जागरण न्यूज नेटवर्क, नई दिल्ली। चेन्नई सुपर किंग्स के बल्लेबाज सुरेश रैना ने दैनिक जागरण से कहा था कि उनकी टीम बूढ़ी नहीं बल्कि अनुभवी है और यह बात सही साबित हुई क्योंकि सीएसके ने सबसे पहले आइपीएल फाइनल में प्रवेश किया। भारत की विश्व चैंपियनशिप जीत पर सुनील गावस्कर की 1985 की किताब 'वन डे वंडर्स' में एक रोचक घटना का जिक्र है जिसमें गावस्कर, मोहिंदर अमरनाथ और मदन लाल सभी 30 वर्ष से ऊपर के थे और आपस में एक दूसरे को 'ओटी' कहकर बुलाते थे।

ऑस्ट्रेलिया में टूर्नामेंट के दौरान इन तीनों में से कोई भी जब अच्छा कैच लपकता या चुस्त फील्डिंग करता तो बाकी आकर कहते, 'वेल डन ओटी'। 'ओटी' यानी 'ओवर थर्टी' मतलब 30 वर्ष से अधिक उम्र के खिलाड़ी। उस प्रदर्शन ने साबित कर दिया था कि उम्र महज एक आंकड़ा है और उसी की याद दिलाई है महेंद्र सिंह धौनी की सीएसके ने जो तीसरे आइपीएल खिताब से एक जीत दूर है। धौनी की टीम अनुभवी खिलाडि़यों की ऐसी फौज बनकर उभरी है जिसके किले को भेदना हर विरोधी टीम के लिए टेढ़ी खीर साबित हुआ है।

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इस टीम में खिलाडि़यों की औसत उम्र 34 वर्ष के पार है। खुद धौनी 36 वर्ष के हैं जबकि अंबाती रायुडू 32, सुरेश रैना 31, शेन वॉटसन और हरभजन सिंह 37-37 वर्ष के हैं। शुरुआत में सभी ने इसे 'बूढ़ों की फौज' कहकर खारिज कर दिया था। दो साल के प्रतिबंध के बाद वापसी करने वाली चेन्नई की सफलता का आखिर राज क्या है? इसमें कोई शक नहीं कि धौनी के चतुर क्रिकेटिया दिमाग को इसका श्रेय जाता है। चेन्नई ने आधी जंग तो नीलामी के दौरान ही जीत ली थी जब उसने अनुभव पर दांव लगाया। रायुडू (586) आरेंज कैप धारी केन विलियमसन से 100 रन पीछे हैं। वहीं शार्दुल ठाकुर 15 विकेट ले चुके हैं। करियर के आखिरी पड़ाव पर पहुंचे धौनी ने 15 मैचों में 455 रन कूटे हैं जिसमें 30 छक्के शामिल हैं। धौनी का यह आठवां फाइनल और बतौर कप्तान सातवां खिताबी मुकाबला होगा। चेन्नई के इस 'थलइवा' ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि अनुभव का कोई सानी नहीं।

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Posted By: Ravindra Pratap Sing

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