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AIIMS और गूगल का कमाल, AI बताएगा किस मरीज को पहले देखना है; 'आरोग्यम' और 'इंडसडर्मा' का पायलट प्रोजेक्ट शुरू

Published: Sat, 26 Sep 2026 07:43 AM (IST)

एम्स दिल्ली और गूगल ने 'आरोग्यम' और 'इंडसडर्मा' नामक दो एआई टूल विकसित किए हैं। इनका उद्देश्य ओपीडी में मरीजों ...और पढ़ें

गूगल और एम्स से मिलकर तैयार किए दो एआई टूल। फोटो: आर्काइव

गूगल और एम्स से मिलकर तैयार किए दो एआई टूल। फोटो: आर्काइव

HighLights

  1. एम्स-गूगल ने 'आरोग्यम' और 'इंडसडर्मा' एआई टूल विकसित किए

  2. 'आरोग्यम' से ओपीडी में मरीजों का प्रतीक्षा समय 40% घटेगा

  3. 'इंडसडर्मा' भारतीय त्वचा के अनुसार त्वचा रोगों की पहचान करेगा

अनूप कुमार सिंह, नई दिल्ली। एम्स की ओपीडी में AI डॉक्टरों को यह तय करने में मदद करेगा कि किस मरीज को पहले देखने की आवश्यकता है और किसे बाद में।

एम्स दिल्ली और गूगल ने इसके लिए ‘आरोग्यम’ AI टूल तैयार किया है, इसका उद्देश्य गंभीर मरीजों का प्रतीक्षा समय 40 प्रतिशत तक कम करना है।

आरोग्यम मरीज की आरंभिक चिकित्सीय जानकारी और जांच के आधार पर प्राथमिकता यह तय करने में सहायता करेगा कि किस मरीज को पहले देखने की आवश्यकता है।

इसके साथ ही एम्स और गूगल ने एक अन्य AI टूल ‘इंडसडर्मा’ भी विकसित किया है, जो मरीज की त्वचा की फोटो और अन्य जानकारी के आधार पर त्वचा रोगों की पहचान में चिकित्सकों की मदद करेगा।

इन दोनों AI टूल का एम्स में पायलट प्रोजेक्ट चल रहा है। डॉक्टरों को आरोग्यम के जरिये ओपीडी में आने वाले मरीजों को "ट्रायेज" करने में सविधा होगी।

ट्रायेज मरीज की स्थिति के आधार पर प्राथमिकता तय करने की प्रक्रिया को कहा जाता है। गूगल के अनुसार आरोग्यम के उपयोग से विशेषज्ञ को दिखाने से पहले मरीज का प्रतीक्षा समय 40 प्रतिशत तक कम करने का लक्ष्य है।

एम्स और गूगल का यह सहयोग भारत की आवश्यकताओं के अनुरूप स्वास्थ्य AI विकसित करने की पहल का हिस्सा है। प्रो.डाॅ. रीमा दादा प्रभारी मीडिया सेल ने इसकी पुष्टि की।

भारतीयों को ध्यान में रख किया तैयार

एम्स के अनुसार इंडसडर्मा को भारतीय आबादी की त्वचा के रंग और स्वास्थ्य आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर विकसित किया गया है। यह त्वचा की फोटो और मरीज की जानकारी का उपयोग कर आरंभिक स्तर पर त्वचा रोगों की पहचान में सहायता करेगा। इससे आवश्यकता वाले मरीज को विशेषज्ञ तक पहुंचाने की प्रक्रिया तेज होगी।

डॉक्टरों का विकल्प नहीं है AI

एम्स-गूगल की पहल में AI को डॉक्टर के विकल्प के रूप में नहीं, बल्कि उनकी सहायता के उपकरण के तौर पर विकसित किया जा रहा है। मेडजेम्मा आधारित ये मॉडल स्वास्थ्य तस्वीरों और लिखित जानकारी को समझने में मदद करते हैं। AI से मिलने वाली जानकारी के आधार पर चिकित्सकीय निर्णय डॉक्टर करेंगे।

15000 मरीजों तक पहुंचने की तैयारी

दोनों उपकरणों में प्रतिदिन 15 हजार तक ओपीडी मरीजों की स्थिति का आकलन करने की क्षमता है। इसके साथ ही कुष्ठ रोग तथा यौन एवं प्रजनन स्वास्थ्य से जुड़े AI मॉडल विकसित करने पर भी काम कर किया जा रहा है।

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