नई दिल्ली, जेएनएन। आइपीएल 2019 में लंबी जद्दोजहद के बाद एक बार फिर ग्रुप स्टेज का अंत रोमांच भरा रहा। प्लेऑफ में जगह बनाने वाली चौथी टीम कौन सी होगी इसका फैसला आखिरी मैच में हुआ। इस बार टूर्नामेंट का ग्रुप स्टेज बेहद करीबी रहा। लेकिन अंत में मुंबई इंडियंस, चेन्नई सुपरकिंग्स, दिल्ली कैपिटल्स और हैदराबाद सनराइजर्स प्लेऑफ में जगह बनाने में सफल रहीं।

इस सीजन कुछ स्टार खिलाड़ियों की खराब परफॉर्मेंस रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर, राजस्थान रॉयल्स और कोलकाता नाइट राइडर्स जैसी टीमों के प्लेऑफ में न शामिल होने का मुख्य कारण रहा। टूर्नामेंट से पहले इन खिलाड़ियों से उम्मीद थी कि वह टीम के लिए बेहतरीन खेल दिखाएंगे लेकिन ऐसा नहीं हो सका। हालांकि अभी सीजन का अंत नहीं हुआ है लेकिन फिर भी परफॉर्मेंस में सुधार के लिए सभी टीमों के थिंक टैंक ने कुछ खिलाड़ियों को अगले साल न खिलाने का फैसला जरूर कर लिया होगा। टीम की प्लेइंग इलेवन में जगह बनाने के लिए खिलाड़ियों में ज़बरदस्त होड़ लगी रहती है। ऐसे में जो खिलाड़ी परफॉर्म करने में नाकाम रहे हैं उनका अगले साल रिटेन होना भी मुश्किल है।  

हम आपको बता रहे हैं ऐसे ही 8 खिलाड़ियों के बारे में जिन्हें अगले साल मौका मिलना मुश्किल है:

बेन स्टोक्स- राजस्थान रॉयल्स

राजस्थान के लिए 12वां सीजन साधारण ही रहा। इसकी असल वजह है विदेशी खिलाड़ियों का फीका खेल। इस टीम ने विदेशी खिलाड़ियों पर जो भारी रकम खर्च की उसका टीम को लाभ नहीं मिल पाया। खासतौर पर बेन स्टोक्स। टीम मैनेजमेंट ने स्टोक्स को 12.5 करोड़ रुपये की भारी-भरकम राशि में रिटेन किया था। राजस्थान को उनसे ऑलराउंड खेल की उम्मीद थी, लेकिन स्टोक्स पूरे टूर्नामेंट भर अपना फॉर्म ही तलाशते रह गए, इस इंग्लिश ऑलराउंडर ने महज 9 मैच ही खेले। जहां 20.50 की लचर औसत से 123 रन बनाए। वे 11.22 की औसत से सिर्फ 6 विकेट लेने में सफल हुए। इस लिहाज से देखा जाए तो राजस्थान को स्टोक्स का 1 रन 10 लाख रुपए से ज्यादा का पड़ गया।

युवराज सिंह- मुंबई इंडियंस

युवराज सिंह का परफॉर्मेंस पिछले कई आइपीएल सीजन से खराब ही चल रहा है। इसके बावजूद मुंबई इंडियंस ने टीम इंडिया के स्टार खिलाड़ी को एक बार फिर मौका दिया। मुंबई ने युवराज को प्लेइंग इलेवन में शामिल भी किया लेकिन जल्द ही उनकी जगह युवा खिलाड़ी इशान किशन को मौका दे दिया। हालांकि, फैन्स को उम्मीद है कि मुंबई प्लेऑफ में युवराज को एक बार फिर प्लेइंग इलेवन में शामिल करेगी। लेकिन युवी जैसे स्टार खिलाड़ी का टीम में होने का क्या मतलब अगर उसे खेलने का मौका देना ही मुश्किल हो। ऐसा हो सकता है कि यह सीजन आइपीएल में युवराज के लिए आखिरी साबित हो।

यूसुफ पठान- सनराइजर्स हैजराबाद

आइपीएल में अपनी ऑलराउंड प्रदर्शन से यूसुफ पठान ने कई मैचों का पासा पलटा है, लेकिन शायद अब उनके दिन लद गए हैं। इस सीजन में वह हैदराबाद की टीम से खेल रहे हैं और अभी तक टीम उन्हें ठीक तरह से इस्तेमाल नहीं कर पाई है। हैदराबाद का पठान पर ज्यादा भरोसा नहीं होने की वजह से उन्हें ज्यादा मौका नहीं मिला है। इसके अलावा उनकी फील्डिंग भी खराब रही है। इस बार इस 36 साल के खिलाड़ी ने 10 मैचों में सिर्फ 40 रन ही बनाए हैं। सबसे हैरान करने वाली यह है कि उनका स्ट्राइक रेट 88.88 रहा है। सनराइजर्स हैदराबाद आइपीएल के अगले सीजन में पठान की जगह किसी युवा खिलाड़ी को जरूर शामिल करना चाहेगी।

