उम्र बढ़ने के साथ आंत में बदलाव का दिमाग पर असर, घटते गुड बैक्टीरिया से बढ़ सकता है अल्जाइमर-पार्किंसन का खतरा
आयु बढ़ने के साथ आंत में होने वाले बदलाव मस्तिष्क के स्वास्थ्य पर प्रभाव डाल सकते हैं, जिससे अल्जाइमर और पार्किंसन जैसी न्यूरोडीजेनेरेटिव बीमारियों का खतरा बढ़ता है।

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HighLights
आयु बढ़ने से आंत के सूक्ष्मजीवों में बदलाव मस्तिष्क को प्रभावित करते हैं।
अल्जाइमर और पार्किंसन जैसी न्यूरोडीजेनेरेटिव बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है।
स्वस्थ खानपान और जीवनशैली आंत-मस्तिष्क संबंध को बेहतर बनाने में सहायक।
अनूप कुमार सिंह, नई दिल्ली। आयु बढ़ने के साथ आंत में होने वाले बदलाव मस्तिष्क के स्वास्थ्य पर भी प्रभाव डाल सकते हैं। पाचन तंत्र पर तो इसका असर पड़ता ही है। ऐसा आंत में मौजूद सूक्ष्म जीवों के संतुलन का बदलो से होता है।
आयु बढ़ने से आंत में लाभकारी बैक्टीरिया की संख्या कम हो जाती है, जिससे आंतों में सूजन बढ़ने से अल्जाइमर और पार्किंसन जैसी न्यूरोडीजेनेरेटिव बीमारियों का प्रभाव बढ़ने लगता है।
यह जानकारी दिल्ली विवि के असिस्टेंट प्रोफेसर डा. शेखर नागर और जामिया मिल्लिया इस्लामिया की शोधकर्ता कृति मेहता के चिकित्सीय शोध में सामने आई। शोध एम्स के राष्ट्रीय सेमिनार में भी प्रस्तुत हुआ। डा. शेखर नागर दिल्ली विश्वविद्यालय के देशबंधु कालेज में प्राणी विज्ञान विभाग से हैं।
उम्र के साथ बदलता है आंत का माइक्रोबायोम
डा. शेखर नागर के अनुसार आंत में रहने वाले सूक्ष्म जीव भोजन पचाने के साथ रोग प्रतिरोधक क्षमता, शरीर के चयापचय और सूजन को नियंत्रित करने में भी भूमिका निभाते हैं। उम्र बढ़ने से इन सूक्ष्म जीवों की विविधता कम होने से लाभकारी बैक्टीरिया घटते हैं जबकि सूजन बढ़ाने वाले बढ़ते।
मस्तिष्क पर प्रभाव
डा. शेखर नागर और कृति मेहता के अनुसार आंत में मौजूद सूक्ष्म जीवों से बनने वाले पदार्थ व शरीर की प्रतिरोधक प्रतिक्रिया, आंत व दिमाग के संपर्क को प्रभावित कर सकते हैं।
इससे दिमाग में सूजन व तंत्रिका कोशिकाओं को नुकसान होने का खतरा रहता है। उम्र, आनुवंशिकता, खानपान, जीवनशैली और अन्य स्वास्थ्य संबंधी कारण भी इसमें भूमिका निभाते हैं।
याददाश्त और चलने में बदलाव को न करें नजरअंदाज
उम्र बढ़ने के साथ याददाश्त कमजोर होना, बार-बार भूलना, सोचने या निर्णय लेने में परेशानी, बोलते समय सही शब्द खोजने में दिक्कत, व्यवहार या व्यक्तित्व में बदलाव, हाथ-पैर में कंपकंपी और चलने या शरीर का संतुलन बनाए रखने में परेशानी जैसे लक्षण दिखाई दें तो उन्हें नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
खानपान और जीवनशैली
आंत के स्वास्थ्य को बेहतर रखने के लिए फल, सब्जियां, दालें और साबुत अनाज जैसे फाइबर वाले खाद्य पदार्थ भोजन में शामिल करना चाहिए। बहुत अधिक प्रोसेस्ड और पैकेट वाले भोजन, ज्यादा चीनी व वसा के सेवन और बिना जरूरत एंटीबायोटिक से भी बचना जरूरी है।
शोध में उपचार की संभावनाओं के तहत प्रीबायोटिक्स, प्रोबायोटिक्स, सिनबायोटिक्स, पोस्टबायोटिक्स और शार्ट चैन फैटी ऐसीड जैसे विकल्पों पर भी चर्चा की गई है। इनसे आंत में लाभकारी सूक्ष्म जीवों को बढ़ावा देने और गट-ब्रेन एक्सिस को बेहतर रखने में मदद मिल सकती है।
