जागरण संवाददाता, नई दिल्ली : नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के निर्देश पर वृक्षों की सुरक्षा के लिए उसके आसपास से कंक्रीट हटाने का काम तो शुरू किया गया है, लेकिन इसमें सावधानी नहीं बरती जा रही है। जिससे वृक्षों को नुकसान पहुंच रहा है। चितरंजन पार्क में पीपल के पेड़ गिरने के बाद यह मामला और गंभीर हो गया है तथा वृक्षों को बचाने के लिए उचित कदम उठाने की मांग होने लगी है।

चितरंजन पार्क के बी ब्लॉक में दो दिन पहले पीपल के दो विशाल वृक्ष गिर पड़े, जिससे क्षेत्र के लोगों में रोष है। स्थानीय लोगों का कहना है कि नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने 31 अगस्त तक कंक्रीट हटाने का निर्देश दिया है। इसलिए इस काम में भारी मशीन का प्रयोग किया जा रहा है, जिससे वृक्षों की ऊपरी जड़ों को नुकसान पहुंच रहा है। जड़ें कमजोर होने की वजह से हीं दोनों पीपल के पेड़ गिर गए हैं। यदि सावधानी नहीं बरती गई तो और वृक्षों को भी नुकसान पहुंच सकता है। इसलिए तत्काल कंक्रीट हटाने के काम में सुधार लाने की जरूरत है।

क्षेत्र के पार्षद वीरेंद्र कसाना का कहना है कि कंक्रीट हटाने का तरीका सही नहीं है। एक तो जेसीबी लगाकर कंकरीट हटाई जा रही है। दूसरे काम करने वाली एजेंसी का कोई प्रतिनिधि वहां नहीं रहता है, जिससे हरे भरे वृक्षों को नुकसान पहुंच रहा है। कई बार वह अन्य क्षेत्रवासियों के साथ जेसीबी से खुदाई रुकवा चुके हैं, लेकिन फिर से यह काम शुरू हो जाता है। इसलिए तत्काल भारी मशीन की जगह हाथ से खुदाई का काम किया जाना चाहिए। इस वार्ड में 270 पार्क हैं, जिनमें सैकड़ों पेड़ हैं उन्हें बचाने के लिए जरूरी कदम उठाने की जरूरत है।

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'नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के निर्देश के अनुसार वृक्षों आसपास कंक्रीट हटाया जाना है, जिससे कि वृक्षों का सही विकास हो सके। हाइकोर्ट ने भी इस बारे में निर्देश दिया है। यदि खुदाई के लिए भारी मशीन का उपयोग किया जाएगा वृक्ष की बाहरी जड़ कट जाएंगीं। इसलिए इस काम को सावधानी से करना चाहिए।'

-पदमावती द्विवेदी, मैनेजिंग ट्रस्टी

कम्पेसियोनेट लिविंग

'पेड़ के आसपास से कंक्रीट हटाने का काम कई एजेंसियां कर रही हैं। इसलिए यह जांच के बाद ही पता चलेगा कि पेड़ गिरने का क्या कारण है। यदि निगम का कोई व्यक्ति इसके लिए जिम्मेदार पाया गया तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।'

-मुकेश यादव, निदेशक जनसंपर्क, दक्षिणी दिल्ली नगर निगम

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