​​नई दिल्ली, जागरण डिजिटल डेस्क। देश के जाने-माने कॉमेडियन राजू श्रीवास्तव के पार्थिव शरीर का बृहस्पतिवार को दिल्ली के निगम बोध घाट पर अंतिम संस्कार कर दिया गया। परिवार-रिश्तेदारों के अलावा उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र से आए करीबी लोगों ने नम आंखों से एक्टर-कॉमेडियन को अंतिम विदाई दी।

हार्ट अटैक के 40 मिनट बाद अस्पताल पहुंचे थे राजू श्रीवास्तव

वहीं, फैन्स के जेहन में यह सवाल अब भी कायम है कि क्या हार्ट अटैक के बाद कॉमेडी किंग राजू श्रीवास्तव को बचाया जा सकता था? तो इसका जवाब कुछ हद तक हां है।  दरअसल, हार्ट अटैक के बाद 30 मिनट बेहद होते हैं, लेकिन राजू श्रीवास्तव को दिल्ली एम्स लाने में 40 मिनट का समय लग गया।

राजू के ब्रेन को हो चुका था काफी नुकसान

विशेषज्ञ डॉक्टरों के मुताबिक, राजू श्रीवास्तव को 10 अगस्त को हार्ट अटैक के बाद ब्रेन को काफी नुकसान हो चुका था। डॉक्टरों का मानना है कि अगर उन्हें 15 मिनट में अस्पताल में भर्ती करा दिया जाता तो जान बचने की उम्मीद अधिक होती। बावजूद इसके डॉक्टर कभी नाउम्मीद नहीं होते हैं, इसलिए एम्स के विशेषज्ञ डॉक्टर नीतीश नाइक के नेतृत्व में टीम ने लगातार प्रयास किया, लेकिन बुधवार सुबह राजू श्रीवास्तव का निधन हो गया।

दक्षिण दिल्ली के होटल में ठहरे थे राजू श्रीवास्तव

दरअसल, राजू श्रीवास्तव के बड़े भाई सीपी श्रीवास्वत के कान का ऑपरेशन दिल्ली स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान में हुआ था। राजू श्रीवास्तव अपने भाई को देखने के लिए ही दिल्ली आए थे और दक्षिण दिल्ली के एक होटल में ठहरे थे।

जिम में वर्कआउट के दौरान आया था हार्ट अटैक

मिली जानकारी के मुताबिक, राजू श्रीवास्तव दक्षिणी दिल्ली इलाके में स्थित एक होटल में ठहरे थे और 14 अगस्त को वह जिम में कसरत कर रहे थे। कहा जा रहा है कि  होटल के पास ही एक जिम में दोपहर 12 बजे ट्रेडमिल पर दौड़ते हुए उन्हें हार्ट अटैक आया।

जाम की वजह से लगा 40 मिनट

होटल और दिल्ली एम्स की दूरी ज्यादा नहीं है, लेकिन ट्रैफिक जाम के चलते ही अधिक समय लगा। अगर पीक आवर में हार्ट अटैक हुआ होता तो अधिक समय लगता। दरअसल, हार्ट अटैक आते ही राजू श्रीवास्तव जिम में ही बेहोश होकर गिर पड़े। इसके बाद बेहोशी की हालत में उन्हें अस्पताल पहुंचाने में 40 मिनट का समय लगा।

हार्ट अटैक के बाद गिरते ही ब्रेन को हो गया नुकसान

विशेषज्ञों के अनुसार, जिम में कसरत करने के दौरान राजू श्रीवास्तव जैसे ही गिरे तो उनका ब्रेन क्षतिग्रस्त हो गया। इसके बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया। इस दौरान यानी होटल से अस्पताल में ले जाने के दौरन तकरीबन 40 मिनट तक उनके ब्रेन में ब्लड और आक्सीजन की आपूर्ति नहीं हो सकी। इसके चलते स्थिति बिगड़ती चली गई।

10 अगस्त के बाद कभी नहीं आया होश

विशेषज्ञ डाक्टरों के अनुसार, अगर किसी के ब्रेन में 10 से 15 मिनट तक ब्लड और ऑक्सीजन की आपूर्ति रुक जाए तब तो एक बार उसके ब्रेन को कुछ प्रयास करके वापस प्रतिक्रिया में लाया जा सकता है। वहीं, अगर 40 मिनट का समय या 15 मिनट से ज्यादा का समय मरीज को चुनौतीपूर्ण स्थिति में पहुंचा देता है। इसके चलते मरीज के ब्रेन के प्रतिक्रिया करने की उम्मीद नहीं के बराबर होती है।

दूसरी बार पड़ा था राजू श्रीवास्तव को दौरा

बताया जा रहा है कि 10 अगस्त के बाद बुधवार (21 सितंबर) को राजू श्रीवास्तव को फिर दिल का दौरा पड़ा। दरअसल, राजू श्रीवास्तव को दूसरी बार अचानक हार्ट अटैक आया था। इस स्थिति में भी बचने के चांस कम ही होते हैं।

क्यों अहम होते हैं हार्ट अटैक के बाद 30 मिनट

हृदय रोग विशेषज्ञों के अनुसार, हार्ट अटैक के 15 मिनट के भीतर अगर मरीज को सही इलाज मिल जाता है तो मरीज की जान बचाई जा सकती है।  हार्ट अटैक होने पर मरीजों की जान बचाने के लिए हर लम्हा अहम होता है। हार्ट अटैक होने के आधे घंटे में अस्पताल पहुंचने वाले मरीज पूरी तरह ठीक हो जाते हैं, ऐसे में हार्ट के बाद 30 मिनट अहम होते हैं।

हार्ट अटैक के बाद तत्काल होती है इलाज की जरूरत

उधर, डॉक्टर राहुल शर्मा (वरिष्ठ चिकित्सक और अतिरिक्त निदेशक, फोर्टिस अस्पताल सेक्टर, 62 नोएडा) ने बताया कि हार्ट अटैक का मरीज बेहद कमजोर हो जाता है। यहां तक कि वह अपने शरीर का बोझ तक उठाने की स्थिति में नहीं होता है। हार्ट अटैक के मरीज को तत्काल उपचार की जरूरत होती है, वरना इसके अभाव में पीड़ित की मौत तक हो सकती है। 

डॉक्टर राहुल के मुताबिक, राजू श्रीवास्तव के साथ भी यही हुआ। उन्हें मेजर हार्ट अटैक आया था। 40 मिनट अस्पताल में लाने में लगे, ऐसे में डॉक्टरों ने पूरा प्रयास किया, लेकिन उन्हें बचाया नहीं जा सका। उनकी हालत जाहिर तौर पर गंभीर थी और उन्होंने दुनिया को अलविंद कह दिया।

एक घंटे में मिले इलाज तो भी ठीक हो जाता है मरीज

डॉक्टरों के मुताबिक, हार्ट अटैक के एक घंटे में इलाज मिलने पर भी हृदय 80 प्रतिशत तक ठीक हो जाता है। हार्ट अटैक के बाद बेहद जरूरी है कि मरीज को 30 मिनट के भीतर इलाज मिल जाए।

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Edited By: Jp Yadav

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