जागरण संवाददाता, नई दिल्ली:

केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) ने एक बार फिर स्पष्ट कर दिया है कि यदि कोई संबद्ध स्कूल मनमाने तरीके से कैपिटेशन फी (प्रति व्यक्ति शुल्क) लेगा तो उसे बख्शा नहीं जाएगा और उससे बढ़ी हुई फीस का 10 गुना वसूला जाएगा। सीबीएसई ने अपने निर्देश में कहा है कि स्कूल बेहतर शिक्षा देने के लिए है न कि व्यापारिक उद्यम है। लेकिन कई सीबीएसई से संबद्ध स्कूलों में नियमों की अवहेलना की बात भी सामने आई है। कई अभिभावकों ने इस बारे में शिकायत की है।

सीबीएसई ने निजी स्कूलों से स्पष्ट कर दिया है कि यदि उनके स्कूलों में फीस बढ़ी तो वह उसका ऑडिट करेगा। शिकायत मिलने पर स्कूल की मान्यता भी रद की जा सकती है। बोर्ड ने अधिक पैसा वसूलने पर उसके दस गुणा जुर्माने की भी बात कही है।

यदि स्कूल छात्र के लिए स्क्रीनिंग (इंटरव्यू) प्रक्रिया अपनाता है तो पहले उल्लंघन करने पर 25 हजार व दूसरी बार उल्लंघन करने पर 50 हजार रुपये का जुर्माना लगेगा।

सीबीएसई के निदेशक की ओर से निर्देश में कहा गया है कि स्कूलों को नियमों के मुताबिक खाता विवरण तैयार करना होगा और बोर्ड के नियमों के मुताबिक उसे हर साल बोर्ड को भेजना होगा। स्कूलों को कहा गया है कि वह उपलब्ध कराई जा रही सुविधा के अनुरूप ही फीस लें। साथ ही स्कूल दाखिले के नाम पर स्कूल किसी तरह की कैपिटेशन फीस व स्वैच्छिक डोनेशन नहीं ले सकते है।