नई दिल्ली। आईपीएल स्पॉट फिक्सिंग मामले में गिरफ्तार किए गए क्रिकेटर श्रीसंत, अजीत चंदीला और अंकित चव्हाण अंडरव‌र्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम के इशारे पर काम किया करते थे। मंगलवार को साकेत कोर्ट के समक्ष यह सनसनीखेज दावा करते हुए दिल्ली पुलिस के स्पेशल सेल ने तीनों क्रिकेटरों सहित 26 आरोपियों पर मकोका (महाराष्ट्र कंट्रोल ऑफ आर्गेनाइज्ड क्राइम एक्ट) के तहत केस दर्ज किया है। पुलिस की इस रिपोर्ट के बाद अदालत ने श्रीसंत, चंदीला और 14 अन्य आरोपियों की जमानत अर्जी खारिज कर दी।

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पुलिस अधिकारियों का कहना है कि सभी आरोपियों पर इसलिए मकोका लगाया गया क्योंकि वे दाऊद और उसके सहयोगी छोटा शकील के लिए संगठित तरीके से स्पॉट फिक्सिंग का कारोबार कर रहे थे। आरोपियों के खिलाफ इस बात के पुख्ता सुबूत हैं कि उन्होंने इस संगठित अपराध साम्राज्य को चलाने वाले डी कंपनी के इशारे पर काम किया, मैच फिक्स किया, खिलाड़ियों को फिक्स किया और हवाला के माध्यम से उन्हें रुपये भी सुनियोजित ढंग से पहुंचाए गए। इसके लिए डी कंपनी लोगों को धमकाने के लिए ताकतवर लोगों को भी रखती है। दाऊद का गैरकानूनी संगठित अपराध साम्राज्य चलाने का रिकार्ड रहा है।

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मकोका लगने के बाद यह मामला सत्र अदालत को भेज दिया गया, जहां अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश ने श्रीसंत व 22 अन्य आरोपियों की न्यायिक हिरासत 18 जून तक के लिए बढ़ा दी। श्रीसंत, जीजू जनार्दन और बुकी अश्वनी अग्रवाल सहित 13 लोगों ने सत्र अदालत के समक्ष नए सिरे से जमानत अर्जी दायर की है। इस पर सात जून को सुनवाई होगी।

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इससे पहले साकेत कोर्ट में पुलिस ने बताया कि पुलिस के पास इस संबंध में दाऊद, छोटा शकील और सटोरियों के बीच हुई बातचीत की रिकार्डिग है। पुलिस को इस मामले में बुकी अश्वनी अग्रवाल और रमेश व्यास के खिलाफ भी पुख्ता सुबूत मिले हैं। दोनों पूरे मैच के दौरान दाऊद व शकील से लगातार संपर्क में थे। अश्वनी और रमेश व्यास इस समय मुंबई पुलिस की कस्टडी में हैं। अधिकारियों ने बताया कि जांच के दौरान कई और हाई प्रोफाइल लोगों के नाम सामने आए हैं पर इसे सार्वजनिक नहीं किया जा सकता।

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दिल्ली पुलिस की जांच में पाकिस्तान में बैठा मोस्ट वांटेड डॉन दाऊद इब्राहिम और उसका सहयोगी छोटा शकील आईपीएल स्पॉट फिक्सिंग मामले के मुख्य किरदार बनकर सामने आए हैं। डी कंपनी ही दुबई से सट्टे के रेट खोलने से लेकर हवाला के जरिये हार-जीत की रकम का आदान प्रदान करती है। पुलिस जल्द ही दाउद और शकील को इस मामले में आरोपी बनाने जा रही है। दूसरी तरफ, अदालत में श्रीसंत सहित सभी आरोपियों ने उन पर मकोका लगाए जाने पर आपत्ति जाहिर की। इनके अधिवक्ताओं ने कहा कि एक खिलाड़ी पर मकोका नहीं लगाया जा सकता, क्योंकि वह संगठित अपराध का हिस्सा नहीं हो सकता।

2002 में दिल्ली आया मकोका

महाराष्ट्र सरकार ने 1999 में मकोका बनाया था, जिसका मकसद अंडरव‌र्ल्ड की संगठित सरगर्मियों से निपटना था। 2002 में दिल्ली में भी यह कानून लागू कर दिया। अधिकारियों के मुताबिक, जबरन वसूली, अगवा और संगठित तौर पर किए जाने वाले दूसरे अपराधों के बदमाशों पर यह लगाया जा सकता है। इसमें कम से कम पांच साल और अधिकतम आजीवन कारावास की सजा का प्रावधान है। इसमें जमानत मिलने की संभावना बहुत कम होती है। अधिकतम पांच लाख तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। पुलिस को भी तीन महीने के बजाय छह महीने में चार्जशीट पेश करनी होती है।

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