-निजी वाहनों का इस्तेमाल सीमित करने के उद्देश्य से डीडीए ने बनाई योजना, प्रदूषण घटाने में मिलेगी मदद

-पायलट प्रोजेक्ट में द्वारका सेक्टर-21, रोहिणी सेक्टर-18, मयूर विहार एक्सटेंशन, मुकुंदपुर और सरोजनी नगर-आइएनए मार्केट शामिल

संजीव गुप्ता, नई दिल्ली

दिल्ली की सड़कों पर भीड़भाड़ और यातायात जाम करने के लिए मेट्रो के इंटरचेंज स्टेशनों के पास कॉमर्शियल हब बनाए जाएंगे। यहां मनोरंजन, खानपान और खरीदारी से जुड़ी सभी सुविधाएं उपलब्ध होंगी। लोग मेट्रो से आएं, वहां घूमे-फिरें, खरीदारी करें और मेट्रो से ही लौट जाएं। सड़क पर उतरने या निजी वाहन निकालने की जरूरत ही नहीं। दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) की इस योजना का सारा खाका तैयार हो चुका है। जनता के सुझाव एवं आपत्तियां भी ले ली गई हैं। उपराज्यपाल की स्वीकृति के साथ जल्द ही इसका क्रियान्वयन शुरू हो जाएगा।

यह है योजना

डीडीए ने नेशनल इंस्टीयूट ऑफ अर्बन अफेयर्स (एनआइयूए) के साथ मिलकर ट्रांजिट ओरियेंटेड डेवलपमेंट (टीओडी) के आधार पर इस अति महत्वाकांक्षी योजना का खाका तैयार किया है। इसके तहत दिल्ली मेट्रो के सभी प्रमुख इंटरचेंज स्टेशनों, अंतरराज्जीय बस अड्डों और रेलवे स्टेशनों के पास कॉमर्शियल हब बनाना प्रस्तावित है। सभी हब इन जगहों से पांच सौ मीटर के दायरे में बनाए जाएंगे। इनका क्षेत्र तीन हजार वर्ग मीटर से एक हेक्टेयर तक रहेगा। हब के साथ कम से कम 18 मीटर चौड़ी सड़क भी जरूरी है ताकि ट्रैफिक चलता रहे। इस बहुमंजिला कॉमर्शियल हब में घरेलू जरूरतों से जुड़ा हर सामान खरीदने की व्यवस्था होगी। मनोरंजन के लिए सिनेमा और बच्चों के लिए झूले वगैरह भी रहेंगे। निजी वाहनों के प्रयोग को हतोत्साहित करेगी यह योजना

इन कॉमर्शियल हबों में पार्किग छोटी रखी जाएगी जबकि पार्किग शुल्क काफी ज्यादा रहेगा। दूसरी तरफ मेट्रो से आने वाले यात्रियों को स्टेशन से बाहर निकलने की भी जरूरत नहीं पड़ेगी। उनके लिए इस हब तक पहुंचने के लिए या तो स्काईवॉक बनाए जाएंगे या फिर स्टेशन से हब तक जाने को अंदर ही अंदर एक अलग वातानुकूलित रास्ता बनाया जाएगा। पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर चुने गए पांच मेट्रो स्टेशन

इस योजना के पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर डीडीए ने फिलहाल द्वारका सेक्टर-21, रोहिणी सेक्टर-18, मयूर विहार एक्सटेंशन, मुकुंदपुर और सरोजनी नगर-आइएनए मार्केट मेट्रो स्टेशन का चयन किया है। इसके बाद रैपिड रेल ट्रांजिट कॉरिडोर के प्रमुख जंक्शन, आइएसबीटी और रेलवे स्टेशनों के नजदीक भी ऐसे हब बनाए जाएंगे। डीडीए और यूटीपैक के निर्देशन में तैयार होंगे यह हब

सभी हब डीडीए और यूटीपैक के निर्देशन में बिल्डरों द्वारा तैयार किए जाएंगे। अगर हब बनाने के लिए किसी एक बिल्डर के पास पर्याप्त जगह नहीं है तो कुछ बिल्डर मिलकर कुछ प्लॉटों को आपस में जोड़कर भी कॉमर्शियल हब बना सकते हैं। वैसे यहां डीडीए ने यह छूट भी रखी है कि जमीन पर जिसका मालिकाना हक हो, वह स्वयं भी हब बना सकता है। सरकारी जमीन होगी तो सरकारी विभाग भी बना सकेंगे। हब का पूरा प्रस्ताव और नक्शा तैयार हो जाने पर उसे अनापत्ति प्रमाण पत्र डीडीए द्वारा गठित उस विशेष कमेटी से मिलेगी, जिसमें स्थानीय निकायों के अधिकारी शामिल होंगे। इसके बाद वहां टीओडी नीति के आधार पर सारा काम डीडीए की निगरानी में होगी। घटेगा प्रदूषण और बिजली की मांग

योजना के मुताबिक जब अधिकाधिक लोग मेट्रो से ही आएंगे तो सड़कों पर निजी वाहनों का दबाव कम होगा। इससे प्रदूषण भी घटेगा। चूंकि सभी कॉमर्शियल हब ग्रीन बिल्डिग के तौर पर तैयार किए जाएंगे, इसलिए वहां बिजली की बचत भी सुनिश्चित हो सकेगी।

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योजना का ड्राफ्ट तैयार है। 45 दिनों की समयावधि में जनता की ओर से जो आपत्तियां एवं सुझाव आए हैं, उन्हें समायोजित कर अब फाइनल ड्राफ्ट तैयार हो रहा है। जल्द ही इसे बोर्ड की बैठक में लगा दिया जाएगा।

-तरुण कपूर, उपाध्यक्ष, डीडीए स्वागतयोग्य योजना संपादकीय

Posted By: Jagran

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