(रवि शास्त्री का कॉलम)

खेल में कुछ बातों की बिल्कुल भी जगह नहीं है, न तो शारीरिक भिड़ंत की और न ही अभद्र टिप्पणियों की। स्टार्क और पोलार्ड की भिड़ंत की घटना बेहद खराब थी और उन्हें एक गंभीर अपराध के लिए कड़ी सजा नहीं मिली। यह घटना बुरे व्यवहार से भी कहीं अधिक थी। आप एक-दूसरे को तंग कर सकते हैं, घूर सकते हैं, वाद-विवाद कर सकते हैं, यह फिर भी सहन किया जा सकता है, लेकिन आप शारीरिक नुकसान तो बिल्कुल भी नहीं पहुंचा सकते। दोनों ने गेंद और बल्ले से एक-दूसरे को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की। दोनों की ढेरों कमियों को आप गिन सकते हैं। अंपायरों के प्रति असम्मान, अपने उपकरणों का अपमान, प्रायोजकों की अवहेलना और खेल भावना को नुकसान पहुंचाना।

स्टार्क बल्लेबाज को भड़काना पसंद करते हैं। हम देख चुके हैं कि वीरेंद्र सहवाग के हेलमेट पर लगी उनकी गेंद जब सीमारेखा के बाहर चली गई तो इस गेंदबाज ने उन पर भी टिप्पणी की। हालांकि कुछ हद तक इसे स्वीकार किया जा सकता है। मगर स्टार्क और पोलार्ड को सिर्फ जुर्माने के बजाय कड़ी चेतावनी भी दी जानी चाहिए थी। इसी मैच में चहल भी बल्लेबाज को आउट करने के बाद भड़काऊ प्रतिक्रिया देते दिखे। अधिकतर मौकों पर गेंदबाज ही थे जो लक्ष्मण रेखा लांघते नजर आए। अभी तक यह आइपीएल शानदार रहा है और यह इस खेल के खिलाड़ियों द्वारा इससे अच्छी घटनाओं का हकदार है।

एक क्रिकेटर के तौर पर आखिरकार आप इस खेल का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। मौजूदा और अगली पीढ़ी के आदर्श हैं। खेल अपना कौशल दिखाने का मंच है न कि तनातनी का। ऐसे में अपने कौशल का प्रदर्शन करने से बेहतर कोई जवाब नहीं हो सकता। मुंबई और बेंगलूर दोनों ही वापसी की कोशिश में हैं। भारत के दो बेहतरीन बल्लेबाज दोनों टीमों की अगुआई कर रहे हैं। उनके खेमे में भी दिग्गजों की भरमार है। ऐसे में जरूरी है कि व्यवहार भी उसी स्तर का हो।

(टीसीएम)