अक्षरधाम का विस्तार या यमुना फ्लडप्लेन पर बढ़ता कंक्रीट? 21545 वर्गमीटर नए निर्माण को मिली हरी झंडी
यमुना किनारे स्थित अक्षरधाम सांस्कृतिक परिसर के विस्तार को राज्य पर्यावरण प्रभाव आकलन प्राधिकरण ने पर्यावरणीय शर्तों के साथ मंजूरी ...और पढ़ें

एआई जेनेरेटेड इमेज।
HighLights
अक्षरधाम विस्तार को पर्यावरणीय शर्तों के साथ मिली मंजूरी।
9,728 पेड़ों को संरक्षित रखने और 50 नए पौधे लगाने की शर्त।
पर्यावरण विशेषज्ञों ने यमुना फ्लडप्लेन में निर्माण पर चिंता जताई।
राज्य ब्यूरो, नई दिल्ली। यमुना किनारे स्थित अक्षरधाम सांस्कृतिक परिसर के विस्तार का रास्ता साफ होता दिख रहा है। राज्य पर्यावरण प्रभाव आकलन प्राधिकरण ने बोचासनवासी श्री अक्षर पुरुषोत्तम स्वामीनारायण संस्था की ओर से प्रस्तावित विस्तार के लिए पर्यावरणीय मंजूरी की सिफारिश की है। हालांकि, मंजूरी के साथ कई पर्यावरणीय शर्तें भी जोड़ी गई हैं।
प्रस्ताव के तहत मौजूदा सभा मंडप के 2,954.2 वर्गमीटर हिस्से को हटाकर उसकी जगह और आसपास कुल 24,500 वर्गमीटर तक नया निर्माण किया जाएगा।
इससे परिसर के मौजूदा निर्मित क्षेत्र में करीब 21,545.7 वर्गमीटर की वृद्धि होगी और कुल निर्मित क्षेत्र करीब 90,807.5 वर्गमीटर हो जाएगा। नए सभा मंडप को भूतल के अलावा तीन मंजिल और मेजेनाइन स्तर तक सीमित रखने की बात कही गई है। इसकी अधिकतम ऊंचाई 29.6 मीटर होगी, जबकि परिसर की पहले स्वीकृत अधिकतम ऊंचाई 37.3 मीटर थी।
प्राधिकरण ने पर्यावरण संरक्षण को लेकर खास तौर पर पेड़ों पर जोर दिया है। परिसर में मौजूद 9,728 पेड़ों को बिना काटे या प्रत्यारोपित किए संरक्षित रखने की शर्त रखी गई है। इसके अलावा देशी प्रजातियों के 50 नए पौधे लगाए जाएंगे। इन पौधों की जीवित रहने की स्थिति, रोपण स्थल और जियो-टैग वाली तस्वीरों की जानकारी हर छह महीने की अनुपालन रिपोर्ट में देनी होगी।
पर्यावरण विशेषज्ञों ने जताई चिंता
हालांकि, पर्यावरण विशेषज्ञों ने इस विस्तार को लेकर चिंता जताई है। यमुना एक्टिविस्ट भीम सिंह रावत ने कहा कि सबसे अहम सवाल यह है कि प्रस्तावित स्थल यमुना के फ्लडप्लेन या ‘ओ’ जोन में आता है या नहीं। उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र में भूजल स्तर जमीन से महज करीब 4.05 मीटर नीचे है और विस्तार से 21,545.7 वर्गमीटर क्षेत्र और पक्का होगा।
रावत ने कहा कि दिल्ली के मास्टर प्लान-2047 में फ्लडप्लेन को और कंक्रीट से भरने के बजाय उसे हरित क्षेत्र के रूप में विकसित करने की परिकल्पना की गई है। ऐसे में यह परियोजना उस व्यापक सोच के विपरीत जाती है।
