नई दिल्ली, जेएनएन। दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण का स्तर खतरनाक से बेहद खराब श्रेणी में चल रहा है। इसी को देखते हुए दिल्ली-एनसीआर में पर्यावरण प्रदूषण नियंत्रण प्राधिकरण (ईपीसीए) की ओर से एक नवंबर से ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (GRAP) लागू कर दिया गया था। इसके तहत एक से 10 नवंबर के बीच दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण फैलाने वाली तमाम गतिविधियां प्रतिबंधित कर दी गईं थीं।

क्या होगा आगे 
ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान के दौरान निर्माण कार्यों पर प्रतिबंध लगाया गया था और नियमों का उल्लंघन करने पर भारी-भरकम जुर्माना लगाने के साथ कानूनी कार्रवाई की बात भी कही गई थी। लेकिन अब बड़ा सवाल ये है कि 10 नवंबर के बाद प्रदूषण की वजह से जहरीली हो चुकी हवा से आम लोगों को कैसे बचाया जाएगा। क्या निर्माणकार्यों पर रोक जारी रहेगी या फिर एक बार फिर सब सामान्य हो जाएगा।  

बड़े प्रोजेक्ट पर पड़ रहा है असर 
एनवायरनमेंट पॉल्यूशन कंट्रोल अथॉरिटी के दिल्ली और उसके आस-पास के इलाकों में निर्माण कार्यों पर रोक लगाने का असर भी दिखाई दिया। कार्रवाई में प्रशासन ने जीडीए की कई साइट्स पर काम रुकवाने के साथ-साथ उस पर जुर्माना भी लगाया। इस वजह से प्राधिकरण के बड़े प्रोजेक्ट बंद कर दिए गए। इसमें राज नगर एक्सटेंशन चौराहा, वसुंधरा फ्लाईओवर, चंद्रशिला अपार्टमेंट, मधुबन बापूधाम, इंदिरापुरम में निर्माण कार्य रुक गया। राज नगर एक्सटेंशन चौराहा और वसुंधरा फ्लाईओवर का निर्माण बंद कर दिया गया। बता दें कि जिलाधिकारी रितु माहेश्वरी ने गाजियाबाद में 27 अक्टूबर से ही निर्माण कार्य रोकने के निर्देश दिए थे।

लोगों से की गई अपील 
वायु प्रदूषण को देखते हुए गुरुग्राम में भी 10 नवंबर तक इमारतों के निर्माण कार्य रोकने के आदेश दिए थे। इतना ही नहीं सभी रिहायशी कॉलोनियों के बिल्डर प्रबंधन को अपने-अपने इलाकों में घरों का निर्माण रोक देने को कहा गया था। केन्द्रीय प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड द्वारा 1 नवंबर से 10 नवंबर तक निर्माण कार्यों पर रोक लगाने से संबंधित दिशा-निर्देश जारी करते हुए कहा गया था कि 1 नवंबर से 10 नवंबर के बीच साइटों पर निर्माण कार्य करते पाए जाने पर नोटिस या सुनवाई का कोई मौका नहीं दिया जाएगा, सीधा चालान होगा। लोगों से अपील भी की गई थी कि प्रदूषण के स्तर को देखते हुए खुद ही निर्माण कार्य बंद रखें।

क्यों बिगड़े हालात 
दिल्ली और एनसीआर के शहरों में प्रदूषण के बने इस हालात के लिए कौन जिम्मेदार है, फिलहाल किसी के पास भी इस सवाल का कोई जवाब नहीं है। दिल्ली-एनसीआर में इससे बचने के लिए 'क्लीन एयर' नाम से एक नए अभियान का एलान जरूर किया गया। इसमें केंद्र और दिल्ली सरकार की संयुक्त भागीदारी रही। एक से पांच नवंबर तक केंद्र और दिल्ली सरकार की 52 टीमें संयुक्त रूप में दिल्ली व एनसीआर की सड़कों पर उतरीं और प्रदूषण फैलाने वालों के खिलाफ कार्रवाई भी की। इस टीम में केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय के अधिकारी भी शामिल रहे।

ये थीं सीपीसीबी की सिफारिशें
दिल्ली एनसीआर में निर्माण और खोदाई संबंधी कार्यों पर एक से दस नवंबर तक रोक लगी रहेगी।
चार से दस नवंबर तक दिल्ली एनसीआर की कोयला एवं बॉयोमास से चलने वाली तमाम औद्योगिक इकाइयों को बंद रखी जाएंगी।
एक से 10 नवंबर तक दिल्ली व उसके सीमावर्ती क्षेत्रों में प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों के खिलाफ सघन अभियान चलाया जाएगा, जिससे जाम न लगे।
ट्रैफिक नियंत्रण पर विशेष ध्यान।
दिल्ली व एनसीआर के निवासियों से अपील कि वे एक से दस नवंबर के बीच कम से कम यात्रा करें।
यात्रा जरूरी हो तो निजी वाहनों से विशेषकर डीजल वाहन के प्रयोग से बचें।
सार्वजनिक वाहन का ही प्रयोग करें।

Posted By: Amit Mishra