नई दिल्ली [रीतिका मिश्रा]। दिल्लीवासियों को अब निजी स्कूलों के मुकाबले सरकारी स्कूल भा रहे हैं। इन स्कूलों में मिलने वाली बेहतर शिक्षा के चलते 52 फीसद से ज्यादा छात्र दिल्ली के सरकारी स्कूलों में पढ़ रहे हैं। ये संख्या निजी स्कूलों के मुकाबले दोगुनी है।दिल्ली सरकार ने लगातार राजधानी में बने सरकारी स्कूलों की शिक्षा पद्धति में सुधार किया, जिसका नतीजा यह है कि अब अभिभावक निजी स्कूलों की बजाय सरकारी स्कूलों में बच्चों को पढ़ाने में रूचि दिखा रहे हैं। दिल्ली सरकार ने साल 2018-19 के बीच लगभग 1.02 करोड़ लोगों पर सामाजिक- आर्थिक सर्वेक्षण किया था।

सर्वेक्षण के अनुसार राजधानी में छह से 17 साल की उम्र के 90 फीसद से ज्यादा छात्र किसी न किसी शैक्षणिक संस्थानों से शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं । इसमे 52.54 छात्र दिल्ली के सरकारी स्कूलों में पढ़ रहे हैं। वहीं, निजी स्कूलों मे 26.31 फीसद और सहायता प्राप्त स्कूलों में 4.08 छात्र ही दाखिल हैं। दिल्ली सरकार ने ये सर्वेक्षण नवंबर 2018 से नवंबर 2019 के बीच आयोजित किया था। उल्लेखनीय है कि दिल्ली मेें फिलहाल 1030 सरकारी स्कूल हैं।

92 फीसद से ज्यादा लड़कियां स्कूलों में हैं दाखिल

दिल्ली में 11 से 14 साल की उम्र की 92.47 फीसद छात्राएं ऐसी हैं जो स्कूलों में दाखिल हैं और नियमित तौर पर शिक्षा भी प्राप्त कर रही हैं। वहीं, अगर यहीं आंकड़े जिलेवार देखे जाएं तो इसमें दक्षिणी दिल्ली में 93.35 फीसद छात्राएं शिक्षा प्राप्त कर रही हैं।

56 फीसद छात्र आंगनवाड़ी केंद्रों में दाखिल

सरकार द्वारा किए गए सर्वेक्षण के मुताबिक की कुल जनसंख्या में लगभग 11 फीसद जनसंख्या छह साल तक की उम्र के पायदान में आती है। इस जनसंख्या में छह साल तक की उम्र के लगभग 56 फीसद छात्र दिल्ली के आंगनवाड़ी केंद्रों में दाखिल हैं। वहीं, बीच में ही स्कूल छोड़ कर आंगनवाड़ी केंद्रों में दाखिला लेने वाली किशोरी लड़कियों की संख्या लगभग सात फीसद है। इसमें सबसे ज्यादा आंगनवाड़ी केंद्रों में मध्य दिल्ली की छात्राएं शामिल है।

10 फीसद छात्र स्कूलों से वंचित

राजधानी में कुल जनसंख्या में लगभग 23 फीसद जनसंख्या छह से 17 साल की उम्र के बीच है। इसमें 10 फीसद छात्र यानी 2,21,694 छात्र ऐसे हैं जो किसी भी स्कूल में दाखिल नहीं है। सरकार द्वारा किए गए सर्वेक्षण में यह बात सामने आई कि छह से 17 साल की आयु के बच्चों में 9.76 फीसद बच्चों ने या तो पढ़ाई छोड़ दी या फिर वह स्कूल ही नहीं गए। इसमें स्कूल छोड़ चुके छात्रों में 16-17 साल की उम्र के छात्रों की संख्या ज्यादा है। इसमें मुख्य तौर पर वो छात्र ज्यादा है जो किसी वित्तीय समस्याओं से जूझ रहे हैं, जिस कारण उन्हें स्कूल बीच में ही छोड़ना पड़ा।

स्कूल छोड़ चुके छात्रों के प्रमुख कारण

कारण                                                                                    फीसद

आर्थिक गतिविधियों में व्यस्तता                                                    9.37

वांछित स्तर हासिल कर चुके                                                      12.17

घरेलू कार्यों में व्यस्तता                                                                13.50

वित्तिय समस्या                                                                          29.17

अन्य                                                                                         35.79

नोट- अन्य कारणों में प्रमुखता विकलांगता, मानसिक बिमारी, पढ़ाई में दिलचस्पी नहीं और दाखिला नहीं मिलना हैं।

सात साल से ऊपर के छात्रों की साक्षरता दर

क्षेत्र                                                            साक्षरता दर (फीसद)

पूर्वी            -                                                 88.44

उत्तरी        -                                                  87.69

दक्षिणी       -                                                89.59

तीनो नगर निगम   -                                         88.53

दिल्ली कैंट      -                                               94.55

नई दिल्ली नगर पालिका परिषद -                       93.27   

कुल-                                                              88.54   

विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों में दाखिल छात्र ( 6-17 साल)

संस्थान                                                          छात्र (फीसद)

केंद्रीय विद्यालय                                                 2.29

सरकारी                                                         52.54

सरकारी सहायता प्राप्त                                      4.08

निजी                                                              26.31

एमसीडी                                                          12.82

एनडीएमसी                                                      0.99

विशेष स्कूल या दिव्यांग छात्रों के लिए स्कूल            0.11

अन्य                                                                  0.87

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