नई दिल्ली, जेएनएन। 12 वर्ष पहले भारतीय सीमित प्रारूप में कभी युवराज सिंह का दबदबा हुआ करता था, लेकिन मौजूदा समय में इस बायें हाथ के बल्लेबाज का टी-20 में भी कोई राज नहीं रहा। उनका इस साल के आइपीएल में बेहद खराब प्रदर्शन रहा। वह किंग्स इलेवन पंजाब से खेलते हुए रन बनाने के लिए तरसते रहे। पूरे टूर्नामेंट के दौरान उनका बल्लेबाजी क्रम बदलता गया और वह टीम से अंदर-बाहर होते रहे।

एक समय युवराज 2007 टी-20 विश्व कप और 2011 के 50 ओवर विश्व कप में भारतीय टीम के हीरो थे। लेकिन, आइपीएल के इस सत्र में उनके मौजूदा फॉर्म से उनके अंतरराष्ट्रीय करियर सहित खुद के आइपीएल में भी खेलने पर सवाल उठ गए। युवराज इस सत्र में आठ मैचों में सिर्फ 65 रन बना सके, जिसमें उनका उच्चतम स्कोर 20 रन था। अपने आइपीएल करियर में युवराज को वैसी सफलता नहीं मिली जैसी कि भारत के लिए मिली। उन्होंने 128 आइपीएल मैचों में 12 अर्धशतकों की मदद से 2652 रन बनाए हैं। वह आइपीएल में कभी वैसे मैच विजेता बनकर नहीं उभर सके जैसा कि वह किसी दौर में भारत के लिए रहे हैं।

युवराज आइपीएल में किंग्स इलेवन पंजाब के अलावा पुणे वॉरियर्स, रॉयल चैलेंजर्स बेंगलूर, सनराइजर्स हैदराबाद और दिल्ली डेयरडेविल्स के लिए भी खेल चुके हैं, लेकिन आइपीएल में कामयाबी उनसे हमेशा कोसों दूर ही रही। पंजाब के मुख्य कोच ब्रैड हॉज ने कहा कि वह भारत के स्टार खिलाड़ी है। हमें पता है कि कभी न कभी अच्छी चीजों और अच्छे समय का अंत होता ही है, लेकिन यह कब (युवराज के लिए) होगा, इसका जवाब देने के लिए मैं सही व्यक्ति नहीं हूं।

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Posted By: Sanjay Savern