमि आंदोलन के दौरान निर्मम लाठीचार्ज में चोटिल होने के बावजूद अशोक सिंहल ने जिस निष्ठा और साहस के साथ संघर्ष का नेतृत्व किया, वह आज भी युवाओं के लिए प्रेरणा स्रोत है।
वसुधैव कुटुंबकम के आधार पर निस्वार्थ और बिना भेद प्रेम की सीख
धर्म और हिंदुत्व की व्यापकता पर प्रकाश डालते हुए गृह मंत्री ने एक संस्मरण साझा किया। उन्होंने बताया, जब मैंने अशोक सिंहल से हिंदुत्व के प्रति उनकी अटूट निष्ठा का कारण पूछा, तो उन्होंने बड़े सरल शब्दों में कहा था कि यदि संपूर्ण ब्रह्मांड का कल्याण कोई विचार कर सकता है, तो वह केवल हिंदू धर्म ही है। हिंदू चिंतन किसी संकुचित दायरे में नहीं बंधा, बल्कि यह शांति मंत्र और वसुधैव कुटुंबकम के आधार पर निस्वार्थ व बिना भेद प्रेम की सीख देता है।
समारोह के दौरान अमित शाह ने स्पष्ट किया कि राष्ट्रनायकों का स्मरण करना केवल भावना व्यक्त करना नहीं, बल्कि एक अनिवार्य राष्ट्रीय आवश्यकता है। यदि समाज अपने महापुरुषों के त्याग और पुरुषार्थ को युवाओं तक नहीं पहुंचाएगा, तो समाज में वैचारिक शून्यता पैदा होगी। इस शून्यता को रोकने और नई पीढ़ी को सही दिशा व आदर्श देने के लिए अशोक सिंहल का सादगीपूर्ण, अनुशासित और राष्ट्रभक्ति से ओतप्रोत जीवन सदैव मार्गदर्शक बना रहेगा। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले ने अशोक सिंहल को याद करते हुए कहा कि उन्होंने कभी हार नहीं मानी, वह दृढ़ निश्चियी थे।
श्रीराम के दिव्य पदचिन्ह कॉफी टेबल बुक का विमोचन किया गया
विहिप के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष आलोक कुमार ने कहा कि वह आत्मविश्वास से भरे तथा हिंदुओं को एकजुट करने में जुटे रहे। महामंडलेश्वर स्वामी परमानंद गिरि ने अपने साथ के स्मरण साझा किए तो अशोक सिंहल फाउंडेशन के अध्यक्ष व राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष महेश भागचंदका ने श्रीराम स्तंभों की जानकारी दी। आयोजन में श्रीराम स्तंभ का लोकार्पण तथा मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम के दिव्य पदचिन्ह कॉफी टेबल बुक का विमोचन किया गया।
