जागरण संवाददाता, पश्चिमी दिल्ली : दुर्गा पूजा समारोह में शामिल होने वाले श्रद्धालुओं को पर्यावरण संरक्षण का संदेश देन की पूरी तैयारी चल रही है। पांडाल पर्यावरण अनुकूल सामग्री से बनाए जा रहे हैं। कई जगह प्रसाद देने के लिए जूट के विशेष झोले बनाए जा रहे हैं।

पश्चिम विहार बंगाली एसोसिएशन के तत्वावधान में होने वाली दुर्गा पूजा समारोह की तैयारी जोरों से चल रही है। साज-सज्जा के लिए कृत्रिम सामान के बजाय प्राकृतिक उत्पादों का प्रयोग यहां किया जा रहा है। ऐसे उत्पादों में पेड़ की छाल, बेल का फल, जूट की डंडी व चीड़ का फल शामिल हैं। पांडाल को आकर्षक बनाने के लिए बाहर से पुआल का प्रयोग किया गया है। बांधने के लिए यहां लोहे के तार या प्लास्टिक की रस्सी के बजाय जूट के रेशे से बनी रस्सी का प्रयोग किया जा रहा है। द्वारका सेक्टर चार स्थित आइकोतन संस्था के तत्वावधान में होने वाले दुर्गा पूजा समारोह के अंतर्गत पांडाल परिसर में विशेष स्टॉल लगाने की तैयारी चल रही है, जिसमें पर्यावरण अनुकूल सामग्री से बने उत्पादों की प्रदर्शनी लगाई जाएगी। जनकपुरी डी ब्लॉक में पंखा रोड बंग सम्मेलन के तत्वावधान में होने वाले दुर्गा पूजा समारोह में भी पांडाल बनाने तैयारी जोरों पर है। बांग्ला लोक संस्कृति थीम पर बन रहे इस पांडाल में जूट व बांस जैसे प्राकृतिक उत्पादों का अधिक से अधिक प्रयोग किया जा रहा है।

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हमारा मकसद लोगों को पर्यावरण के प्रति संवेदनशील बनाना है। प्रकृति की सुंदरता को बनाए रखना सभी की जिम्मेदारी है। इस बार हम लोगों ने मूर्ति बनाने वाले कलाकार से भी कहा है कि वे मूर्ति निर्माण में ऐसी सामग्री का ही प्रयोग करें जो पर्यावरण अनुकूल हो।

टी भौमिक, आयोजन सचिव

पश्चिम विहार बंगाली एसोसिएशन

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पांडाल को पर्यावरण अनुकूल सामग्री से तैयार करने का उद्देश्य लोगों में जागरूकता उत्पन्न करना है। यदि हम सब प्रकृति से जुड़ी अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन मन से करें तो प्रकृति से जुड़ी समस्या हमारे बीच नहीं होगी।

आशीष दास, कोषाध्यक्ष

पंखा रोड बंग सम्मेलन

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