आइपीएल की टीम सनराइजर्स हैदराबाद में कई विदेशी खिलाड़ी अपनी चमक बिखेर रहे हैं लेकिन कुछ मुहम्मद नबी की तरह भी हैं जिन्हें अच्छे प्रदर्शन के बावजूद अपनी बारी का इंतजार करना पड़ रहा है। नबी एक ऑलराउंडर की हैसियत से टीम में खेल रहे हैं और अफगानिस्तान टीम के धुरंधर खिलाडि़यों में से एक हैं। सनराइजर्स हैदरबाद के विदेशी खिलाड़ी अब आइपीएल छोड़कर विश्व कप कैंप में शामिल होने जाने लगे हैं। ऐसे में अब बैकअप खिलाडि़यों को मौका मिलेगा जिसमें नबी भी शामिल हैं। आइपीएल में सनराइजर्स की अब तक की रणनीति और आगे की तैयारियों को लेकर मुहम्मद नबी से अभिषेक त्रिपाठी ने विस्तार से बातचीत की। पेश हैं मुख्य अंश :

-10 में से पांच मैच हारने के बाद आपकी टीम को प्लेऑफ में पहुंचने के लिए कितनी मेहनत करनी पड़ेगी?

-देखिए कड़ी मेहनत तो करनी पड़ेगी क्योंकि अब सिर्फ चार मैच बच गए हैं। चार में से तीन मैच हमें जीतने पड़ेंगे और हम इसकी पूरी कोशिश करेंगे। हम जितने भी मैच हारे हैं वह एकतरफा नहीं हारे हैं। अंतिम लम्हों में जाकर हारे हैं। हमें देखना होगा कि अंतिम लम्हों में हम क्या गलतियां कर हैं कि हार मिल रही है। ऐसे में हमें यहीं रणनीति बनानी पड़ेगी कि हम कैसे ये चार मुकाबले खेलें। कोशिश रहेगी कि हम प्लेऑफ तक पहुंचे।

-पहले भुवनेश्वर और फिर विलियमसन ने कप्तानी संभाली। एक मैच में फिर भुवी कप्तान रहे। क्या इस बार-बार के परिवर्तन से टीम संयोजन पर फर्क रहा है ?

-केन विलियमसन शुरुआती दो-तीन मुकाबलों तक फिट नहीं थे। पिछले मुकाबले से पहले उनकी दादी चल बसीं जिसकी वजह से उन्हें लौटना पड़ा। हालांकि टीम संयोजन लेकर कोई मसला नहीं है। उम्मीद है कि केन वापस लौटेंगे और टीम से जुड़ेंगे।

-आपको जितने मौके मिले, उसमें आपने अच्छा प्रदर्शन किया लेकिन इसके बावजूद आपको टीम में जगह नहीं मिल पा रही है?

-विरोधी टीम को देखकर हमारी टीम तय की जाती है। आइपीएल जैसे बड़े टूर्नामेंट में आप अच्छे प्रदर्शन के बावजूद टीम से बाहर हो सकते हैं। सब अच्छा चल रहा है। मुझे अपने खेल को और अच्छा करना होगा। जब भी मुझे मौका मिलेगा तो मैं बेहतर प्रदर्शन करने के लिए तैयार हूं।

-विश्व कप की वजह से कई खिलाड़ी आइपीएल को बीच में छोड़कर जा रहे हैं। क्या यह टीम के दूसरे खिलाडि़यों के लिए एक मौका होगा ?

-जिन खिलाडि़यों को मौका नहीं मिल पा रहा है वह भी विश्व स्तर के खिलाड़ी हैं और उम्मीद है कि टीम संयोजन में कोई दिक्कत नहीं होगी। हालांकि जो हमारे खेल की गति है, उसमें थोड़ा फर्क पड़ सकता है लेकिन फिर भी टीम के पास अच्छे विकल्प हैं जिससे दिक्कत नहीं आनी चाहिए।

-मनीष पांडे को पिछले सत्र में हमने धीमी बल्लेबाजी करते देखा है लेकिन चेन्नई के खिलाफ वह काफी तेज बल्लेबाजी करते देखे गए। क्या यह बदलाव दबाव की वजह से आया है?

-ऐसा नहीं है। उसे चेन्नई के खिलाफ एक अच्छा मौका मिला और मेरे ख्याल से वह सही क्रम पर बल्लेबाजी करने आया। बहुत खुशी हुई उसके प्रदर्शन को देखकर क्योंकि आने वाले मुकाबलों में उसका फॉर्म हमारे काम आएगा। अगर फॉर्म में चल रहे विदेशी खिलाड़ी विश्व कप की तैयारियों को लेकर टीम को छोड़कर जाते हैं तो घरेलू खिलाडि़यों को जिम्मेदारी उठानी होगी।

-दीपकहुड्डा और युसूफ पठान जैसे खिलाड़ी इस सत्र में नहीं चल पा रहे हैं। क्या कहेंगे?

-वे कोशिश तो कर रहे हैं लेकिन संभवत: उन्हें बल्लेबाजी करने का पूरा मौका नहीं मिल पा रहा है। अगर मौका मिलता भी है तो आखिर के एक या दो ओवर मिलते हैं। ऐसे में उम्मीद है कि अगर उनको आने वाले चार मैचों में मौके मिले तो वह अच्छा प्रदर्शन करेंगे। यूसुफ को कम ओवर खेलने को मिले हैं जिसका असर हो सकता है।

-क्या विलियमसन के जाने से टीम के प्लेऑफ में पहुंचने में दिक्कत आएगी? भुवनेश्वर और विलियमसन की कप्तानी में क्या फर्क है ?

-केन (विलियनसन) तो वापस आएंगे और टीम से जुड़ेंगे। रही बात कप्तानी की तो विलियमसन एक बल्लेबाज हैं और भुवनेश्वर एक गेंदबाज हैं। जब गेंदबाजी में तब्दीली करनी हो या क्षेत्ररक्षण में बदलाव करना हो तो बहुत फर्क पड़ता है। ये बदलाव जल्दी-जल्दी करने पड़ते हैं। ऐसे में मेरी नजर में दोनों की कप्तानी में थोड़ा फर्क है।

Posted By: Sanjay Savern