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24 साल तक पुलिस को चकमा देकर दर्जी बना रहा कातिल, ब्लाइंड मर्डर केस का आरोपी अब गुरुग्राम से गिरफ्तार

Published: Mon, 28 Sep 2026 10:29 AM (IST)

दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने 24 साल पुराने ब्लाइंड मर्डर केस में फरार आरोपी फिरोज उर्फ ख्वाजा को गुरुग्राम ...और पढ़ें

24 साल बाद आरोपी गिरफ्तार। जागरण

24 साल बाद आरोपी गिरफ्तार। जागरण

HighLights

  1. 24 साल पुराने ब्लाइंड मर्डर केस में आरोपी गिरफ्तार।

  2. फरार आरोपी फिरोज गुरुग्राम के मानेसर से पकड़ा गया।

  3. पुरानी रंजिश और बदले की भावना से की गई थी हत्या।

जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने 24 साल पुराने एक ब्लाइंड मर्डर केस में फरार आरोपी फिरोज उर्फ ख्वाजा को गुरुग्राम से गिरफ्तार कर लिया है।

वह यहां आईएमटी मानेसर स्थित एक रेडीमेड गारमेंट फैक्ट्री में दर्जी का काम कर रहा था। पुरानी रंजिश और बदले की आग में हत्या की वारदात को अंजाम दिया गया था।

डीसीपी हर्ष इंदौरा ने बताया कि आरोपी फिरोज, बिहार के पश्चिमी चंपारण का रहने वाला है। तुगलकाबाद किला के पास डीडीए के जंगल से 18 फरवरी 2002 को 35 वर्षीय एक व्यक्ति का सड़ा-गला शव बरामद हुआ था।

ओखला औद्योगिक क्षेत्र थाने में एफआईआर दर्ज की गई थी। मरने वाले की शिनाख्त कलाम अंसारी (पश्चिमी चंपारण, बिहार) के रूप में हुई थी। वह 2001 में फिरोज के साथ ही रोजगार की तलाश में दिल्ली आया था।

कलाम के गांव में हुई थी साहबजान की शादी

जानकारी के अनुसार, कुछ समय बाद दोनों के बीच झगड़ा हो गया था, उनके बीच रंजिश चली आ रही थी। फिरोज के भाई साहबजान की शादी कलाम के गांव में हुई थी। साहबजान की पत्नी उसके साथ रहने से इनकार कर रही थी। इसी विवाद के चलते साहबजान ने कलाम अंसारी के घर के सामने आत्महत्या कर ली थी।

फिरोज को शक था कि उसके भाई की मौत के लिए कलाम अंसारी का परिवार जिम्मेदार है। इसी बात का बदला लेने के लिए फिरोज ने कलाम को रास्ते से हटाने की ठान ली थी।

कलाम के बारे में दीं झूठी जानकारियां

वहीं, 15 फरवरी 2002 को फिरोज, कलाम अंसारी को बहलाकर तुगलकाबाद के जंगलों में ले गया, जहां उसने पत्थरों से सिर कुचलकर उसकी बेरहमी से हत्या कर दी। इसके बाद आरोपी वापस बिहार भाग गया और परिजनों को कलाम के बारे में झूठी जानकारियां दीं।

वहीं, जब हत्या का मामला खुला, तो वह हमेशा के लिए फरार हो गया। लंबे समय से उसके नहीं पकड़े जाने पर केस क्राइम ब्रांच में ट्रांसफर कर दिया गया।

इसके बाद एसीपी सतेंद्र मोहन व इंस्पेक्टर विनय कुमार के नेतृत्व में पुलिस टीम ने दो महीनों तक बिहार में करीब 30 जगहों पर छापामारी की। पुराने रिकॉर्ड्स खंगालने, तकनीकी सर्विलांस व फील्ड वर्क के जरिए पुलिस ने आरोपी के छिपने के रास्तों का पता लगाया। आखिरकार पुख्ता सूचना पर उसे गुरुग्राम से पकड़ लिया गया।

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