नई दिल्ली [विनीत त्रिपाठी]। देश की राजधानी दिल्ली में बनी सैकड़ों अनियिमत कालोनियों में लाखों की संख्या में लोग रहते हैं। इन कालोनियों में रहने वाली एक बड़ी आबादी राजनीतिक दलों के लिए वोट बैंक है। यही वजह है कि अनियिमत कालोनियां बसती रहीं और दिल्ली का स्वरूप बिगड़ता रहा है। उधर, अनधिकृत कालोनियों को नियमित करने की मांग वाली याचिका पर सोमवार को हुई सुनवाई के दौरान दिल्ली हाई कोर्ट ने पूछा कि क्या संपत्ति के संपन्न मालिक अनपढ़, गरीब या दलित वर्ग से हैं। इन लोगों ने सैनिक फार्म, महेंद्रू एन्क्लेव और अनंत राम डेयरी जैसी अनधिकृत कालोनियों को नियमित करने की मांग की है। दिल्ली हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश डीएन पटेल व न्यायमूर्ति ज्योति सिंह की पीठ ने याचिका को समृद्ध अनधिकृत कालोनियों के निवासियों के इशारे से प्रेरित मुकदमा करार दिया।

अदालत ने सोमवार को सुनवाई के दौरान अनधिकृत कालोनियों को कानूनी या नियमित कालोनियों में बदलने की मांग वाली याचिका को खारिज करते हुए कहा कि छूटी हुईं अनधिकृत कालोनियों के निवासी जब भी अदालत का दरवाजा खटखटाएंगे तो नियम और कानून के अनुसार निर्णय लिया जाएगा।

उधर, याचिका पर सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की तरफ से पक्ष रखते हुए अतिरिक्त सालिसिटर जनरल (एएसजी) ऐश्वर्या भाटी ने कहा कि अनधिकृत समृद्ध कालोनियों में रहने वाले लोग इनमें रहने वाले निम्न आय वर्ग के लोगों के साथ समानता की दलील नहीं दे सकते हैं।

दिल्ली हाई कोर्ट में दायर याचिका में यह भी कहा गया कि दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) को 1731 के बजाय सभी 1797 अनधिकृत कालोनियों के नियमितीकरण के लिए पंजीकरण स्वीकार करने का निर्देश दिया जाए।

Edited By: Jp Yadav