नई दिल्‍ली, जेएनएन। Spinal Disease डिस्क का प्रमुख कार्य कमर या रीढ़ पर पड़ने वाले भार को संभालना है। रीढ़ में लचीलेपन और गतिशीलता की स्थितियां इंटर वर्टिब्रल डिस्क पर निर्भर हैं। इसीलिए इसमें पड़ने वाले लगातार दबाव के कारण इसके कमजोर होने की प्रक्रिया कहीं ज्यादा तेजी से होती है। शरीर के अन्य जोड़ों की तुलना में इंटर वर्टिब्रल डिस्क 15 से 20 साल पहले ही क्षतिग्रस्त हो सकती है। जानें क्‍या कहते है दिल्ली के मशहूर स्पाइन सर्जन डॉ. सुदीप जैन

लक्षण

  • लिखने और वजन उठाने में परेशानी होना
  • कमर में दर्द होना और इसमें कड़ापन महसूस होना
  • हाथों और पैरों में सुन्नता के साथ भारीपन महसूस होना
  • बांहों में कमजोरी व वस्तुओं को पकड़ने में दिक्कत महसूस करना
  • रोग की गंभीर स्थिति के कुछ मामलों में बांहों और पैरों में लकवा जैसी स्थिति बनना
  • कुछ लोगों में यह दर्द बांहों के निचले भाग से पैरों के निचले भाग तक होता है, जिसे सियाटिका के दर्द का एक प्रकार कह सकते हैं

रोग का कारण: आफिस में डेस्क पर या कंप्यूटर के सामने बैठकर देर तक काम करना और भारी वजन उठाना भी इसका एक प्रमुख कारण है। इसके अलावा व्यायाम का अभाव, अत्याधिक अल्कोहल का सेवन और अस्वास्थ्यकर जीवनशैली डिस्क की समस्या बढ़ने के कुछ प्रमुख कारण हैं।

आर्टीफिशियल डिस्क की खूबियां: आर्टीफिशियल डिस्क के लग जाने के बाद डीजनरेटिव डिस्क डिजीज से पीड़ित व्यक्ति आगे-पीछे झुक सकता है और रीढ़ की हड्डी का लचीलापन व गतिशीलता रोग होने से पहले की तरह बढ़ जाती है। इससे रीढ़ की हड्डी पर पड़ने वाले झटकों को बर्दाशत करने की क्षमता बढ़ जाती है। आर्टीफिशियल डिस्क जीवनभर काम करती है। 

आधुनिक इलाज: अभी तक फ्यूजन सर्जरी का सहारा लिया जा रहा है। इस सर्जरी से मरीज को आराम तो मिलता है, लेकिन यह समस्या का स्थाई और कारगर समाधान नहीं है। आधुनिक इलाज आर्टीफिशियल डिस्क रिप्लेसमेंट या डिस्क रिप्लेसमेंट आर्थोप्लास्टी है।

Edited By: Sanjay Pokhriyal