जागरण संवाददाता, पश्चिमी दिल्ली : गर्मी बढ़ने के साथ-साथ उपनगरी द्वारका में पेयजल की समस्या भी गहराने लगी है। इस संबंध में बार-बार डीडीए अधिकारियों से शिकायत करने के बावजूद यहां के लोगों की समस्या का समाधान नहीं हो रहा है। द्वारकावासियों का कहना है कि डीडीए कार्यालय का चक्कर काटना हमारी मजबूरी है, क्योंकि हमें पानी देने की जिम्मेदारी उसी के पास है। लेकिन इस मामले में उसके द्वारा कुछ नहीं किया जा रहा है। लोगों का कहना है कि नौ लाख से अधिक आबादी को बसाते समय डीडीए ने इस बुनियादी जरूरत को पूरा करने की सही योजना नहीं बनाई। जिसका खामियाजा आज द्वारका में रहने वाले लाखों लोगों को भुगतना पड़ रहा है।

लोगों के मुताबिक, डीडीए दो दिन के अंतराल पर पानी की आपूर्ति करता है। वहीं, जो आपूर्ति टैंकरों द्वारा की जाती है, वह लोगों की जरूरत का बीस प्रतिशत भी नहीं होता। इसके चलते यहां के लोग निजी टैंकरों से पानी खरीदने को मजबूर हैं। ऐसी स्थिति में निजी टैंकर मनमानी कीमत वसूल रहे हैं। वहीं लोगों का कहना है कि बोरिंग का पानी इतना गंदा है कि उसकी वजह से पानी साफ करने वाले उपकरण छह महीने भी ठीक से काम नहीं करते। इस मामले में जब द्वारका में पानी की व्यवस्था देख रहे मुख्य अभियंता एचएस धर्मसत्तू से बात की गई तो उन्होंने कुछ भी कहने से इन्कार कर दिया।

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द्वारका में पानी की समस्या का समाधान इसलिए नहीं हो पा रहा है, क्योंकि डीडीए इसको लेकर गंभीर नहीं है। यदि इसको लेकर डीडीए सही योजना बनाए तो समस्या का समाधान हो सकता है।

संदीप, निवासी द्वारका

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समस्या के पीछे कारण जो भी हो लेकिन इसमें सिर्फ जनता पिस रही है। हमारे पास कहीं और जाने का विकल्प नहीं है, डीडीए इस समस्या पर बिल्कुल ध्यान नहीं दे रहा है।

अंजलि, निवासी द्वारका

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इस समस्या का समाधान जरूरी है। यह लोगों की बुनियादी जरूरत है। आखिर कब तक लोग इसके लिए इधर-उधर के साधनों पर निर्भर रहेंगे?

बीके बरुआ, निवासी द्वारका

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