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एम्स और गूगल का कमाल, अब ओपीडी में AI बताएगा किस मरीज का इलाज पहले होगा, प्रतीक्षा समय 40% होगा कम

Published: Tue, 29 Sep 2026 07:58 PM (IST)

एम्स दिल्ली और गूगल ने 'आरोग्यम' और 'इंडसडर्मा' नामक एआई टूल विकसित किए हैं। ये उपकरण ओपीडी में मरीजों की ...और पढ़ें

दिल्ली एम्स और गूगल का कमाल

दिल्ली एम्स और गूगल का कमाल

HighLights

  1. एम्स-गूगल ने 'आरोग्यम' और 'इंडसडर्मा' एआई टूल विकसित किए।

  2. 'आरोग्यम' ओपीडी में मरीजों की प्राथमिकता तय करेगा, समय घटाएगा।

  3. 'इंडसडर्मा' भारतीय त्वचा के लिए त्वचा रोगों की पहचान करेगा।

अनूप कुमार सिंह, नई दिल्ली। एम्स की ओपीडी में एआई डॉक्टरों को यह तय करने में मदद करेगा कि किस मरीज को पहले देखने की आवश्यकता है और किसे बाद में। एम्स दिल्ली और गूगल ने इसके लिए ‘आरोग्यम’ एआई टूल तैयार किया है, इसका उद्देश्य गंभीर मरीजों का प्रतीक्षा समय 40 प्रतिशत तक कम करना है।

आरोग्यम मरीज की आरंभिक चिकित्सीय जानकारी और जांच के आधार पर प्राथमिकता यह तय करने में सहायता करेगा कि किस मरीज को पहले देखने की आवश्यकता है। इसके साथ ही एम्स और गूगल ने एक अन्य एआई टूल ‘इंडसडर्मा’ भी विकसित किया है, जो मरीज की त्वचा की फोटो और अन्य जानकारी के आधार पर त्वचा रोगों की पहचान में चिकित्सकों की मदद करेगा।

इन दोनों एआई टूल का एम्स में पायलट प्रोजेक्ट चल रहा है। डॉक्टरों को आरोग्यम के जरिये ओपीडी में आने वाले मरीजों को 'ट्रायेज' करने में सविधा होगी। ट्रायेज मरीज की स्थिति के आधार पर प्राथमिकता तय करने की प्रक्रिया को कहा जाता है।

गूगल के अनुसार आरोग्यम के उपयोग से विशेषज्ञ को दिखाने से पहले मरीज का प्रतीक्षा समय 40 प्रतिशत तक कम करने का लक्ष्य है। एम्स और गूगल का यह सहयोग भारत की आवश्यकताओं के अनुरूप स्वास्थ्य एआई विकसित करने की पहल का हिस्सा है। प्रो.डॉ. रीमा दादा प्रभारी मीडिया सेल ने इसकी पुष्टि की।

भारतीय मरीजों की त्वचा को ध्यान में रखकर तैयार किया इंडसडर्मा

एम्स के अनुसार इंडसडर्मा को भारतीय आबादी की त्वचा के रंग और स्वास्थ्य आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर विकसित किया गया है। यह त्वचा की फोटो और मरीज की जानकारी का उपयोग कर आरंभिक स्तर पर त्वचा रोगों की पहचान में सहायता करेगा। इससे आवश्यकता वाले मरीज को विशेषज्ञ तक पहुंचाने की प्रक्रिया तेज होगी।

डॉक्टरों का विकल्प नहीं

एम्स-गूगल की पहल में एआई को डॉक्टर के विकल्प के रूप में नहीं, बल्कि उनकी सहायता के उपकरण के तौर पर विकसित किया जा रहा है। मेडजेम्मा आधारित ये माडल स्वास्थ्य तस्वीरों और लिखित जानकारी को समझने में मदद करते हैं। एआई से मिलने वाली जानकारी के आधार पर चिकित्सकीय निर्णय डॉक्टर करेंगे।

15 हजार ओपीडी मरीजों तक पहुंचने की तैयारी

दोनों उपकरणों में प्रतिदिन 15 हजार तक ओपीडी मरीजों की स्थिति का आकलन करने की क्षमता है। इसके साथ ही कुष्ठ रोग तथा यौन एवं प्रजनन स्वास्थ्य से जुड़े एआई माडल विकसित करने पर भी काम कर किया जा रहा है।