जागरण संवाददाता, नई दिल्ली :

केंद्र सरकार की ओर से 1984 के सिख दंगा पीड़ितों को मुआवजा दिए जाने की घोषणा के साथ ही दंगा पीड़ितों को न्याय दिलाने की मांग फिर मुखर होने लगी है। शनिवार को दंगाइयों को फांसी देने की मांग करते हुए लोकराज संगठन के बैनर तले कई सामाजिक संगठनों ने पैदल यात्रा निकाली। इसमें कई सामाजिक कार्यकर्ता, थियेटर कलाकार व चित्रकार भी शामिल हुए। यात्रा मंडी हाउस से शुरू होकर जंतर-मंतर पर खत्म हुई और वहां एक सभा में बदल गई। यात्रा के दौरान एक ओर जहां मुआवजा नहीं इंसाफ चाहिए जैसे नारे लगाए जा रहे थे, वहीं दूसरी तरफ निशांत नाट्य मंच के कलाकार गीत गाते हुए चल रहे थे। यात्रा में दंगा पीड़ितों के साथ काफी संख्या में मुस्लिम महिलाएं भी शामिल हुई।

लोकराज संगठन के राघवन ने बताया कि सिख दंगा पीड़ितों को न्याय दिलाने की मांग को लेकर सामाजिक संगठनों का यह आंदोलन 15 नवंबर तक जारी रहेगा।

उन्होंने कहा कि 84 का सिख कत्लेआम दंगा नहीं राजकीय आतंकवाद था, जिसे सरकार द्वारा संरक्षण दिया गया। उन्होंने कहा कि दंगों में कम से कम दस हजार सिखों को मारा गया, लेकिन दोषियों को अब तक सजा नहीं मिली है। हम मुआवजे के लिए नहीं, गुनाहगारों को सजा दिलवाने के लिए लड़ रहे हैं और यह लड़ाई आगे भी जारी रहेगी।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए वरिष्ठ अधिवक्ता एचएस फुल्का ने केंद्र द्वारा पीड़ितों को मुआवजा देने की घोषणा का स्वागत करते हुए कहा कि इससे पीड़ितों के जख्मों को भरने में मदद तो मिलेगी, लेकिन उन्हें न्याय तभी मिलेगा जब दंगाइयों को सजा होगी। उन्होंने कहा कि यह दुखद है कि राजनीतिक संरक्षण प्राप्त ये दंगाई अभी भी आराम से घुम रहे हैं। किसी को सजा नहीं मिली है। फुल्का ने केंद्र सरकार से दिल्ली की पूर्ववर्ती अरविंद केजरीवाल सरकार द्वारा गठित विशेष जांच दल (एसआइटी) की रिपोर्ट जल्द पूरा कराने और उसके आधार पर दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग की। कार्यक्रम में जमात इस्लामी हिंद के सलीम इंजीनियर, वेलफेयर पार्टी के इलियास, मानवाधिकार कार्यकर्ता एनडी पंचौली, चित्रकार अर्पणा कौर व सिख फोरम सहित कई संगठन से जुड़े लोगों ने भाग लिया।