नई दिल्ली [जेएनएन]। 21 मार्च को पेश होने वाले दिल्ली के बजट पर एनसीआर परिवहन निगम की भी खास नजर है। निगम को उम्मीद है कि दिल्ली-मेरठ रैपिड रेल कॉरिडोर परियोजना को तो इस बार स्वीकृति एवं बजट मिल ही जाएगा। बजट के बाद ही दिल्ली सरकार के रुख को देखते हुए इस दिशा में परियोजना के आगे की रूपरेखा तैयार की जाएगी। हालांकि पहले साढ़े 16 किमी के निर्माण को लेकर निगम ने टेंडर निकाल दिया है।

केंद्र, यूपी व दिल्ली सरकार साझीदार

विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) के मुताबिक 90 किलोमीटर लंबे और अनुमानत 32 हजार करोड़ की लागत वाले इस कॉरिडोर का निर्माण कार्य जुलाई 2018 में शुरू किया जाना है। तभी यह दो चरणों में अगले साढ़े पांच साल में पूरा हो पाएगा। इस परियोजना में केंद्र सरकार, उत्तर प्रदेश सरकार व दिल्ली सरकार साझीदार हैं।

दिल्ली सरकार परियोजना को लटकाए हुए है

वित्त वर्ष 2018-19 के बजट में केंद्र सरकार ने इसके लिए 659 करोड़ रुपये तो उत्तर प्रदेश सरकार ने 250 करोड़ की राशि का आवंटन कर दिया है। वहीं दिल्ली सरकार इस परियोजना को दिसंबर 2016 से लटकाए हुए है। केंद्रीय आवास एवं शहरी विकास मंत्री भी दिल्ली सरकार के इस रवैये पर नाराजगी जता चुके हैं।

बजट मिलने के बाद बढ़ी गति

निगम के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी सुधीर शर्मा बताते हैं कि प्रमुख निर्माण कंपनियों के साथ कॉरिडोर के निर्माण में साझीदार बनने के लिए बैठक की जा चुकी है। बजट के अभाव में जो कुछ अधर में लटका पड़ा था, केंद्र और उत्तर प्रदेश सरकार से बजट मिलने के बाद गति ले रहा है। कंसलटेंट नियुक्ति और कॉरिडोर के रास्ते में आने वाली तमाम सुविधाएं मसलन, सड़क चौड़ी करने और हाईटेंशन तार बदलने जैसी प्रक्रियाएं भी गति पकड़ रही हैं।

तभी पूरी होगी परियोजना 

अधिकारी बताते हैं कि अगर जुलाई 2018 में काम शुरू होगा, तभी साढ़े पांच वर्ष में परियोजना क्रियान्वित हो पाएगी। पहले चरण के दौरान साढ़े चार साल में दक्षिणी मेरठ से साहिबाबाद तक के कॉरिडोर पर परिचालन शुरू हो जाएगा जबकि अगले एक साल में कॉरिडोर पूरी तरह से बनकर तैयार हो जाएगा। 

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By Amit Mishra