जागरण संवाददाता, नई दिल्ली : बीआरटी कॉरिडोर तोड़ने में घोटाले के आरोप पर दिल्ली सरकार की भ्रष्टाचार निरोधक शाखा (एसीबी) ने बुधवार दोपहर आइटीओ स्थित लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) व राजपुर रोड स्थित परिवहन विभाग में छापेमारी कर कुछ दस्तावेज जब्त किए। एसीबी के प्रमुख विशेष पुलिस आयुक्त मुकेश कुमार मीणा ने बताया कि 11 जुलाई को भाजपा विधायक ओपी शर्मा व आरटीआइ कार्यकर्ता विवेक गर्ग ने बीआरटी कॉरिडोर तोड़ने के लिए ठेका देने में घोटाले का आरोप लगाते हुए शिकायत दी थी। एसीबी के कुछ अधिकारियों को दोनों विभागों से ठेका से संबंधित दस्तावेज हासिल करने के लिए भेजा गया। वहां से मिले दस्तावेजों की जांच की जा रही है। एसीबी को अगर कुछ और दस्तावेज चाहिए होंगे तो बृहस्पतिवार को अधिकारी दोबारा उन विभागों में जाएंगे। आरोप सही पाए जाने पर एसीबी दिल्ली सरकार के संबंधित अधिकारियों के खिलाफ एफआइआर दर्ज कर कार्रवाई करेगी।

ये है मामला

पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित के समय मूलचंद से लेकर अंबेडकर नगर तक 5.8 किलोमीटर लंबा बीआरटी कॉरिडोर बनाया गया था। अरविंद केजरीवाल की अगुवाई में बनी आम आदमी पार्टी की सरकार ने कहा कि बीआरटी कॉरिडोर अच्छा कासेप्ट तो है, लेकिन सही जगह पर लागू नहीं किया गया। इससे जाम की दिक्कत बढ़ गई है। ऐसे में इसे तोड़ने का फैसला किया गया। 19 जनवरी को इसे तोड़ने का काम शुरू हुआ और 30 जून को इसे पूरी तरह से तोड़ दिया गया। एसीबी को दी गई शिकायत में कहा गया है कि बीआरटी कॉरिडोर तोड़ने पर होने वाले खर्च के संबंध में सूचना के अधिकार (आरटीआइ) के तहत पीडब्ल्यूडी व परिवहन विभाग से जानकारी मांगी गई थी। बीआरटी कॉरिडोर तोड़ने के लिए लोक निर्माण विभाग ने ठेकेदार को 11 करोड़ रुपये का भुगतान किया। कॉरिडोर तोड़ने से निकलने वाला लोहा, स्टील समेत अन्य मलबा भी ठेकेदार को दे दिया गया। विवेक गर्ग का आरोप है कि मलबे की कीमत 4-5 करोड़ रुपये से कम नहीं होगी। इस तरह ठेकेदार को दोहरा लाभ दिया गया है। इसलिए इसकी जांच जरूरी है।