नई दिल्ली [संजीव गुप्ता]। दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) बोर्ड की बैठक मंगलवार को उपराज्यपाल अनिल बैजल की अध्यक्षता में हुई। इसमें अफोर्डेबल रेंटल हाउसिंग कांप्लेक्स (एआरएचसी) योजना को मंजूरी देने के साथ ही कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। इस योजना से प्रवासी कामगारों और गरीबों को कम किराये पर घर मिल सकेगा। यह आवास सरकारी जमीन के अलावा निजी जमीन पर भी बनाए जा सकेंगे। इसके लिए डेवलपर को केंद्र सरकार द्वारा बनाए गए नियमों का पालन करना होगा। हालांकि, अभी इस योजना को अधिसूचित करने के लिए केंद्रीय आवास एवं शहरी विकास मंत्रलय को भेजा जाएगा।

डीडीए के मुताबिक हाउसिंग कांप्लेक्स में सिंगल बेडरूम या डबल बेडरूम और चार या छह बेड की डोरमेट्री शामिल होगी। इस जगह पर 10 फीसद एफएआर (फ्लोर एरिया रेशियो) में व्यावसायिक गतिविधि चलाई जा सकेगी, जिसे डेवलपर बेच भी सकेगा। घर किराये पर देने के लिए लाइसेंस डीड बनवानी होगी, जो कम से कम तीन माह व अधिकतम तीन साल की हो सकती है।

डायनेमिक पार्किंग मानकों को मिली मंजूरी

बोर्ड बैठक में डायनेमिक पार्किंग मानकों को भी मंजूरी दी गई। नए नियमों के अनुसार दिल्ली में ग्रुप हाउसिंग योजनाओं में पार्किंग के लिए उस योजना के तहत बनने वाले आवासों की संख्या और क्षेत्रफल के हिसाब से स्थान तय किया जाएगा। दिल्ली में मौजूदा समय में मास्टर प्लान 2021 के मुताबिक पार्किंग के लिए स्थान चिह्न्ति किए जाते हैं। इसके तहत प्लाट के साइज का कुछ फीसद हिस्सा पार्किंग स्थल के रूप में खाली छोड़ा जाता है। नए नियमों के तहत, जितने आवासीय फ्लैट होंगे, उनकी संख्या के बराबर पार्किंग अनिवार्य रूप से बनानी होगी।

इन प्रस्तावों को भी मिली मंजूरी: डीडीए की बैठक में एआरएचसी योजना के तहत फ्लैटों के निर्माण लागत की गणना के लिए प्लिंथ एरिया दरें (पीएआर), व्यावसायिक और औद्योगिक संपत्तियों और बहु-स्तरीय पार्किंग के तहत क्षेत्र के संबंध में रूपांतरण शुल्क और नई दिल्ली रेलवे स्टेशन के निकट सीआरपीएफ के ट्रांजिट कैंप के निर्माण के लिए भू-उपयोग को मनोरंजक से सार्वजनिक और अर्ध सार्वजनिक सुविधाओं में बदलने के प्रस्ताव को भी मंजूरी दे दी गई। इसके अलावा सरकारी अस्पतालों में अब बेसमेंट में पार्किंग नहीं बनाए जाने का निर्णय लिया गया।

धार्मिक स्थलों के लिए प्लॉट आवंटन तय करेगी कमेटी

डीडीए बोर्ड की बैठक में धार्मिक स्थलों के लिए प्लॉट आवंटन को लेकर नई नीति का एजेंडा भी रखा गया। इसके लिए प्लाट का आवंटन अब निलामी के जरिये होगा। हालांकि, इसका फॉर्मूला कमेटी तय करेगी। डीडीए बोर्ड के सदस्यों ने बताया कि इस नीति को लागू करते समय इलाके की डेमोग्राफी (जनसांख्यिकी) का भी ध्यान रखा जाएगा। मसलन, जिस इलाके में किसी धर्म विशेष की अधिक आबादी हो, वहां दूसरे धर्म के लोगों को धार्मिक स्थल बनाने की इजाजत दी जाए या नहीं, यह बात कमेटी तय करेगी। कमेटी के सदस्य विजेंद्र गुप्ता ने बताया कि धार्मिक स्थलों के प्लाट का मामला संवेदनशील होता है। नई नीति में कहा गया है कि देशभर से कोई भी व्यक्ति या संस्था इसके लिए दिल्ली में आवेदन कर सकती है।

Edited By: Jp Yadav