विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

AIIMS दिल्ली की बड़ी उपलब्धि: स्तन कैंसर की स्क्रीनिंग के लिए बनाई AI तकनीक, कैसे मिलेगी मदद?

Published: Thu, 17 Sep 2026 04:07 PM (IST)

एम्स नई दिल्ली ने स्तन कैंसर की शुरुआती पहचान में मदद के लिए एआई-आधारित मैमोग्राफी व्याख्या तकनीक विकसित की है।

एम्स ने स्तन कैंसर पहचान के लिए एआई मैमोग्राफी तकनीक विकसित की। सांकेतिक तस्वीर

एम्स ने स्तन कैंसर पहचान के लिए एआई मैमोग्राफी तकनीक विकसित की। सांकेतिक तस्वीर

HighLights

  1. एम्स ने स्तन कैंसर पहचान के लिए एआई मैमोग्राफी तकनीक विकसित की।

  2. तकनीक रेडियोलॉजिस्टों को मैमोग्राफी छवियों की व्याख्या में सहायता करेगी।

  3. विशेषज्ञों की कमी वाले क्षेत्रों में यह तकनीक विशेष रूप से उपयोगी।

जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। स्तन कैंसर की शुरुआती पहचान में मदद के लिए एम्स नई दिल्ली ने ऑर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) आधारित मैमोग्राफी व्याख्या तकनीक विकसित की है।

वहीं, इस तकनीक को आगे विकसित करने, सत्यापन और संभावित चिकित्सकीय उपयोग की दिशा में काम करने के लिए बीपीएल टेक्नोलॉजी लिमिटेड को हस्तांतरित किया गया है।

एआई आधारित यह मॉडल मैमोग्राफी की तस्वीरों की व्याख्या में रेडियोलॉजिस्ट की सहायता करेगा। इससे तस्वीरों में दिखने वाले बदलावों पर विशेष ध्यान देने और आवश्यकता होने पर मरीज को आगे की जांच के लिए भेजने में मदद मिल सकती है।

विशेषज्ञों की कमी वाले क्षेत्रों में मिलेगी मदद

एम्स के अनुसार, तकनीक का उद्देश्य खासतौर पर ऐसे क्षेत्रों में रेडियोलॉजिस्ट की मदद करना है, जहां स्तन इमेजिंग के विशेषज्ञ चिकित्सकों की उपलब्धता सीमित है। एआई मैमोग्राफी जांच में प्रभावित हिस्सों को चिन्हित करने में सहायता कर सकता है।

इससे डॉक्टर को जांच की तस्वीरों का आकलन करने में अतिरिक्त मदद मिलेगी। हालांकि, एआई रेडियोलाजिस्ट का विकल्प नहीं होगा और मरीज के संबंध में अंतिम चिकित्सकीय निर्णय डॉक्टर ही लेंगे।

मरीजों को क्या होगा लाभ

मैमोग्राफी में स्तन के टिश्यू में होने वाले ऐसे बदलाव भी दिखाई दे सकते हैं, जिन्हें सामान्य रूप से महसूस करना मुश्किल होता है। एआई आधारित तकनीक प्रभावित बदलावों को चिन्हित करने में रेडियोलॉजिस्ट की मदद कर सकती है।

इससे आवश्यकता के अनुसार, मरीज की अतिरिक्त जांच कराने का निर्णय लेने में सहायता मिल सकती है। खासकर विशेषज्ञों की कमी वाले क्षेत्रों में यह तकनीक जांच की व्याख्या में अतिरिक्त सहायता उपलब्ध करा सकती है।

तकनीक का विकास और सत्यापन

तकनीक हस्तांतरण समारोह 16 सितंबर को एम्स में हुआ। इसमें एम्स के निदेशक प्रो. निखिल टंडन और बीपीएल टेक्नोलॉजी लिमिटेड के मुख्य वित्त अधिकारी अजय जिंदल ने समझौते का आदान-प्रदान किया।

कार्यक्रम में एम्स के एसोसिएट डीन (शोध) प्रो. गोविंद मखारिया, आईपीआर सेल के प्रमुख प्रो. वेलपांडियन, रेडियोलॉजी विभाग की प्रो. स्मृति हरि और डॉ. कृतिका रंगराजन समेत अन्य अधिकारी मौजूद रहे।

एम्स के अनुसार, तकनीक हस्तांतरित होने के बाद इसका आगे विकास और सत्यापन किया जाएगा। इसके बाद संभावित चिकित्सकीय उपयोग की दिशा में काम होगा। इसलिए अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि इससे मरीजों में स्तन कैंसर की पहचान की दर कितनी बढ़ेगी या बीमारी कितनी जल्दी पकड़ में आएगी।

शोध को मरीजों तक पहुंचाने की दिशा में कदम

एम्स निदेशक प्रो. निखिल टंडन ने कहा कि शैक्षणिक संस्थानों में होने वाले शोध को वास्तविक स्वास्थ्य आवश्यकताओं से जुड़ी तकनीक में बदलना महत्वपूर्ण है। उन्होंने उम्मीद जताई कि यह पहल एम्स में विकसित होने वाली ऐसी और तकनीकों के लिए रास्ता तैयार करेगी।

डॉ. कृतिका रंगराजन ने तकनीक विकसित करने वाली टीम, एम्स के शोध विभाग और शिक्षा मंत्रालय के सहयोग के लिए आभार जताया।

परियोजना में मशीन लर्निंग इंजीनियरिंग टीम के ओम शिवोम, कुशाग्र चतुर्वेदी और आशीष रस्तोगी, रेडियोलॉजिस्ट डॉ. अमित गुप्ता और डॉ. वरुण होल्ला तथा हेमा मल्होत्रा के नेतृत्व वाली प्रबंधकीय टीम समेत अन्य सदस्यों का योगदान रहा।

यह भी पढ़ें- एम्स दिल्ली में 'अहम की लड़ाई' से बंद हुई कीमोथेरेपी सेवा, कैंसर मरीज परेशान