नई दिल्ली [धनंजय मिश्रा]। गाजियाबाद स्थित डासना देवी मंदिर के महंत यति नरसिंहानंद सरस्वती की हत्या के लिए सुपारी देने का मामला सामने आया है। हत्या की सुपारी पाकिस्तानी आतंकी संगठन जैश-ए-मुहम्मद ने जम्मू-कश्मीर के पुलवामा निवासी जान मुहम्मद डार उर्फ जहांगीर को दी थी। दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने डार को पहाड़गंज के एक होटल से गिरफ्तार कर लिया है। वह साधु का वेश बनाकर नरसिंहानंद की हत्या को अंजाम देने वाला था। स्पेशल सेल ने उसके पास से दो पिस्टल, कलावा, चंदन और भगवा रंग के कपड़े बरामद किए हैं। एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि आरोपित 2016 में कश्मीर में आतंकी वुरहान वानी के एनकाउंटर के बाद सेना पर पथराव के मामले में भी गिरफ्तार हो चुका है।

पुलवामा में जैश के आतंकी से मिला था आरोपित

सूत्रों से मिली के अनुसार आरोपित डार की दिसंबर 2020 में पुलवामा में जैश के आतंकी आबिद से पहली मुलाकात हुई थी। आबिद ने डार को अपने साथ आने और काम करने के लिए कहा। आबिद ने इस वर्ष अप्रैल के आखिर हफ्ते में उसको अनंतनाग इलाके में बुलाया और कहा कि वह दिल्ली जाकर महंत यति नर¨सहानंद की हत्या कर दे। आबिद ने उसको नरसिंहानंद का वीडियो भी दिखाया। हत्याकांड को अंजाम देने के लिए जैश के पाकिस्तानी आतंकी ने उसको पिस्टल चलाने की ट्रेनिंग भी दी थी। 23 अप्रैल को डार दिल्ली के लिए निकला। इस दौरान वह दिल्ली में मौजूद उमर नाम के शख्स से टेलीग्राम के जरिये संपर्क में था। उमर उसके रहने और नर¨सहानंद सरस्वती की हत्या के लिए रेकी करने का इंतजाम कर रहा था। दिल्ली निकलने से पहले डार के जम्मू- कश्मीर के बैंक अकाउंट में 35 हजार रुपये भेजे गए थे। इसके अलावा उसे कुछ नकदी भी दी गई थी।

कमलेश तिवारी की तरह की जानी थी हत्या

दिल्ली में उमर ने ही जान मुहम्मद डार को भगवा कपड़ा और पूजा का सामान खरीद कर दिया था, ताकि वह आसानी से साधु के पहनावे में नर¨सहानंद तक पहुंच सके। ठीक इसी तरह लखनऊ में वर्ष 2019 में हिंदू संगठन के नेता कमलेश तिवारी की हत्या गुजरात से आए बदमाशों ने भगवा कपड़ा पहनकर कर दी थी।

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