उमेश यादव- रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर

 

आरसीबी की इस सीजन बेहद खराब प्रदर्शन के पीछे उनके गेंदबाजों का हाथ रहा। बैंगलोर के सबसे अनुभवी गेंदबाज उमेश यादव पिछले सीजन में 20 विकेट लेकर टॉप गेंदबाजों में शुमार थे और इसलिए कप्तान कोहली ने उन्हें इस साल भी खिलाने पर ज़ोर दिया। हांलाकि, ये सीजन यादव के लिए एक बुरे सपने से कम नहीं रहा। यादव ने 9.80 की इकोनॉमी के साथ 11 मैचों में सिर्फ 8 विकेट ही हासिल किए। आपको बता दें कि RCB खराब परफॉर्म कर रहे अपने खिलाड़ियों को बदलने में देर नहीं लगाती। 

एंड्रयू टाए- किंग्स इलेवन पंजाब

32 साल के गेंदबाज एंड्रयू टाए के लिए साल 2018 का आइपीएल सीजन बेहतरीन साबित हुआ था। टाए 24 विकेट के साथ सीजन के लीडिंग विकेट टेकर रहे थे। टाए नक्ल बॉल करने में माहिर थे और बल्लेबाज उनकी इस गेंद समझने में नाकाम हो रहे थे। दुर्भाग्यवश उसके बाद से उनके करियर का ग्राफ नीचे ही जा रहा है। टाए को ऑस्ट्रेलियाई टीम में भी मौका नहीं मिला। इसलिए माना जा रहा था कि आइपीएल में अपने आपको साबित कर वह एक बार फिर ऑस्ट्रेलियाई टीम में जगह बनाने में कामयाब हो पाएंगे। लेकिन आइपीएल-12 में भी वह बुरी तरह फेल रहे। टाए ने 6 मैचों में 10.59 की इकॉनोमी के साथ 3 विकेट चटकाए। 

रॉबिन उथप्पा - कोलकाता नाइट राइडर्स

गंभीर के बाद रॉबिन उथप्पा कोलकाता नाइट राइडर्स के लिए सबसे ज़्यादा रन बनाने वाले बल्लेबाज हैं। लेकिन इस शानदार रिकॉर्ड के बावजूद इस साल उथप्पा को कई बार टीम में शामिल नहीं किया गया। नितीश राणा और शुभमन गिल जैसे युवा खिलाड़ियों की तुलना उथप्पा धीमी बल्लेबाजी करते हैं। केकेआर के साल के आखिरी मैच में भी उथप्पा 25 गेंदों में एक भी रन नहीं बना पाए थे। अगले सीजन में केकेआर इस बल्लेबाज की जगह नए खिलाड़ी को शामिल कर सकता है।  

संदीप लामीचने- दिल्ली कैपिटल्स

आइपीएल का यह सीजन दिल्ली कैपिटल्स के लिए यादगार रहा है। दिल्ली 7 साल बाद प्लेऑफ में जगह बनाने में सफल हुई है। खास बात यह रही कि दिल्ली हर मैच में एक टीम की तरह खेली। टीम की जीत में हर खिलाड़ी का अहम योगदान रहा। हालांकि टीम के स्पिनर गेंदबाज संदीप लामीचने ने उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन नहीं किया। लामीचने की परफॉर्मेंस को खराब नहीं कहा जा सकता लेकिन खास भी नहीं थी। लामीचने ने 6 मैचों में 8 विकेट लिए लेकिन 9.13 की इकोनॉमी से काफी रन भी लुटाए। जबकि ये मैच दिल्ली के फिरोजशाह कोटला में खेले गए, जहां कि पिच स्पिन गेंदबाजी के लिए बेस्ट है। अगले सीजन में दिल्ली लामीचने की जगह किसी अनुभवी स्पिनर को शामिल कर सकती है।

केदार जाधव- चेन्नई सुपर किंग्स

चेन्नई ने इस साल अपने गेंदबाजों के दम पर एक बार फिर प्लेऑफ में पहुंचने में कामयाब रही। लेकिन इसके बावजीद टीम की बैटिंग लाइन अप पर काफी सवाल उठ रहे हैं। टीम के कुछ बल्लेबाज इस साल खास योगदान नहीं दे पाए। इनमें से एक हैं केदार जाधव। जाधव ने चोटिल होने की वजह से पिछला पूरा सीजन मिस किया था। इस सीजन में भी जाधव ने 14 मैचों में 20.25 की एवरेज से सिर्फ 162 रन ही बनाए। 

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Posted By: Ruhee Parvez