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राज्य ब्यूरो, नई दिल्ली : एम्स के सीवीओ पद से संजीव चतुर्वेदी को हटाने के पीछे केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय भले ही उनकी योग्यता व केंद्रीय सतर्कता आयोग (सीवीसी) से स्वीकृति नहीं होने का तर्क दे रहा है। लेकिन मामले में एक अहम तथ्य यह है कि आइएएस अधिकारी व हिमाचल प्रदेश सरकार में अतिरिक्त मुख्य सचिव विनीत चौधरी के खिलाफ एम्स में भ्रष्टाचार के मामले में पिछले महीने ही विभागीय चार्जशीट हुई और इसके तुरंत बाद ही संजीव चतुर्वेदी को हटा दिया गया।

विनीत चौधरी एम्स में उप निदेशक (प्रशासनिक) थे। इस पद पर रहते हुए उन पर भ्रष्टाचार के आरोप लगे हैं। संजीव चतुर्वेदी को हटाने के लिए भाजपा के राज्यसभा सदस्य जेपी नड्डा लगातार केंद्र सरकार पर दबाव बनाए हुए थे। खास बात यह है कि संजीव चतुर्वेदी ने जब-जब विनीत चौधरी के खिलाफ कोई कार्रवाई की, उसके कुछ समय बाद जेपी नड्डा ने पत्र लिखे। चतुर्वेदी ने अप्रैल, 2013 में विनीत चौधरी के खिलाफ जांच शुरू की तो मई, 2013 में जेपी नड्डा ने केंद्रीय कार्मिक व प्रशिक्षण मंत्रालय को पत्र लिख कर संजीव चतुर्वेदी की नियुक्ति पर सवाल खड़े किए। इस साल 9 जनवरी को सीबीआइ में मुकदमा दर्ज होने पर 29 जनवरी को उन्होंने तत्कालीन स्वास्थ्य मंत्री गुलाम नबी आजाद को चिठ्ठी लिखी। जुलाई में चौधरी के खिलाफ विभागीय चार्जशीट हुई तो अगस्त में संजीव चतुर्वेदी की विदाई का फरमान स्वास्थ्य मंत्रालय से आ गया।

चार्जशीट में संजीव चतुर्वेदी ने आइएएस अधिकारी विनीत चौधरी पर सात आरोप तय किए हैं। इसमें पांच आरोप तो बेहद गंभीर हैं। विभागीय चार्जशीट होने के चलते अधिकारी की पदोन्नति आदि रुक जाती है। चार्जशीट में संजीव चतुर्वेदी ने खुलासा किया है कि एम्स विस्तार की 3750 करोड़ की योजना में जमकर अनियमितता हुई है। एक आइटीआइ पास व्यक्ति को अधीक्षण अभियंता बना दिया गया। झज्जर में एम्स के दूसरे कैंपस के लिए अस्थायी पोर्टा केबिन के निर्माण पर 10 करोड़ बेवजह खर्च किए गए।

पहला आरोप

विनीत चौधरी पर पहला आरोप अधीक्षण अभियंता बीएस आनंद को एम्स के नियमों का उल्लंघन करके नौकरी में विस्तार देना रहा। नौकरी में विस्तार के लिए विजिलेंस से स्वीकृति नहीं ली गई। एम्स के दूसरे कैंपस के नजदीक एम्स को बिना बताए बीएस आनंद व विनीत चौधरी के परिवार वालों के नाम पर जमीन खरीदी गई।

दूसरा आरोप

उप निदेशक (प्रशासनिक) रहते हुए चौधरी ने अनियमित नियुक्तियां की। इससे संस्थान को वित्तीय नुकसान हुआ।

तीसरा आरोप

चौधरी ने अपने कार्यालय के नवीनीकरण पर 19.26 लाख रुपये खर्च किए। इसमें भी अनियमितता का आरोप है।

चौथा आरोप

सरकारी गाड़ी का गलत इस्तेमाल किया गया। जून, 2010 से अगस्त, 2012 के बीच करीब दो साल तक हर रोज करीब 144 किलोमीटर सफर दिखाया गया। यहां तक कि छुट्टी या त्योहार के दिन भी गाड़ी चलने की बात कही गई।

पांचवा आरोप

विनीत चौधरी ने अपने पद का जमकर इस्तेमाल किया। एम्स में भले ही मरीज इलाज के लिए भटकते रहते हैं लेकिन उन्होंने अपने पद का इस्तेमाल करते हुए एम्स के कैंसर इंस्टीट्यूट में अपने कुत्ते का इलाज कराया। कुत्ते को रेडिएशन थेरेपी दी गई। इस मामले में उन्होंने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री व एम्स के अध्यक्ष को भी गुमराह किया। कुत्ते को रेडिएशन थेरेपी कराने से एम्स को भारी नुकसान हुआ। जबकि मरीजों को रेडियोथेरेपी के लिए लंबा इंतजार करना पड़ता है।

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