नई दिल्ली। स्पॉट फिक्सिंग प्रकरण का सामना कर रही इंडियन प्रीमियर लीग [आइपीएल] के साथ-साथ भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड [बीसीसीआइ] को मंगलवार को एक और झटका लगा। सहारा समूह ने अपने स्वामित्व वाली पुणे वॉरियर्स इंडियंस फ्रेंचाइजी को इस टी-20 लीग से हटाने का फैसला कर लिया है। इसी के साथ उसने टीम इंडिया के प्रायोजन अनुबंध को आगे जारी न रखने का फैसला किया है।

सहारा समूह ने फ्रेंचाइजी फीस कम करने के लिए मध्यस्थता की कार्रवाई के प्रति बीसीसीआइ के ढुलमुल रवैये और टीम की बैंक गारंटी को भुनाने के बोर्ड के फैसले के कारण यह कदम उठाया।

सहारा समूह ने भारतीय क्रिकेट टीम के प्रायोजन से हटने के संदर्भ में यह स्पष्ट किया है कि वह खिलाड़ियों के हितों को देखते हुए तय अवधि यानी दिसंबर, 2013 तक इसे बरकरार रखेगा। सहारा समूह ने कहा, 'भारतीय क्रिकेट टीम के प्रायोजन से आज से ही हटने का इरादा था, लेकिन अगर हम ऐसा करते तो खिलाड़ियों के हितों को नुकसान पहुंचता। उसने बीसीसीआइ को जनवरी, 2014 से नया प्रायोजन शुरू करने का समय दिया है, क्योंकि वे दिसंबर, 2013 तक ही राष्ट्रीय टीम का प्रायोजन जारी रखेंगे जो मौजूदा करार समाप्त होने की तारीख है।

2010 में 1702 करोड़ रुपये में फ्रेंचाइजी खरीदने वाले सहारा ने कहा कि वह अपने प्रति बीसीसीआइ के रवैये से निराश है और लीग से दोबारा नहीं जुड़ेगा, भले ही उसकी पूरी फ्रेंचाइजी फीस ही क्यों न माफ कर दी जाए। उन्होंने कहा कि 2010 में सहारा ने 94 मैचों के राजस्व आंकड़े के आधार पर आइपीएल फ्रेंचाइजी के लिए 1702 करोड़ की बोली लगाई थी। बीसीसीआइ ने चतुराई दिखाते हुए मीडिया में 94 मैचों का आंकड़ा रखा जिससे कि बड़ी राशि मिले, लेकिन हमें सिर्फ 64 मैच मिले।

सहारा ने दावा किया कि बीसीसीआइ ने मध्यस्थता और फ्रेंचाइजी फीस कम करने के उसके आग्रह को लगातार अनसुना किया। हमने और कोच्चि टीम ने तुरंत विरोध किया और बीसीसीआइ से बोली की राशि में उसी अनुपात में कमी करने को कहा जिससे कि व्यावहारिक आइपीएल प्रस्ताव बने। कोई सुनवाई नहीं हुई। हमने भरोसे के साथ इंतजार किया कि ऐसी खेल संस्था में खेल भावना होगी। हम जून, 2011 से लगातार बीसीसीआइ से मध्यस्थता का आग्रह करते रहे, लेकिन बीसीसीआइ की चिंता सिर्फ पैसा था और फ्रेंचाइजी के हित नहीं। इसलिए हम बीसीसीआइ के कानों में अपनी आवाज नहीं डाल पाए। हमने फरवरी, 2012 में हटने का फैसला किया था, लेकिन बातचीत के बाद बात बन गई थी।

2012 में टूर्नामेंट से हटने और दोबारा जुड़ने के सदंर्भ में समूह ने कहा कि बीसीसीआइ ने मध्यस्थता से संबंधित अपना वादा पूरा नहीं किया। बीसीसीआइ ने समाधान के लिए हमसे संपर्क किया और टूर्नामेंट से नहीं हटने का अग्रह किया। मुंबई में बीसीसीआइ अध्यक्ष सहित बीसीसीआइ के आला अधिकारियों से चर्चा के बाद सहारा और बीसीसीआइ ने फरवरी, 2012 में संयुक्तबयान जारी किया। संयुक्त बयान में विशेष तौर पर तुरंत मध्यस्थ की नियुक्तिके साथ मध्यस्थता प्रक्रिया शुरू करने का जिक्रथा।

तकरार की वजह :-

सहारा का फ्रेंचाइजी फीस कम करने के संबंध में विवाद चल रहा था, क्योंकि शुरू में मैचों की संख्या 94 थी, जिन्हें बाद में कम करके 74 मैच कर दिया गया। जनवरी में सहारा ने इस साल की फ्रेंचाइजी फीस का करीब 20 प्रतिशत भुगतान कर दिया जो लगभग 170 करोड़ रुपये था। बीसीसीआइ को बताया गया कि वे बची हुई राशि 19 मई तक दे देंगे, लेकिन वे इसमें असफल रहे। आइपीएल की संचालन परिषद ने इसके बाद उसकी बैंक गांरटी जब्त कर ली।

आइपीएल से जुड़ाव :-

सहारा ने 2010 में आइपीएल में प्रवेश किया था। उसने पुणे वॉरियर्स टीम को 1702 करोड़ रुपए में खरीदा था। युवराज सिंह, एरोन फिंच, अजंता मेंडिस, एंजलो मैथ्यूज, अशोक डिंडा, भुवनेश्वर कुमार, राहुल शर्मा, वेन पर्नेल, रॉस टेलर और अभिषेक नायर जैसे खिलाड़ी उसकी टीम में खेल रहे थे।

टीम इंडिया से जुड़ाव :-

सहारा समूह पिछले 12 साल से भारतीय क्रिकेट टीम का प्रायोजक है। एक जुलाई, 2010 को प्रायोजन करार का नवीनीकरण हुआ। यह 31 दिसंबर, 2013 तक चलना था। नई शर्तों के तहत सहारा बीसीसीआइ को प्रत्येक टेस्ट, वनडे और ट्वेंटी-20 अंतरराष्ट्रीय मैच के लिए तीन करोड़ 34 लाख रुपए का भुगतान कर रहा है।

'अगर पूरी फीस भी माफी कर दी जाए तो भी हम आइपीएल फ्रेंचाइजी नहीं रखेंगे। आइपीएल से हटने का सहारा का फैसला अंतिम है।'

- सहारा समूह

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