जागरण संवाददाता, बाहरी दिल्ली: दिल्ली की सीमा से सटे हरियाणा में स्थापित फैक्ट्री-कारखाने राजधानी की हवा को प्रदूषित कर रहे हैं। औचंदी बार्डर के समीप स्थापित इन कारखानों से निकलने वाला धुआं हवा के रुख के साथ दिल्ली देहात के कई इलाकों में अंदर तक मार कर रहा है। इन कारखानों में इस्तेमाल होने वाला केमिकल भी नालियों के रास्ते दिल्ली के नालों में होते हुए यमुना में पहुंच रहा है।

औचंदी बार्डर से दिल्ली में प्रवेश करने के करीब एक किलोमीटर के पश्चात सड़क के एक तरफ दिल्ली की जमीन है, जिस पर आज भी खेती होती है तो दूसरी तरफ हरियाणा सरकार की जमीन है, जिस पर बड़ी संख्या में कारखाने लगे हुए हैं। दिल्ली की सीमा में मुंगेशपुर गांव के समीप लगभग पचास एकड़ से भी ज्यादा जमीन पर इस प्रकार के कई कारखाने हैं, जिस प्रकार के कारखानों को सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली की हवा और पानी के लिए घातक माना है। ऐसे में उन्हें रिहायशी इलाकों से बाहर करने के निर्देश दिए थे। इसके पश्चात ही बड़े पैमाने पर रिहायशी इलाकों में ऐसे कारखानों को सील करने को लेकर अभियान भी चला था। अदालत के दबाव के चलते ही बवाना, नरेला एवं भोरगढ़ आदि औद्योगिक क्षेत्रों को विकसित किया गया, जहां रिहायशी इलाकों से हटाए गए कारखाने स्थापित किए गए, मगर औचंदी बार्डर से दिल्ली की सीमा में भी पहले से कुछ कारखाने चल रहे थे और बाद में भी कुछ कारखाने यहां शुरू हुए, जो रिहायशी क्षेत्रों के ही इर्द गिर्द चल रहे हैं।

स्थानीय निवासी विजेन्द्र वत्स कहते हैं कि प्रदूषण फैलाने वाले कारखानों के खिलाफ कार्रवाई का अधिकार हरियाणा सरकार के प्रदूषण विभाग को है, ऐसे में उनके खिलाफ कार्रवाई नहीं हो पाती है। दूसरा, इन कारखानों से प्रभावित भी हरियाणा के बजाय दिल्ली देहात के गांव हैं। यही वजह है कि हरियाणा के प्रशासन की दिलचस्पी भी इन्हें रोकने में नहीं रहती है। जमीन हरियाणा की है इसलिए दिल्ली सरकार भी सीधे दखल देने के बजाय केवल पत्र लिखने की औपचारिकता ही पूरी करती रही है। यही वजह है कि आज भी हरियाणा की तरफ से आ रहे नाले में पानी कम और केमीकल की मात्रा अधिक होती है, जो हरियाणा के कारखानों से ही बहाया जाता है।

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मामले में हरियाणा सरकार को पत्र लिखा गया है। वहां के पर्यावरण मंत्री से भी बात हुई है। उन्होंने भरोसा दिया है कि संबंधित कारखानों से दिल्ली की वायु प्रदूषित न हो और लोगों के रोजगार भी मिलता रहे, इसको लेकर कोई उचित रास्ता जल्द ही निकाला जाएगा।

= इमरान हुसैन, पर्यावरण मंत्री दिल्ली सरकार।

Posted By: Jagran

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