नई दिल्ली [रणविजय सिंह]। कोरोना वायरस के संक्रमण के चलते पिछले तकरीबन डेढ़ साल के दौरान हेपेटाइटिस बी व हेपेटाइटिस सी जैसी घातक बीमारी को खत्म करने का अभियान प्रभावित हुआ है। इस बीच लोगों को इन घातक बीमारी के प्रति जागरूक करने के लिए 28 जुलाई को विश्व हेपेटाइटिस दिवस मनाया जाएगा। डॉक्टर का साफतौर पर कहना है कि हेपेटाइटिस व लिवर की अन्य बीमारियों से पीड़ित मरीजों के लिए कोरोना ज्यादा घातक है। अध्ययन में भी यह बात साबित हो चुकी है, इसलिए हेपेटाइटिस व लिवर की बीमारियों से पीड़ित मरीजों को जल्द टीका लगवा लेना चाहिए।

एम्स के गैस्ट्रोलाजी विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. शालीमार ने कहा कि कोरोना से संक्रमित लिवर सिरोसिस व हेपेटाइटिस के मरीजों पर अध्ययन किया गया है। जिसमें यह पाया कि लिवर की इन गंभीर बीमारियों से पीड़ित मरीजों को कोरोना का संक्रमण होने पर मृत्यु दर अधिक होती है। लिवर सिरोसिस का एक बड़ा कारण हेपेटाइटिस बी व हेपेटाइटिस सी का संक्रमण है। देश में करीब तीन से चार फीसद लोगों को हेपेटाइटिस बी व करीब एक फीसद लोगों को हेपेटाइटिस सी है।

हेपेटाइटिस बी का टीकाकरण भी बढ़ाने की दरकार

हेपेटाइटिस बी की रोकथाम के लिए टीका उपलब्ध है। हेपेटाइटिस बी का टीका राष्ट्रीय टीकाकरण अभियान का भी हिस्सा है। पांचवें परिवार स्वास्थ्य सर्वे की रिपोर्ट के अनुसार देश में करीब 85 फीसद बच्चों को यह टीका लग पाता है। करीब 15 फीसद बच्चे हेपेटाइटिस बी के टीकाकरण से महरूम रह जाते हैं।

Edited By: Jp Yadav