नई दिल्ली, जेएनएन। आइपीएल का 11वां मैच रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर और सनराइजर्स हैदराबाद के बीच खेला गया। एक तरफ हैदराबाद लगातार अच्छा परफॉर्म कर पॉइंट टेबल में टॉप-3 पर बनी हुई है तो दूसरी तरफ विराट कोहली की बैंगलोर को अब भी आइपीएल के इस सीजन में पहली जीत का इंतजार है।   

बैंगलोर ने अपने तीसरे मुकाबले में टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी का फैसला किया। पहले बल्लेबाजी करने उतरी हैदराबाद की शुरुआत कमाल की रही। डेविड वॉर्नर (100) और जॉनी बेयरस्टो (114) के बीच 98 गेंदों में 185 रनों की साझेदारी हुई। इन दोनों की तूफानी बल्लेबाजी से हैदराबाद 231 जैसा पहाड़ स्कोर खड़ा करने में सफल रही।

पहली पारी जितनी हैरान करने वाली थी उससे कई ज्यादा हैरानी दूसरी पारी देख कर हुई। 231 के लक्ष्य के बाद सभी को उम्मीद थी कि बैंगलोर की टीम जी जान लगा देगी। लेकिन फैन्स तब चौंक गए जब बैंगलोर की टीम ने शुरुआत में ही हार मान ली। 10वें ओवर से पहले ही उसके 6 बल्लेबाज वापस पवेलियन लौट चुके थे। टीम ने लगातार विकेट गंवाएं और 113 रन पर ऑलआउट हो गई।  

तो आईए एक नज़र डालते हैं रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर की इस सीजन लगातार असफल होने की वजहों पर। 

बैटिंग लाइन-अप में हो रहे लगातार बदलाव

आरसीबी का बल्लेबाजी क्रम इस सीजन में काफी संघर्ष करता दिख रहा है। और इसी वजह से बैंगलोर लगातार अपनी बैटिंग लाइन-अप में बदलाव कर रहा है। हैदराबाद के खिलाफ मैच में यह तीसरी बार देखा गया जब बैंगलोर ने अपने ओपनिंग पेयर में बदलाव किया हो। इस बार पार्थिव पटेल और युवा कैरिबियन खिलाड़ी शिमरॉन हेमयर की ओपनिंग जोड़ी ने पारी की शुरुआत की। टीम को समझना होगा कि लगातार बदलाव से रातों-रात परिणाम नहीं निकल सकते। अगर बैंगलोर के इतिहास को देखा जाए तो विराट ने जब भी ओपनिंग की है टीम को फायदा मिला है। लेकिन इसके बावजूद विराट एक ही बार ओपनिंग करने आए।   

वर्ल्ड क्लास गेंदबाज भी हो रहे हैं नाकाम 

हैदराबाद के खिलाफ बैंगलोर की गेंदबाजी बेहद कमजोर दिखी। जिसकी वजह से मैच में आइपीएल के इतिहास की सबसे बड़ी ओपनिंग पार्टनरशिप देखी गई। इससे पहले ये रिकॉर्ड गौतम गंभीर और क्रिस लिन के नाम था, जिनके बीच साल 2017 में 184 रनों की साझेदारी हुई थी। डेविड वॉर्नर (100) और जॉनी बेयरस्टो (114) के बीच 98 गेंदों में 185 रनों की साझेदारी हुई। इसमें कोई शक नहीं कि इन दोनों बल्लेबाजों ने कमाल की बैटिंग की लेकिन बैंगलोर के गेंदबाज भी सही जगह बॉल डालने में नाकाम रहे। बैंगलोर के गेंदबाज मैच के दौरान लगातार विकेट झटकने में असफल रहे। वॉर्नर-बेयरस्टो ने पॉवर प्ले में 59 रन जोड़े और उसके बाद गेंदबाज उन्हें रोक ही नहीं सके। उमेश यादव ने पिछले सीजन में बेहतरीन गेंदबाजी की थी लेकिन इस सीजन में वह संघर्ष कर रहे हैं। युजवेंद्र चहल टीम के इकलौते गेंदबाज हैं जो सफल हुए हैं। RCB को अपनी गेंदबाजी में जरूर बदलाव करने चाहिए।

मनोवैज्ञानिक प्रेशर

यूं तो पेपर पर बैंगलोर की टीम स्टार क्रिकेटर्स से सजी हुई है। लेकिन मैदान पर यही टीम काफी कमजोर नजर आती है। लगातार हार का मनोवैज्ञानिक असर टीम के प्रदर्शन पर साफ तौर पर पड़ रहा है। हालांकि, टीम में कई ऐसे दिग्गज खिलाड़ी हैं जो मुश्किल समय में अच्छा खेल दिखाने के लिए जाने जाते हैं। लेकिन हैदराबाद के खिलाफ इनमें से एक भी खिलाड़ी धैर्य से नहीं खेल सका। दो मैच पहले ही हार चुकि बैंगलोर पहले हैदराबाद को बड़ा स्कोर खड़ा करने से नहीं रोक सकी और फिर उस लक्ष्य का हासिल करने के लिए लड़ने की बजाय पहले ही हार मान ली और धड़ाधड़ विकेट गंवा दिए। 

Posted By: Ruhee Parvez