जागरण संवाददाता, पश्चिमी दिल्ली : सफाई के दौरान इकट्ठा कूड़े के ढेर में आग लगने की घटना आए दिन सामने आती रहती है। कूड़े के निस्तारण से जुड़ी यह समस्या व्यक्तिगत व सामुदायिक स्तर यानी दोनों ही मामलों में सामने आती रहती है। यदि हम थोड़ी सी सजगता का परिचय दें तो इन कूड़ों से जैविक खाद बनाकर न सिर्फ पर्यावरण का भला किया सकता है, बल्कि इससे कूड़े की समस्या का भी काफी हद तक निदान हो सकता है। यह समस्या शहरी क्षेत्र से लेकर ग्रामीण क्षेत्र यानी हर जगह समान रूप से सामने आती है। पूसा स्थित भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान के सूक्ष्म जीव विभाग के वैज्ञानिकों का कहना है कि यदि जैविक खाद बनाने की मुहिम में सोसायटियों व आम आदमी को शामिल कर लिया जाए तो कूड़े की समस्या का काफी हद तक समाधान हो सकता है। खुद पूसा संस्थान परिसर में सफाई व खेतों से प्राप्त अवशेषों का इस्तेमाल कर हजारों टन जैविक खाद बनाया जाता है। इस खाद के बनाने में किसी तरह का रसायन इस्तेमाल नहीं किया जाता है।

कैसे बनाएं जैविक खाद

पूसा स्थित भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान सूक्ष्मजीव विज्ञान विभाग की प्रधान वैज्ञानिक डॉ लवलीन शुक्ला बताती हैं कि जैविक खाद बनाने की विधि एकदम सरल है। आप चाहें तो इस विधि के इस्तेमाल से सामुदायिक स्तर या व्यक्तिगत स्तर पर खाद बना सकते हैं।

क्या-क्या होता है इस्तेमाल

जैविक खाद के लिए सब्जियों के छिलके, पत्ते, डांट, पुआल, पेड़ के पत्ते, फूल व अन्य जैविक चीजों का इस्तेमाल किया जा सकता है।

कैसे बनाएं

सामुदायिक स्तर पर जैविक खाद बनाने के लिए एक सोसायटी के लोग आपस में सहयोग कर रोजाना घरों व सोसायटी परिसर से जमा अवशेष व कूड़ों को इकट्ठा करें। करीब एक मीटर चौड़ा, एक मीटर लंबा व एक मीटर गहरा गड्ढा खोद लें। गड्ढे में आठ हिस्सा अवशेष, एक हिस्सा तीन से चार दिन पुराना गोबर, आधा हिस्सा खेत की साफ मिट्टी व आधा हिस्सा पुराना कंपोस्ट डाल दें। इसे मिलाकर छोड़ दें। प्रत्येक 15 दिन के बाद इसकी पलटाई करते रहें। समय समय पर इसमें नमी के लिए पानी डालते रहें। ऐसा तीन बार 15 दिन के अंतराल पर करें। 45 दिन के बाद खाद बनकर तैयार हो जाएगी। यही कार्य घरेलू स्तर पर भी किया जा सकता है। आजकल बाजारों में कंपोस्ट बिन भी आसानी से उपलब्ध हो जाते हैं। आप चाहें तो घर के आसपास स्थित सब्जी बाजारों या मंडियों से फेंकी गई सब्जियां व हरे पत्ते को एकत्रित कर खाद बना सकते हैं।