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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jan 19, 2023 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

Delhi Politics: दिल्ली में 'अधिकारों की जंग', अपनी मांगों को लेकर धरने पर बैठे AAP विधायक

By Jagran NewsEdited By: Abhishek Tiwari
Published: Thu, 19 Jan 2023 11:36 AM (IST)

Delhi Politics दिल्ली में अधिकारों को लेकर अरविंद केजरीवाल सरकार और उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना के बीच खींचतान का सिलसिला ...और पढ़ें

विधानसभा शीतकालीन सत्र के दौरान अपनी मांगों को लेकर एलजी के खिलाफ धरने पर बैठे आप विधायक।
विधानसभा शीतकालीन सत्र के दौरान अपनी मांगों को लेकर एलजी के खिलाफ धरने पर बैठे आप विधायक।

नई दिल्ली, जागरण संवाददाता। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में अधिकारों को लेकर अरविंद केजरीवाल सरकार और उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना के बीच आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला जारी है। ताजा मामले में गुरुवार सुबह आम आदमी पार्टी के विधायकों ने अपनी मांगों को लेकर दिल्ली के उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।

अपनी मांगों को लेकर आम आदमी पार्टी (आप) के राष्ट्रीय प्रवक्ता सौरभ भारद्वाज सहित आप के कई विधायक एलजी के खिलाफ विधानसभा के बाहर गांधी प्रतिमा के पास धरने पर बैठे गए हैं। हंगामे के चलते सदन आज करीब आधा घंटे देरी से शुरू हुआ। सदन शुरू होते ही सत्तापक्ष के विधायक- 'एलजी साहब होश में आओ' के नारे लगाने लगे। इसके बाद सदन की कार्रवाही 15 मिनट के लिए स्थगित कर दी गई।

केजरीवाल से चल रही खींचतान के बीच एलजी के बढ़ाए अधिकार

अधिकारों को लेकर मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और उपराज्यपाल (एलजी) के बीच चल रही खींचतान के बीच राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने एलजी वीके सक्सेना के अधिकार और बढ़ा दिए हैं। उन्हें दो नए अधिकार दिए गए हैं। इसके तहत उपराज्यपाल औद्योगिक संबंध संहिता 2022 और व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य एव कार्य स्थिति संहिता के तहत नियम बना सकते हैं।

गृह मंत्रालय द्वारा इस संबंध में दो अलग-अलग अधिसूचनाएं 16 जनवरी को जारी की गई हैं। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के अलावा पांच अन्य केंद्र शासित प्रदेशों के उपराज्यपालों/प्रशासकों को भी अगले आदेश तक ये शक्तियां प्रदान की गई हैं। इनमें अंडमान और निकोबार द्वीप समूह, दादरा और नगर हवेली, दमन और दीव, चंडीगढ़, पुडुचेरी और लक्षद्वीप भी शामिल हैं।

राजधानी को अराजकता के हवाले नहीं किया जा सकता : केंद्र

इससे पहले बुधवार को सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रीय राजधानी में सेवाओं के नियंत्रण को लेकर केंद्र और दिल्ली सरकार के बीच रस्साकसी पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया। हालांकि, केंद्र सरकार ने पांच जजों की संविधान पीठ से सेवाओं पर नियंत्रण के मामले को और बड़ी बेंच को देने की अपील की है। सरकार ने यह मांग जीएनसीटीडी बनाम भारत सरकार के 2018 के फैसले को संज्ञान में लेते हुए की है।

केंद्र सरकार की ओर से पेश सालीसिटर जनरल तुषार मेहता ने प्रधान न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पांच न्यायाधीशों की संविधान पीठ के समक्ष संदर्भ के लिए अपना आवेदन किया। इसके जवाब में प्रधान न्यायाधीश ने कहा कि वह संदर्भ (रिफरेंस) पर जिरह नहीं सुनते। इस पर पहले बहस नहीं हुई और अब हम रिज्वाइंडर में हैं।

इस पर मेहता ने आग्रह किया कि रिफरेंस की जरूरत है। वह नहीं चाहते कि इतिहास राजधानी को पूरी तरह से अराजकता के हवाले करने के रूप में याद किया जाए। इसके जवाब में संविधान पीठ में शामिल जस्टिस एमआर शाह, कृष्णा मुरारी, हिमा कोहली और पीएस नरसिम्हा ने कहा कि बड़ी पीठ में संदर्भ पर बहस का मतलब है कि सब फिर से शुरू करना, जबकि इस मामले में सुनवाई खत्म होने को है।

दिल्ली सरकार की ओर से पेश अधिवक्ता एएम मनु सिंघवी ने मेहता के प्रस्ताव का कड़ा विरोध किया। दरअसल, संविधान पीठ ने फैसला सुरक्षित रखने से पहले लगभग साढ़े चार दिनों तक क्रमशः केंद्र और दिल्ली सरकार का प्रतिनिधित्व कर रहे सालीसिटर जनरल तुषार मेहता व वरिष्ठ अधिवक्ता एएम सिंघवी की दलीलें सुनीं।

इससे पहले, दिल्ली में सेवाओं के नियंत्रण पर केंद्र और दिल्ली सरकार की विधायी और कार्यकारी शक्तियों के दायरे से संबंधित कानूनी मुद्दे की सुनवाई के लिए संविधान पीठ का गठन किया गया था। शीर्ष अदालत ने छह मई को दिल्ली में सेवाओं के नियंत्रण के मुद्दे को पांच न्यायाधीशों की संविधान पीठ के पास भेजा था।