पोर्ट एलिजाबेथ, पीटीआइ। भारतीय टीम और इतिहास के बीच में सिर्फ एक जीत का फासला है। अगर टीम इंडिया पोर्ट एलिजाबेथ में मंगलवार को होने वाले सीरीज के पांचवें मुकाबले को जीत लेती है तो वह इस मैदान में कभी न जीतने के इतिहास को तो बदलेगी ही साथ ही दक्षिण अफ्रीका में पहली वनडे सीरीज जीतने का इतिहास भी रचेगी।

लगातार शुरुआती तीन मैच जीतने के बाद चौथे मैच में की गई गलतियां भारतीय टीम को भारी पड़ी थीं और अब उसकी कोशिश इन गलतियों से सबक लेकर सीरीज अपने नाम करने की होगी। इस छह मैचों की वनडे सीरीज में भारतीय टीम 3-1 से आगे है और वह चाहेगी कि इस बढ़त का फायदा उठाए। भारतीय टीम ने डरबन में पहला मैच छह विकेट से, दूसरा मैच सेंचुरियन में नौ विकेट से और तीसरा मैच केपटाउन में 124 रन से जीता था लेकिन, मेजबान टीम ने बारिश से प्रभावित चौथे पिंक वनडे में पांच विकेट से जीत हासिल कर वापसी की थी।

इस मैदान पर बेहद खराब है भारत का रिकॉर्ड

पोर्ट एलिजाबेथ के सेंट जॉर्ज पार्क के मैदान पर टीम इंडिया का रिकॉर्ड बेहद खराब है। यहां पर भारत ने 05 वनडे खेले हैं और इन पांच में से टीम इंडिया को सभी मैचों में मात खानी पड़ी है। चार मैचों में उसे दक्षिण अफ्रीका से और एक में केन्या से हार मिली है। वहीं दक्षिण अफ्रीका की बात करें तो मेजबान ने इस मैदान पर 32 वनडे मैच खेले हैं, जिसमें से उसने 20 जीते, 11 हारे और एक में कोई परिणाम नहीं निकला। 

कलाई के गेंदबाजों पर फिर होंगी नजरें 

दक्षिण अफ्रीका का बल्लेबाजी लाइनअप और भारत के कलाई के स्पिनरों के बीच अब भी मुकाबला अहम है। हालांकि जोहानिसबर्ग में बारिश के कारण हुई दो बार की बाधा ने भारत की बल्लेबाजी और गेंदबाजी में लय बिगाड़ दी थी। लक्ष्य में संशोधन किया गया और एबी डिविलियर्स के जल्दी पवेलियन लौटने के बावजूद मेजबानों को इसे हासिल करने में जरा भी परेशानी नहीं हुई। यह मैच टी-20 की तर्ज पर ही हुआ जिसमें डेविड मिलर और हेनरिक क्लासेन ने भारत के कलाई के स्पिनरों के खिलाफ आक्रामक बल्लेबाजी कर मैच छीन लिया।

अहम होगा टीम चयन 

निश्चित रूप से भारत को कैच छोड़ने के अलावा मिलर को ‘नो बॉल’ फेंकना भारी पड़ा, लेकिन इससे यह साबित नहीं होता कि दक्षिण अफ्रीका ने युजवेंद्र चहल और कुलदीप यादव की कलाई की स्पिन का सामना करना सीख लिया है। साथ ही भुवनेश्वर कुमार और जसप्रीत बुमराह का अच्छी तरह इस्तेमाल नहीं किया गया, क्योंकि विराट कोहली ने स्पिनरों पर ही ज्यादा भरोसा दिखाया, जबकि वे दक्षिण अफ्रीकी बल्लेबाजों की आक्रामकता को रोकने में असफल रहे थे। इसे देखते हुए पोर्ट एलिजाबेथ में भारतीय टीम का चयन काफी अहम रहेगा।

जाधव पर संशय

केदार जाधव की फिटनेस पर अब भी सवालिया निशान बना हुआ है जिन्हें केपटाउन में हैमस्टिंग की चोट लगी थी और वह पिछला मैच भी नहीं खेल सके थे। उनकी गैरमौजूदगी में भारत एक भरोसेमंद गेंदबाजी विकल्प गंवा देगा। जाधव में धीमी स्पिन गेंदबाजी करने की काबिलियत है और वह इसे परिस्थितियों के अनुकूल ढाल लेते हैं जिससे वह चहल और कुलदीप के साथ अच्छी तरह घुलमिल जाते हैं। उनकी गैरमौजूदगी में भारत के पास ज्यादा विकल्प नहीं हैं। वहीं, रोहित शर्मा ने वनडे में अंतिम बार जनवरी 2016 में पर्थ में गेंदबाजी की थी। श्रेयस अय्यर ने अपनी लेग ब्रेक का अभ्यास किया था, पर उन्होंने अपनी पदार्पण सीरीज में श्रीलंका के खिलाफ सिर्फ एक ही ओवर फेंका था।

रोहित बने हुए हैं संकट 

रोहित शर्मा की खराब फॉर्म टीम इंडिया का संकट बनी हुई है। वह रन बनाने में पूरी तरह असफल रहे हैं। उनके विकल्प के तौर पर रहाणे को ओपनिंग कराने की जरूरत है जबकि चौथे नंबर पर दिनेश कार्तिक का इस्तेमाल किया जा सकता है। रोहित ने पहले चार वनडे में 40 रन बनाए हैं और दक्षिण अफ्रीकी सरजमीं पर 12 मैचों में उनका वनडे औसत महज 11.45 का है।

मिडिल आर्डर भी बढ़ा रहा है कोहली की चिंता

अजिंक्य रहाणे ने चौथे नंबर पर वापसी करते हुए 79 रन की पारी के बाद 11 और आठ रन बनाए हैं। हार्दिक पांड्या का बल्ले से दौरा (पहले टेस्ट को छोड़कर) काफी खराब रहा है। उन्होंने पिछली दो पारियों में 14 और नौ रन बनाए हैं। सिर्फ महेंद्र सिंह धौनी ने ही मध्य क्रम में 43 गेंद में नाबाद 42 रन बनाए, जिससे टीम जोहानिसबर्ग में जूझती रही।

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By Pradeep Sehgal