जागरण संवाददाता, नई दिल्ली : लंबे समय तक पत्नी द्वारा संबंध बनाने से इन्कार करना तलाक का आधार बन सकता है, यह मेंटल क्रूअल्टी (मानसिक क्रूरता) के अंतर्गत आता है। एक तलाक याचिका पर पति को राहत प्रदान करते हुए दिल्ली हाई कोर्ट ने यह टिप्पणी की है। पति की अपील पर निचली अदालत ने 1 अप्रैल 2016 को उसकी तलाक की अर्जी मंजूर की थी। इसके बाद महिला ने इस आदेश को हाई कोर्ट में चुनौती दी। हाई कोर्ट ने महिला की याचिका को रद कर दिया।

अदालत ने कहा कि पत्नी द्वारा पति की मां से दु‌र्व्यवहार करना। उसका पति के ऑफिस में जाकर उसके बॉस से शिकायत करना, जिससे पति को अपनी नौकरी तक छोड़नी पड़ी थी यह सब मेंटल क्रूअल्टी में आता है और तलाक के आधार हैं। न्यायमूर्ति प्रतिभा रानी व प्रदीप नंदराजोग की खंडपीठ ने कहा कि पत्नी द्वारा मानसिक क्रूरता का स्तर इतना बढ़ चुका था कि दंपती का साथ रहना असंभव था।

अदालत ने कहा कि शादी के समय 21 नवंबर 2007 में महिला 35 वर्ष की थी और तलाकशुदा याची 37 साल का। पहले शादी के दो माह तक महिला ने स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए शारीरिक संबंध बनाने से इन्कार किया। इसके बाद जब जनवरी 2008 में वे शिमला हनीमून पर गए तो वहां भी महिला ने उसे छूने पर शोर मचाने व बालकनी से कूदकर खुदकशी करने की धमकी दी। वापस लौटने पर वह अपने घर चली गई थी। महिला ने अपने बचाव में कहा था कि उसके पति को शराब की लत है और वह उस पर शारीरिक, मानसिक रूप से क्रूरता करता है। आरोप था कि उसे दस साल से डिप्रेशन की बीमारी है और उसके लिए दवाइयां लेता है। यही कारण है कि वह ठीक से शारीरिक संबंध भी नहीं बना पाता। पहली पत्नी से हुई बेटी के बारे में भी उसने उसे जानकारी नहीं दी थी।