नई दिल्ली [रणविजय सिंह]। दिल्ली मेट्रो रेल निगम (Delhi Metro Rail Corporation) ने मेट्रो ट्रैक की एक दशक पुरानी प्वाइंट मशीनों के मरम्मत कार्य के लिए अत्याधुनिक तकनीक का सहारा लिया है। इसके तहत पहली बार जर्मनी से किराये पर एक खास तरह की कंटेनर लैब मंगाई गई है, जिसे यमुना बैंक डिपो में छह माह के लिए स्थापित किया गया है। इसके माध्यम से ब्लू लाइन (द्वारका सेक्टर -21 से नोएडा इलेक्ट्रानिक सिटी/वैशाली) व एयरपोर्ट एक्सप्रेस लाइन के प्वाइंट मशीनों का नवीनीकरण किया जाएगा। इसके बाद ये मशीनें बिल्कुल नई मशीन की तरह काम करने लगेंगी। इससे इन दोनों लाइनों पर प्वांइट मशीनों में खराबी के कारण मेट्रो के सिग्नल में परेशानी नहीं आएगी और मेट्रो का परिचालन सुचारू रूप से हो सकेगा।

डीएमआरसी का कहना है कि प्वाइंट मशीनें इलेक्ट्रोमैकेनिकल उपकरण हैं, जो ट्रेनों को पटरी बदलने (एक ट्रैक से दूसरे ट्रैक पर जाना) में मदद करती हैं। इसलिए यह सिग्नल सिस्टम का अहम हिस्सा होती है। कंटेनर लैब को आसानी से एक जगह से दूसरी जगह ले जाया जा सकता है। यह कंटेनर लैब दो हिस्से हैं में विभाजित है। इसके पहले हिस्से में आवश्यक मशीनें, उपकरण और दस्तावेज होते हैं और दूसरे हिस्से में एक प्वाइंट मशीन टेस्ट बेंच होता है जो बिजली आपूर्ति में मदद करती है। इसके अलावा लिनियर ड्राइव, डिजिटल मीटर व मोटर परीक्षण उपकरण होता है। इससे एक दिन में तीन प्वाइंट मशीनों को मरम्मत की जा सकती है।

डीएमआरसी ने ब्लू लाइन व एयरपोर्ट एक्सप्रेस लाइन पर 260 प्वाइंट मशीनों की पहचान की है, जो लगभग 10 साल पुरानी हो चुकीं हैं या इन मशीनों की मदद से 10 लाख बार मेट्रो ट्रेनें पटरी बदल चुकी हैं। इस वजह से इन मशीनों का यमुना बैंक में स्थापित कंटेनर लैब में नवीनीकरण किया जाएगा। प्वाइंट मशीनों के नवीनीकरण में बहुत प्रभावी तकनीक है, जिसकी मदद से नई मशीनों खरीदने की तुलना में 80 फीसद खर्च बच सकेगा। मरम्मत कार्य के बाद प्वाइंट मशीनें अगले 10 साल तक ठीक से काम कर सकेंगी।

डीएमआरसी का कहना है कि चरणबद्ध तरीके से वर्ष 2022 तक इन प्वाइंट मशीनों का मरम्मत कार्य किया जाएगा। इसके लिए देर रात मेट्रो का परिचालन खत्म होने के बाद मेट्रो ट्रैक से प्वाइंट मशीनें निकालकर यमुना बैंक स्थित कंटेनर लैब में लाई जाएंगी। जहां सबसे पहले प्वाइंट मशीनों की जांच की जाएगी। इसके बाद जांच में पाई गई खामियों को ठीक किया जाएगा। इसके बाद उसका परीक्षण किया जाएगा। परीक्षण में सफल होने के बाद परिचालन में इस्तेमाल के लिए प्रमाण पत्र भी जारी किया जाएगा। फिलहाल प्वाइंट मशीनों के नवीनीकरण का कार्य जर्मनी से आए विशेषज्ञ करेंगे। यह कार्य पूरा होने के बाद कंटेनर लैब वापस जर्मनी भेज दी जाएगी। जर्मनी के विशेषज्ञ डीएमआरसी के इंजीनियरों को प्रशिक्षण भी देंगे। ताकि भविष्य में डीएमआरसी के विशेषज्ञ खुद ऐसी तकनीक विकसित कर प्वाइंट मशीनों को दोबारा नया बना सकें।

Edited By: Jp Yadav